स्वास्थ्य विभाग में निजीकरण और आउटसोर्सिंग पर रोक लगे, लंबित वेतनमान तत्काल लागू हो : स्वास्थ्य कर्मचारी संघ

स्वास्थ्य विभाग में निजीकरण और आउटसोर्सिंग पर रोक लगे, लंबित वेतनमान तत्काल लागू हो : स्वास्थ्य कर्मचारी संघ
*बेमेतरा | 22 जुलाई 2026 |* छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ की जिला इकाई बेमेतरा ने आज अपनी 9 सूत्रीय मांगों को लेकर मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य सचिव के नाम कलेक्टर बेमेतरा को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन जिला अध्यक्ष प्रणीत सिंधु के नेतृत्व में सौंपा गया।

*8वें वेतन आयोग से पहले वेतन विसंगति दूर करो*
जिला अध्यक्ष प्रणीत सिंधु ने बताया कि स्वास्थ्य कर्मचारियों के पुनरीक्षित वेतनमान का प्रस्ताव स्वास्थ्य विभाग द्वारा शासन को कई वर्ष पूर्व भेजा जा चुका है। इस मांग को लेकर वर्ष 2023 में प्रदेशव्यापी अनिश्चितकालीन कामबंद हड़ताल भी की गई थी। उस समय शासन ने सकारात्मक कार्यवाही का लिखित आश्वासन देकर आंदोलन स्थगित कराया था, लेकिन तीन साल बाद भी प्रस्ताव जस का तस पड़ा है। यदि 8वां वेतन आयोग लागू होने से पहले पुनरीक्षित वेतनमान नहीं मिला तो हजारों कर्मचारियों को लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान होगा, जिससे कर्मचारियों में भारी आक्रोश है।

*निजीकरण से नौकरी और मरीजों की जेब दोनों पर खतरा*
संघ ने कहा कि वर्तमान में जिला अस्पतालों और सीएचसी-पीएचसी की लैब को एचएलएल (HLL) कंपनी को देने और परिसर में अमृत फार्मेसी खोलने के आदेश से यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि सरकार धीरे-धीरे स्वास्थ्य विभाग का निजीकरण कर रही है। इससे एक तरफ नियमित कर्मचारियों की नौकरी असुरक्षित होगी, वहीं दूसरी तरफ गरीब मरीजों को मुफ्त जांच और दवा की सुविधा बंद होकर निजी दरों पर भुगतान करना पड़ेगा। निजीकरण से स्वास्थ्य सेवाओं का सार्वजनिक चरित्र खत्म होगा और गुणवत्ता पर भी विपरीत असर पड़ेगा।
*फर्जी डिग्री वालों का खतरा*
संघ ने एक अन्य गंभीर मुद्दा उठाते हुए कहा कि प्रदेश के बाहर के डॉक्टर, नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ के लिए छत्तीसगढ़ में पंजीयन की अनिवार्यता खत्म करने से प्रदेश के प्रशिक्षित बेरोजगार युवाओं के भविष्य पर संकट आ गया है। संघ ने आशंका जताई कि इससे फर्जी डिग्री और डिप्लोमा धारियों की घुसपैठ बढ़ेगी, जो सीधे तौर पर मरीजों की जान से खिलवाड़ है। संघ ने सभी बाहरी स्वास्थ्य कर्मियों का छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल / नर्सिंग काउंसिल में पंजीयन अनिवार्य करने की मांग की है।
*संघ की 9 प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं -*
*1.* पुनरीक्षित वेतनमान के प्रस्ताव पर तत्काल निर्णय लिया जाए।
*2.* ओपीडी एक पाली, आधार बेस्ड अटेंडेंस में व्यावहारिक सुधार, पदनाम परिवर्तन, रेडिएशन व जोखिम भत्ता, आवास और समयमान वेतनमान जैसी लंबित मांगों का निराकरण हो।
*3.* स्वास्थ्य विभाग में किसी भी प्रकार के निजीकरण, ठेका प्रथा और आउटसोर्सिंग पर पूर्ण रोक लगे।
*4.* बाहर से आने वाले समस्त हेल्थ वर्कर्स का पंजीयन अनिवार्य किया जाए।
*5.* प्रदेश में स्वीकृत सेटअप के विरुद्ध लगभग 35 से 40 प्रतिशत रिक्त पदों पर तत्काल सीधी भर्ती शुरू की जाए।
*6.* संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए समान कार्य समान वेतन की स्पष्ट नीति बने।
*7.* जीवनदीप समिति के कर्मचारियों के मानदेय में जिलावार अंतर खत्म कर पूरे प्रदेश में एक समान वेतन नीति लागू हो।
*8.* लंबे समय से कार्यरत, अनिवार्य सेवा वाले संविदा कर्मियों के लिए नियमित सेटअप स्वीकृत किया जाए।
*9.* स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य आयोग का गठन किया जाए।
श्री सिंधु ने चेतावनी दी कि यदि शासन स्तर पर 15 दिनों के भीतर सकारात्मक पहल नहीं हुई तो संघ प्रांत स्तरीय महासमिति के निर्णय अनुसार प्रदेशव्यापी आंदोलन करने को बाध्य होगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
इस अवसर पर जिला कार्यकारिणी के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में स्वास्थ्य कर्मचारी उपस्थित रहे ।



