कविता : 01 जुलाई यमलोक में मेरा जन्म दिन…

01 जुलाई यमलोक में मेरा जन्म दिन
कहने को तो आज मेरा जन्म दिन है
मगर इसमें ऐसा क्या खास
उल्टा एक एक सेकेंड, मिनट, घंटे, महीने दिन के साथ
जीवन का एक और वर्ष कम हो गया,
अंतिम साँस और यात्रा का समय और पास आ गया।
फिर भी आप सब मुझे बधाइयां शुभकामनाएं दे रहे हैं
मेरे दीर्घायु जीवन की कामना कर रहे हैं,
मगर मुझे दीर्घायु जीवन की नहीं
जिन्दा रहने की चाहत है,
उसकी शुभकामनाएं देनेसे बच रहे हैं,
या मेरे जिन्दा रहने से डर रहे हैं
मगर पूरी ईमानदारी से औपचारिकता निभा रहे हैं।
जिसे हम भी बिना किसी लाग-लपेट के स्वीकार रहे हैं,
औपचारिक आभार धन्यवाद कर रहे हैं,
जबरन जन्मदिन मना रहे हैं।
मित्र यमराज की बधाइयां शुभकामनाएं भी
लेने को मजबूर हो रहे हैं,
क्योंकि मुफ्त में एक बड़ा सा केक भी तो
उसी के साथ काट कर मगन हो रहें
उपहार स्वरूप यमलोक में शान्ति निकेतन
श्रीमती जी के साथ स्वीकार कर रहे हैं,
यमलोक में रहने का अग्रिम प्रबंध
धरती लोक से ही कर रहे हैं,
जीने और जिंदा रहने की अब फिक्र नहीं है
क्योंकि जन्मदिन मनाने के लिए
अभी कुछ और या कहें तो सौ-दो सौ साल
धरती पर ही रुक रहे हैं
तब तक यमलोक शान्ति निकेतन की
देखभाल का जिम्मा मित्र यमराज के हवाले कर रहे हैं,
अब आप लोग परेशान बिल्कुल न हों
आप सबके लिए भी यमलोक आवास योजना का
प्रस्ताव पास करवा रहे हैं,
छोड़िए! आप सब तो बड़े स्वार्थी हो रहे हैं
फिलहाल हम अपना जन्मदिन
प्रिय मित्र यमराज के साथ यमलोक में मना रहे हैं,
लौटकर आप सबसे एक बृहद मुलाकात का प्रबंध
दावत के साथ यमराज के भरोसे करने का
एक अदद ईमानदारी से जुगाड़ करके आ रहे हैं।
सुधीर श्रीवास्तव
गोण्डा, उत्तर प्रदेश



