
Chhattisgarh धमतरी जिले के नगरी क्षेत्र से बड़ी खबर सामने आ रही है। जल, जंगल और जमीन के मुद्दों को लेकर एक बार फिर आंदोलन तेज होने वाला है। नगरी जल-जंगल-जमीन संघर्ष समिति ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए 7 जुलाई से कर्राघाटी चौक में मांगें पूरी होने तक चक्का जाम करने का ऐलान किया है। समिति का आरोप है कि 22 जून को हुए कलेक्ट्रेट घेराव के बाद भी प्रशासन ने उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। आखिर क्या हैं उनकी प्रमुख मांगें और क्यों फिर से आंदोलन की राह चुनी गई है…
नगरी जल-जंगल-जमीन संघर्ष समिति सीतानदी-उदंती धमतरी-गरियाबंद क्षेत्र ने 7 जुलाई को नगरी के कर्राघाटी चौक में अनिश्चितकालीन चक्का जाम करने की घोषणा की है। इस संबंध में समिति ने जिला कलेक्टर को लिखित सूचना सौंपते हुए स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, आंदोलन जारी रहेगा।
समिति का कहना है कि 22 जून को कलेक्ट्रेट घेराव, रैली और अनिश्चितकालीन आंदोलन के दौरान प्रशासन ने समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक किसी भी मांग पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसी वजह से क्षेत्र के लोगों में नाराजगी लगातार बढ़ रही है।
समिति का दावा है कि आजादी के करीब 79 वर्ष बाद भी सीतानदी-उदंती वनांचल क्षेत्र के कई गांव आज भी सड़क, पुल, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और भूमि अधिकार जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। ग्रामीणों को आज भी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
समिति का कहना है कि सरकार और प्रशासन की ओर से बार-बार आश्वासन तो दिए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर विकास कार्य नहीं हो रहे हैं।
संघर्ष समिति ने अपनी मांगों में क्षेत्र की कई महत्वपूर्ण सड़कों के निर्माण को प्राथमिकता दी है। इनमें अरसीकन्हार-गरहाडीही, गहनासियार-जोरातराई, खल्लारी-चमेंदा और खल्लारी-लिखमा मार्ग शामिल हैं। इसके अलावा ठेंनही, बेलरबाहरा, मेचका, बोरई, लिखमा, कट्टीगांव, बहीगांव और बीरनसिल्ली पंचायतों के आश्रित गांवों तक सड़क सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
समिति ने सोदुर नदी, आमाकाढ़ा नदी, गारंजी नदी, करारा पड़ाव और बेलर-बोरई मार्ग पर पुल निर्माण की भी मांग उठाई है, ताकि बारिश के मौसम में ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी न हो।
समिति ने धमतरी और गरियाबंद जिले के वनांचल क्षेत्रों में जल्द से जल्द विद्युतीकरण की मांग की है। साथ ही सभी वन ग्रामों को राजस्व ग्राम घोषित कर भूमि अधिकार देने, भुइयां पोर्टल में सुधार करने और आदिवासी समाज के संवैधानिक तथा पारंपरिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग रखी गई है..

समिति का कहना है कि वर्षों से इन मांगों की अनदेखी की जा रही है, जिससे आदिवासी समाज अपने अधिकारों से वंचित है।
समिति ने वन विभाग के अधिकारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि रिसगांव के वन परिक्षेत्र अधिकारी ने आदिवासी समाज और गोड़ी धर्म को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की, जिससे समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। समिति ने संबंधित अधिकारी के निलंबन की मांग की है।
इसके अलावा डीएफओ वरुण जैन के स्थानांतरण और कथित मारपीट के मामले में दंडात्मक कार्रवाई की मांग भी आंदोलनकारियों ने प्रशासन के सामने रखी है।
इस आंदोलन को किसान संघर्ष समिति बेलरबाहरा, अभयारण्य संघर्ष समिति रिसगांव, बोरई एवं बहीगांव, जय अंबेडकरवादी युवा संगठन राजापड़ाव और किसान मजदूर संघर्ष समिति उदंती-गरियाबंद सहित कई सामाजिक संगठनों का समर्थन मिल चुका है।
समिति का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो 7 जुलाई से कर्राघाटी चौक में व्यापक चक्का जाम किया जाएगा और मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
