CG – कमाल की सोच : गांव बना ओपन बुक, हर दीवार से मिलेगा ज्ञान, स्कूल ही नहीं पूरे गांव को बना दिया पाठशाला, दीवारों पर प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए लिखे सैकड़ों सवाल……

बिलासपुर। अगर कोई कहे कि इस गांव की दीवारें बच्चों को अफसर बनने का सपना दिखा रही हैं। तो शायद यकीन न हो। लेकिन बिलासपुर के बेलतरा क्षेत्र के सेलर गांव में यही हकीकत है। जहां हर गली की दीवार अब किताब है। गांव के दीवारों को सरपंच व जनप्रतिनिधियों ने ओपन बुक में तब्दील कर दिया है। इसमें सामान्य ज्ञान के अलावा देश -दुनिया में घट रही ताजी घटनाओं की जानकारी दी गई है। समय-समय पर ओपन बुक को अपडेट भी करेंगे। इसके पीछे गांव के युवाओं को पूरी तरह अपडेट रखना है।
सेलर की दीवारों अब पूरी तरह ओपन बुक में तब्दील हो गई है। ओपन बुक स्टाइल में इसे बदल दिया गया है। सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर वीडियो भी तेजी के साथ वायरल हो रहा है। यूर्जस का सकारात्मक कमेंट्स भी आने लगा है। ओपन बुक पर नजर डालें तो सामान्य ज्ञान के अलावा करेंट अफेयर्स, विज्ञान और भूगोल के सवाल और जवाब लिखे गए हैं।
नवाचार की होने लगी चर्चा
सेलर ओपन बुक को लेकर ग्राम पंचायत के सरपंच धनंजय सिंह, जनपद पंचायत बिल्हा के उपाध्यक्ष विक्रम सिंह और जनप्रतिनिधियों की सोच ने एक ऐसा नवाचार कर दिया है, जिसकी कल्पना गांव के शिक्षकों से लेकर युवा भी नहीं कर पाए। जनपद पंचायत के उपाध्यक्ष विक्रम सिंह का कहना है, दीवारों को सवालों और जवाब से सजाने से पहले बहुत बार सोचा गया। खाली दीवारों पर ऐसा क्या किया जाए, जिससे छात्रों के अलावा युवाओं को इसका लाभ मिले। तब ओपन बुक में तब्दील करने का विचार मन में आया और इसे कार्यरूप में तब्दील कर दिया गया। अब तो गांव के बच्चों और युवाओं से लेकर पढ़ी लिखी महिलाओं के कदम भी ओपन बुक पर ठिठक रही है और पढ़ भी रही हैं। अगर महिलाएं इसे रुचि लेकर पढ़ रही है ओर इसका सीधा असर बच्चों पर पड़ेगा। जाहिर सी बात है, महिलाएं बच्चों को सामान्य ज्ञान में पारंगत करेंगी और काम के बीच पढ़ाई भी कराएंगी।
सरपंच धनंजय सिंह ने बताया, शुरुआती दौर में 50 सवाल लिखे गए हैं। इसे समय-समय पर अपडेट किया जाएगा। युवाओं और छात्रों को ऐसे 300 के करीब सवालों और उसके जवाबों से सीधेतौर पर रु-ब-रू कराने की योजना है। ओपन बुक में लिखे सवालों को लेकर गांव में प्रतियोगी परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्रों को सम्मानित और पुरस्कृत करने की भी योजना बनाई जा रही है।
इस पहल का मकसद सिर्फ सामान्य ज्ञान बढ़ाना नहीं, बल्कि बच्चों में नियमित पढ़ने और खुद को परखने की आदत विकसित करना भी है। हर तीन महीने में नई प्रश्नावली, परीक्षा और पुरस्कार की व्यवस्था बच्चों में उत्साह बनाए रखेगी और सीखने की प्रक्रिया लगातार चलती रहेगी।
गांव के अभिभावक और जनप्रतिनिधि भी इस पहल को शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव मान रहे हैं। उनका कहना है कि यदि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी स्कूली स्तर से शुरू होगी तो ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और भविष्य में वे बड़ी परीक्षाओं में भी बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।



