नवजात शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (NSSK) पर जिला स्तरीय प्रशिक्षण

नवजात शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (NSSK) पर जिला स्तरीय प्रशिक्षण
खैरागढ़-छुईखदान-गंडई: मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में निरंतर प्रयासरत खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के स्वास्थ्य विभाग द्वारा यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से 5 अक्टूबर 2026 को जिला स्तरीय नवजात शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (NSSK) प्रशिक्षण का सफल आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य नवजात मृत्यु दर (NMR) में कमी लाना, जन्म के तुरंत बाद आवश्यक नवजात देखभाल (Essential Newborn Care) सुनिश्चित करना और सुरक्षित रेफरल व्यवस्था को मजबूत करना था।

जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ अनिल कुमार शुक्ला के मार्गदर्शन में तथा श्रीमति सोनल ध्रुव के सहयोग से आयोजित इस प्रशिक्षण में जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों और कार्यक्रमों से जुड़े 88 स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित किया गया। इनमें चिकित्सा अधिकारी, RBSK चिकित्सा अधिकारी, आयुष चिकित्सा अधिकारी, ग्रामीण चिकित्सा सहायक, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी एवं स्टाफ नर्स शामिल थे।

प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों को नवजात की उचित देखभाल, जन्म के तुरंत बाद पुनर्जीवन (Newborn Resuscitation), संक्रमण से बचाव और समय पर सुरक्षित रेफरल के लिए सक्षम बनाना था।
खतरे के संकेतों की पहचान: प्रतिभागियों को नवजात में खतरे के प्रमुख संकेतों की पहचान पर विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया, जैसे सांस तेज चलना, सुस्ती, दूध न पीना, छाती धंसना और शरीर ठंडा पड़ना। उन्हें बताया गया कि ऐसे लक्षण दिखने पर बच्चे को तुरंत आवश्यक सहायता और उपचार दिया जाना चाहिए।
व्यावहारिक अभ्यास: डमी (Mannequin) पर अभ्यास के माध्यम से जन्म के तुरंत बाद सांस न लेने वाले नवजात को दी जाने वाली पुनर्जीवन प्रक्रिया सिखाई गई। साथ ही कम वजन (Low Birth Weight) और समय से पहले जन्मे (Preterm) शिशुओं के लिए कंगारू मदर केयर (KMC) के महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई।
भ्रांतियों का निवारण: समुदाय में प्रचलित भ्रांतियों को दूर करने और माताओं व परिवारों को सही जानकारी देने पर भी जोर दिया गया। प्रतिभागियों को बताया गया कि जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान की शुरुआत, छह माह तक केवल स्तनपान (Exclusive Breastfeeding), नाभि की देखभाल और ठंड से बचाव (हाइपोथर्मिया प्रबंधन) से नवजात को सुरक्षित रखा जा सकता है।
यह प्रशिक्षण यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. गजेन्द्र सिंह के नेतृत्व एवं सहयोग से आयोजित किया गया। प्रशिक्षण के दौरान डॉ आशीष शर्मा सिविल सर्जन सह अस्पताल अधीक्षक और जिले के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ नीतू बनपुरिया द्वारा प्रदान किया गया। विशेषज्ञों ने स्वास्थ्यकर्मियों से अपील की कि वे संस्थागत प्रसव के दौरान तकनीकी प्रोटोकॉल का पालन करें और समुदाय, माताओं एवं परिवारों को नवजात सुरक्षा के प्रति जागरूक करें, ताकि हर शिशु का जीवन सुरक्षित हो सके। इस प्रशिक्षण का कुशल समन्वय श्री खिलेश साहू जिला डाटा प्रबंधक और उनकी टीम के द्वारा किया गया



