छत्तीसगढ़

पंडरिया में जर्जर भवन ढहा,9 से10 बकरियों की मौत,महिला और दो बच्चे बाल-बाल बचे, 15 साल पुराने भवन के जर्जर होने की पहले भी की गई थी शिकायत,अन्य भवनों पर भी मंडरा रहा खतरा।

कवर्धा/पंडरिया। नगर पालिका पंडरिया के आबादी क्षेत्र में स्थित श्मशान घाट परिसर में शनिवार सुबह करीब 11 बजे एक बड़ा हादसा हो गया। यहां वर्षों पुराना जर्जर भवन अचानक भरभराकर ढह गया। हादसे के दौरान मौके पर मौजूद एक महिला और दो बच्चों ने भागकर किसी तरह अपनी जान बचाई। वहीं भवन के नीचे बैठे यादव परिवार की 15 से 20 बकरियां मलबे में दब गईं।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस हादसे में 9 से 10 बकरियों की मौत हो गई है, जबकि 7 से 8 बकरियां गंभीर रूप से घायल बताई जा रही हैं। घटना की सूचना मिलते ही नगर पालिका और पशु चिकित्सा विभाग की टीम मौके पर पहुंची। जेसीबी की मदद से मलबा हटाकर दबे मवेशियों को बाहर निकाला गया। घायल बकरियों का पशु चिकित्सा विभाग के कर्मचारियों द्वारा उपचार किया जा रहा है।

15 साल पुराना भवन,शिकायतों के बावजूद नहीं हुई मरम्मत

स्थानीय लोगों के मुताबिक,श्मशान घाट परिसर में स्थित यह भवन करीब 15 साल पुराना था और लंबे समय से जर्जर हालत में था। इसकी खस्ताहाल स्थिति को लेकर नगर पालिका प्रशासन को पहले भी शिकायत और जानकारी दी गई थी। इसके बावजूद भवन की मरम्मत अथवा उसे सुरक्षित तरीके से हटाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। आखिरकार भवन ढह गया और कई बेजुबान पशुओं की जान चली गई।

परिसर के अन्य भवन भी जर्जर,कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा

स्थानीय लोगों ने बताया कि श्मशान घाट परिसर में दो से तीन अन्य भवन भी करीब 20 से 25 साल पुराने हैं। इनकी स्थिति भी मरम्मत योग्य बताई जा रही है। लोगों का कहना है कि समय रहते इन भवनों की जांच और मरम्मत नहीं कराई गई तो भविष्य में किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।

वहीं श्मशान घाट की भूमि पर करीब 25 से 30 परिवारों के कथित अवैध कब्जे और निवास का मामला भी चर्चा में है। इस संबंध में नगर पालिका प्रशासन की कार्रवाई को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

इस संबंध में नगर पालिका पंडरिया के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) यमन देवांगन ने बताया कि श्मशान घाट की भूमि पर रहने वाले अवैध कब्जाधारियों को कई बार नोटिस जारी किया गया है, लेकिन वे वहां से हटने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें नगर पालिका का प्रभार संभाले महज पांच से छह महीने हुए हैं।आगे इस दिशा में क्या उचित कार्रवाई की जा सकती है, इस पर गंभीरता से पहल की जाएगी।

हादसे ने खड़े किए कई सवाल

इस घटना में महिला और दो बच्चों की जान बाल-बाल बच गई, लेकिन 9 से 10 बेजुबान पशुओं की मौत ने नगर पालिका की व्यवस्थाओं और जर्जर भवनों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब भवन की जर्जर स्थिति की जानकारी पहले से थी, तो समय रहते उसे सुरक्षित क्यों नहीं किया गया? परिसर के अन्य पुराने भवनों की जांच अब तक क्यों नहीं कराई गई?

अब देखना होगा कि प्रशासन इस घटना को गंभीरता से लेते हुए जिम्मेदारी तय करता है और श्मशान घाट परिसर के अन्य जर्जर भवनों को सुरक्षित करने के लिए ठोस कदम उठाता है या मामला महज औपचारिक कार्रवाई तक सीमित रह जाता है।

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