CG High Court ब्रेकिंग : मिशन स्कूल के फादर को हाई कोर्ट ने सुनाया आजीवन कारावास, इस मामले में हुई सजा…..

बिलासपुर। कोरिया जिले के ज्योति मिशन स्कूल यौन उत्पीड़न मामले में सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में स्कूल के फादर जोसेफ धन्ना स्वामी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। घटना को छिपाने वाली दो महिला स्टाफ को 7-7 साल कारावास की सजा दी है। डिवीजन बेंच ने निचली अदालत के फैसले को पलट दिया है। डिवीजन बेंच ने तीनों दोषियों को दाे सप्ताह के भीतर ट्रायल कोर्ट में सरेंडर करने का आदेश दिया है।
जाने पूरा मामला
कोरिया के सरभोका स्थित ज्योति मिशन स्कूल के हॉस्टल में रहने वाली चौथी की 9 वर्षीय मासूम छात्रा के साथ 9 सितंबर 2015 को दुष्कर्म किया गया था। पीड़िता ने बताया कि वह रात को बाथरूम गई थी, जहां नशीला पाउडर छिड़का हुआ था, जिससे उसे चक्कर आने लगे। इसके बाद जब वह अपने कमरे में सो रही थी, तब आरोपी ने दुष्कर्म किया। सुबह इसकी शिकायत स्कूल की सिस्टर फिलोमिना और किसमरिया से की, तो उन्होंने मदद करने के बजाय छड़ी से पिटाई कर दी और घटना के संबंध में किसी को न बताने की धमकी दी। मामले में पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया था।
मामले की सुनवाई के बाद 9 जनवरी 2017 को बैकुंठपुर की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने तीनों आरोपियों को बरी कर दिया था। राज्य सरकार ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने इस फैसले को त्रुटिपूर्ण ठहराया है। कहा कि ट्रायल कोर्ट ने पीड़िता के ठोस बयानों और मेडिकल साक्ष्यों को तकनीकी आधार पर खारिज कर गलत फैसला सुनाया था।
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में डॉ. कलावती पटेल की मेडिकल रिपोर्ट का हवाला दिया है। रिपोर्ट में पीड़िता के निजी अंगों पर गंभीर चोटों और सूजन की पुष्टि हुई थी। इसके साथ ही एफएसएल रिपोर्ट में पीड़िता के कपड़ों पर मानव शुक्राणु पाए गए थे, जो अपराध की पुष्टि करते हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि बलात्कार पीड़िता की गवाही अपने आप में पूर्ण है और उसे किसी अन्य स्वतंत्र गवाह के समर्थन की अनिवार्य आवश्यकता नहीं है।
मुख्य आरोपी फादर जोसेफ धन्ना स्वामी को आईपीसी की धारा 376 (2) और पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद व 10 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। फिलोमिना केरकेट्टा और किसमरिया को अपराध छिपाने और पीड़िता मदद न करने के लिए आईपीसी की धारा 119 के तहत 7-7 साल के कठोर कारावास और 5-5 हजार रुपए जुर्माने की सजा दी गई है। हाई कोर्ट ने तीनों दोषियों को दो सप्ताह के भीतर ट्रायल कोर्ट में सरेंडर करने का आदेश दिया है। ऐसा नहीं करने पर पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजेगी।



