CG – मस्तूरी में पी.ओ.व टी.ए.के कंट्रोल से बाहर हुए रोजगार सहायक लगातार कलेक्टर के पास पहुंच रही शिकायत भ्रष्टाचार पर लगाम कब क्या है इसके पीछे का कारण जानें पढ़े पूरी ख़बर
मस्तूरी//महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना जो कांग्रेस सरकार की सबसे बड़ी महत्वाकांक्षी योजना थी जिससे प्रत्येक वर्ष पूरे भारत देश के प्रत्येक गांव के रहने वाले ग्रामीणों को रोजगार की गारंटी मिलती है ग्रामीण लोगों के लिए यह जीवन यापन का एक बहुत बड़ा जरिया भी बन चूका है जहां इसमे पहले 100 दोनों का रोजगार दिया जाता था उसको भाजपा सरकार ने बढा भी दिया है न सिर्फ रोजगार मिलने वाली दिनों की संख्या बढ़ाई गई है बल्कि इससे मिलने वाली मजदूरी को भी काफी बढ़ा दिया गया इस योजना का नाम अब बदल कर वी बी जी राम जी कर दिया गया है पर भ्रष्टाचार इसमें लगातार हो रहा है और कई अमूल चूल परिवर्तन करने के बाद भी लगातार भ्रष्टाचार की शिकायत आ रही है और सबसे ज्यादा मामला बिलासपुर जिले के मस्तूरी विकासखंड से सामने आ रही है ताज़ा मामला जयरामनगर के पास के गाँव भनेसर से आया है जहाँ रोजगार सहायक मंजुला टोप्पो द्वारा अपने चहेतो की फर्जी हाजरी डाल कर फायदा पहुंचाने का आरोप लगा है अब यह मामला बिलासपुर कलेक्टर के पास पहुंच चूका है ग्रामीण शिकायत लेकर बिलासपुर पहुंचे थे जहाँ उनको आश्वाशन मिला है की इसमें पूरी पारदर्शिता के साथ जाँच होगा और शिकायत कर्ताओ कों न्याय मिलेगा, इनका आरोप है की कुछ ऐसे लोंगो कों डाइरेक्ट फायदा पहुंचाया जा रहा है जो किसी अन्य प्राइवेट संस्थानों में कार्यरत है।
टी.ए.की नाकामी..
सोंच कर आपको भी हैरानी होंगी की जिस तकनिकी सहायक कों इस पुरे कार्य की मॉनिटरिंग करनी होती है वो आखिर करते क्या है और अपनी जिम्मेदारी का ईमानदारी से निर्वहन कर रहें है तो कैसे फर्जी हाजरी डाला जा रहा है और क्यों लगातार शिकायत हो रहा है क्या तकनिकी सहायक से रोजगार सहायक नहीं संभल रहा या मस्तूरी पी.ओ.(कार्यक्रम अधिकारी) से टी.ए.(तकनिकी सहायक) नहीं संभल रहें है जो लगातार शिकायत हो रहा है।
बताते चलें की यह पहला मामला नहीं है मस्तूरी में इससे पहले अकोला,विद्याडीह,बहतरा,देवरी,कर्रा,भिलाई,सोन रिस्दा,और अब भनेसर आखिर मस्तूरी में बैठे अधिकारी क्यों अपने रोजगार सहायकों कों संभाल नहीं पा रहें है और लगातार मस्तूरी का नाम डूबा रहें है अब तो इस बात पर भी संदेह होनें लगा है की इस पर लगाम लगेगा या यू ही चलता रहेगा ये संदेह इसलिए क्यों की अधिकारी भ्रष्टाचार करने वालों कों ही पनाह दे रहें है बताते चलें की विद्याडीह में रवि जांगड़े कों शिकायत फिर जाँच फिर निकाला गया पर कुछ महीने बाद पंचराम मटिया वाले कों प्रभार दिया गया पर ताज्जुब की बात ये है की जिसको भ्रष्टाचार के आरोप में निकाला गया था उससे फिर से काम लिया जा रहा है तो कैसे अधिकारीयों पर संदेह ना हो और ऐसे में कैसे भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगा सोचने वाली बात है।




