नगरी ब्लॉक के हिंछापुर गांव ने पेश की मिसाल, नशे के खिलाफ पूरा गांव एकजुट,अवैध शराब बेचने वालों पर 50 हजार जुर्माना…

धमतरी नगरी…नगरी ब्लॉक के गांव हिंछापुर इन दिनों पूरे इलाके में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। करीब 1500 की आबादी वाले इस गांव ने अब अवैध कच्ची शराब के खिलाफ खुली जंग छेड़ दी है। वर्षों से नशे की मार झेल रहे ग्रामीणों ने अब “नशामुक्त गांव” का संकल्प लेते हुए ऐतिहासिक फैसला लिया है…
करीब 300 घर वाले हिंछापुर गांव में लंबे समय से लगभग 32 लोगों द्वारा अवैध कच्ची शराब बनाने और बेचने का कारोबार किया जा रहा था। इसका असर गांव के माहौल पर साफ दिखाई देने लगा था। युवा पीढ़ी नशे की गिरफ्त में जा रही थी और छोटी-छोटी बातों पर विवाद और झगड़े आम हो चुके थे। पुलिस और आबकारी विभाग समय-समय पर कार्रवाई भी कर रहे थे, लेकिन हालात में बड़ा बदलाव नहीं आ पा रहा था…
इसी बीच नगरी एसडीओपी विपिन रंगारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पहल की…ग्राम पंचायत में विशेष बैठक आयोजित की गई, जिसमें महिला स्व-सहायता समूहों, युवाओं और बुजुर्गों को आमंत्रित किया गया…एसडीओपी विपिन रंगारी अपनी पुलिस टीम और सिहावा थाना प्रभारी के साथ गांव पहुंचे और ग्रामीणों से सीधे संवाद किया…

एसडीओपी विपिन रंगारी..“नशा केवल व्यक्ति को नहीं, पूरे परिवार और समाज को बर्बाद करता है। गांव के लोग अगर एकजुट होकर ठान लें, तो अवैध शराब के कारोबार को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है…
बैठक में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया और गांव को नशामुक्त बनाने का संकल्प लिया। ग्रामसभा में सर्वसम्मति से कड़ा प्रस्ताव पारित किया गया कि यदि कोई भी व्यक्ति गांव में कच्ची शराब बनाते या बेचते पाया जाता है, तो उससे 50 हजार रुपये का जुर्माना वसूला जाएगा। साथ ही ऐसे लोगों को शासकीय योजनाओं के लाभ से भी वंचित किया जाएगा…
इतना ही नहीं, अवैध शराब कारोबार की सूचना देने वाले व्यक्ति को 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने का भी निर्णय लिया गया है, ताकि लोग खुलकर इस अभियान में भागीदारी निभा सकें…इस पूरी मुहिम में महिला स्व-सहायता समूहों की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है। महिलाओं ने गांव में जनजागरूकता अभियान चलाने और निगरानी की जिम्मेदारी अपने हाथ में ली है…
हिंछापुर का यह फैसला अब आसपास के गांवों के लिए भी मिसाल बनता नजर आ रहा है। क्षेत्र में एसडीओपी विपिन रंगारी की इस पहल की जमकर सराहना हो रही है। अगर यह अभियान सफल रहता है, तो आने वाले समय में अन्य गांव भी इस मॉडल को अपनाकर नशे के खिलाफ मजबूत लड़ाई लड़ सकते हैं।
हिंछापुर के ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ एक फैसला नहीं, बल्कि गांव के भविष्य और आने वाली पीढ़ियों को बचाने का संकल्प है… अब देखना होगा कि गांव की यह एकजुटता कितनी मजबूत साबित होती है और क्या वास्तव में हिंछापुर आने वाले समय में एक नशामुक्त गांव बन पाएगा।