
Chattisgarh Dhamtari नगरी…सावन के प्रथम सोमवार पर छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले सिहावा देऊरपारा स्थित ऐतिहासिक एवं प्राचीन कर्णेश्वर (कलेश्वर) महादेव मंदिर में सोमवार सुबह से ही श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा। जिले सहित छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक एवं विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली एवं मंगलकामना की।
प्रथम सावन सोमवार होने के कारण मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं का लगातार आना-जाना लगा रहा। कांवड़ लेकर पहुंचे शिवभक्तों ने पवित्र जल से भगवान भोलेनाथ का अभिषेक किया, वहीं महिलाओं, युवाओं एवं बुजुर्गों ने भी बड़ी संख्या में दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।

कर्णेश्वर ट्रस्ट के सदस्यों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान शिव का विशेष पूजन एवं अभिषेक संपन्न कराया गया। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ट्रस्ट द्वारा पूरे सावन माह के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। दूर-दराज से आने वाले कांवड़ियों एवं भक्तों के ठहरने, पेयजल, विश्राम, साफ-सफाई तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, ताकि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा का सामना न करना पड़े।
कर्णेश्वर मंदिर के पुजारी विनोद पुरी गोस्वामी ने बताया कि प्रथम सावन सोमवार के कारण आज बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे हैं। सभी भक्त पूरे विधि-विधान से भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना कर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति एवं समृद्धि की प्रार्थना कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पूरे सावन माह में श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए ट्रस्ट द्वारा सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पहले से कर ली गई हैं।
12वीं शताब्दी का ऐतिहासिक और आस्था का केंद्र है कर्णेश्वर महादेव
धमतरी जिले के नगरी-सिहावा क्षेत्र के देऊरपारा में महानदी के उद्गम क्षेत्र के समीप स्थित कर्णेश्वर (कलेश्वर) महादेव मंदिर अपनी ऐतिहासिक, धार्मिक एवं स्थापत्य कला के लिए विशेष पहचान रखता है। माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी में सोमवंशी शासक राजा कर्णदेव (कर्णराज) ने करवाया था। यह मंदिर दक्षिण कोसल, तेलुगु एवं उड़िया वास्तुकला के अद्भुत संगम का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है।
मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन अमृतकुंड (जलकुंड) को लेकर भी श्रद्धालुओं में गहरी आस्था है। मान्यता है कि इस कुंड का जल अत्यंत पवित्र एवं चमत्कारिक है। महाशिवरात्रि सहित सावन माह में यहां हजारों श्रद्धालु दर्शन एवं जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं।
स्थापत्य कला भी आकर्षण का केंद्र
कर्णेश्वर महादेव मंदिर का गर्भगृह आयताकार स्वरूप में निर्मित है, जिसके शीर्ष पर कलशयुक्त शिखर इसकी भव्यता को और बढ़ाता है। मंदिर का अग्रभाग सुंदर मंडप शैली में बना है, जिसकी छत आठ कोणीय विशाल पत्थर के स्तंभों पर टिकी हुई है। मंदिर की दीवारों एवं प्रस्तर शिलाओं पर देवी-देवताओं तथा पौराणिक कथाओं की बारीक एवं आकर्षक नक्काशी आज भी तत्कालीन शिल्पकला की उत्कृष्टता का परिचय देती है।
पूरे सावन माह रहेगा आस्था का केंद्र
सावन माह के प्रत्येक सोमवार को कर्णेश्वर महादेव मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना, जलाभिषेक एवं धार्मिक आयोजन होंगे। प्रशासन एवं मंदिर ट्रस्ट को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ेगी। इसके मद्देनजर सुरक्षा, यातायात एवं श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आवश्यक प्रबंध भी किए गए हैं।
प्रथम सावन सोमवार पर कर्णेश्वर महादेव धाम में उमड़ी श्रद्धा और भक्ति ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया कि यह मंदिर केवल ऐतिहासिक धरोहर ही नहीं, बल्कि लाखों शिवभक्तों की अटूट आस्था का प्रमुख केंद्र भी है।