
धमतरी नगरी विकासखंड के सांकरा में आयोजित सुशासन तिहार के समापन कार्यक्रम में उस समय माहौल गर्मा गया जब टाइगर रिजर्व क्षेत्र के वनांचलवासी अपनी वर्षों पुरानी समस्याओं को लेकर प्रशासन के सामने पहुंच गए। ग्रामीणों ने सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग उठाई, लेकिन समस्याओं पर ठोस आश्वासन नहीं मिलने से नाराज होकर कार्यक्रम का बहिष्कार करते हुए वापस लौट गए…
अभ्यारण्य संघर्ष समिति के नेतृत्व में ग्राम पंचायत करही, रिसगांव, खल्लारी और फरसगांव सहित कई सुदूर वनांचल गांवों के ग्रामीण एवं जनप्रतिनिधि सुशासन तिहार में शामिल हुए थे। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से लगातार आवेदन और मांग पत्र देने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया है…
सांकरा में आयोजित सुशासन तिहार के साथ ही धमतरी जिले के नगरी वनांचल क्षेत्र में इस अभियान का समापन हुआ, लेकिन अंतिम दिन ग्रामीणों की नाराजगी और विकास कार्यों को लेकर उठे सवाल चर्चा का विषय बने रहे…
ग्रामीण लिखित आवेदन लेकर कार्यक्रम में पहुंचे थे। आवेदन में उल्लेख किया गया कि सीतानदी अभ्यारण्य क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव आजादी के 79 वर्ष बाद भी सड़क, बिजली, पुल-पुलिया जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। क्षेत्र के आदिवासी समुदाय को आवश्यक सुविधाएं नहीं मिलने से रोजमर्रा के जीवन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने कहा कि वे आजादी के बाद से लगातार शासन-प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखते आ रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है। अभ्यारण्य संघर्ष समिति के बैनर तले लगभग 25 गांवों के लोगों ने एक बार फिर शासन से अपनी तीन सूत्रीय मांगों—बिजली, सड़क और पुल निर्माण—को पूरा करने की मांग की है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया तो आने वाले समय में वे व्यापक जनआंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।



