छत्तीसगढ़

CG – हाईकोर्ट का बड़ा फैसला : अनुकंपा नियुक्ति में पत्नी का हक सबसे पहले, बहन को नहीं मिलेगी नौकरी…..

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि सरकारी कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु होने पर उसकी पात्र पत्नी को नियुक्ति में प्राथमिकता दी जाएगी।

कोर्ट के मुताबिक, यदि मृत कर्मचारी की पत्नी अनुकंपा नियुक्ति के लिए निर्धारित शर्तें पूरी करती है, तो परिवार के किसी अन्य सदस्य को उसकी जगह नौकरी का दावा करने का अधिकार नहीं होगा। पत्नी के पात्र होने पर कर्मचारी की बहन या अन्य परिजन की दावेदारी स्वीकार नहीं की जा सकती।

हाईकोर्ट का यह फैसला अनुकंपा नियुक्ति में पत्नी के प्राथमिक अधिकार को स्पष्ट करता है और ऐसे मामलों में परिवार के अन्य सदस्यों के दावे की सीमा तय करता है। यह फैसला हाईकोर्ट के जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की सिंगल बेंच ने सुनाया है। कोर्ट ने कर्मचारी की पत्नी को दी गई नौकरी को सही माना और कर्मचारी की बहन की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया।

क्या है पूरा मामला?

मामला दीपशिखा साहू से जुड़ा है। उनके पिता सरकारी कर्मचारी थे। नौकरी के दौरान उनकी मौत के बाद उनके बेटे यानी दीपशिखा के भाई अभिषेक साहू को अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिली थी।

अभिषेक साहू शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, तिलक नगर, गुढ़ियारी में सहायक ग्रेड-3 के पद पर काम कर रहे थे। 9 जुलाई 2021 को नौकरी के दौरान उनकी भी मौत हो गई।

अभिषेक के परिवार में उनकी पत्नी हीरा साहू, बहन दीपशिखा साहू और एक दिव्यांग भाई हैं। अभिषेक की मौत के बाद उनकी पत्नी हीरा और बहन दीपशिखा, दोनों ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया।

पत्नी को मिली नौकरी

दोनों के आवेदन पर जिला शिक्षा अधिकारी ने फैसला लिया। 23 अक्टूबर 2021 को हीरा साहू को भृत्य के पद पर अनुकंपा नियुक्ति देने का आदेश जारी किया गया। इस फैसले से दीपशिखा साहू सहमत नहीं थीं। उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका लगाकर जिला शिक्षा अधिकारी के आदेश को चुनौती दी।

दीपशिखा का कहना था कि उनकी भाभी हीरा साहू अलग रहती हैं और परिवार की आर्थिक मदद नहीं कर रही हैं। इसलिए उनकी नियुक्ति रद्द की जाए और उन्हें अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी दी जाए।

सरकार ने क्या पक्ष

मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने 14 जून 2013 की अनुकंपा नियुक्ति नीति का हवाला दिया। सरकार ने बताया कि इस नीति में यह तय किया गया है कि परिवार में किस सदस्य को पहले अनुकंपा नियुक्ति दी जाएगी।

सरकार के मुताबिक, सबसे पहले सरकारी कर्मचारी की पत्नी या पति को प्राथमिकता दी जाती है। इसके बाद बेटे या दत्तक बेटे, फिर अविवाहित बेटी या दत्तक बेटी और उसके बाद कुछ अन्य पात्र सदस्यों का नंबर आता है।

हाईकोर्ट ने क्या कहा

हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद कहा कि अनुकंपा नियुक्ति के लिए परिवार के सदस्यों की प्राथमिकता पहले से तय है। इसमें कर्मचारी की पत्नी को सबसे पहले रखा गया है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में दीपशिखा साहू कर्मचारी की बहन हैं, जबकि हीरा साहू उनकी पत्नी हैं। नियमों के मुताबिक पत्नी को बहन से पहले नौकरी पाने का अधिकार है। कोर्ट ने यह भी माना कि सिर्फ इस वजह से कि पत्नी अलग रह रही है, बहन को पत्नी से ऊपर प्राथमिकता नहीं दी जा सकती।

बहन की याचिका खारिज

सभी तथ्यों को देखने के बाद हाईकोर्ट ने दीपशिखा साहू की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने जिला शिक्षा अधिकारी के उस आदेश को सही माना, जिसके तहत हीरा साहू को भृत्य के पद पर अनुकंपा नियुक्ति दी गई थी।

इस फैसले से यह साफ हो गया है कि अगर किसी सरकारी कर्मचारी की नौकरी के दौरान मौत हो जाती है और उसकी पत्नी अनुकंपा नियुक्ति के लिए पात्र है, तो उसे परिवार के दूसरे सदस्यों से पहले प्राथमिकता मिलेगी। पत्नी के पात्र होने पर कर्मचारी की बहन या अन्य सदस्य उसकी जगह नौकरी का दावा नहीं कर सकते।

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