छत्तीसगढ़

CG – पाली वन परिक्षेत्र की मिट्टी में अब चंदन भी महकेगा : किसान वृक्ष मित्र योजना बनेगा आय का नया जरिया और किसानों में लाएगी आर्थिक क्रांति पढ़े पूरी ख़बर

0 निशुल्क पौधे, आर्थिक अनुदान, तकनीकी मदद- वन विभाग दे रहा पूरा साथ.

0 बतरा- जेमरा में 2500 नए पौधे, खम्हरिया- उतरदा के पौधे7- 8 फीट तक पहुँचे.

कोरबा//पाली परिक्षेत्र की मिट्टी में अब सिर्फ अनाज ही नही, एक और हरा सोना यानी चंदन भी अब किसानों के लिए आर्थिक क्रांति बनकर महकेगा। राज्य शासन की महत्वकांक्षी किसान वृक्ष मित्र योजना के तहत पाली वन परिक्षेत्र में पारंपरिक खेती के साथ व्यवसायिक वानिकी को जोड़कर किसानों को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने की इस पहल से क्षेत्र के किसानों की आय का नया रास्ता खुला है।

कटघोरा वनमंडल के अंतर्गत पाली वन परिक्षेत्र में वन विभाग द्वारा किसानों की निजी भूमि पर बड़े पैमाने पर चंदन के पौधे रोपित किये जा रहे हैं। वर्तमान में जहां बतरा, जेमरा, उतरदा गांवों में किसानों की जमीन पर लगभग 2500 चंदन के पौधे रोपे गए हैं, वहीं गत वर्ष खम्हरिया एवं उतरदा में 3 किसानों की 2.5 हेक्टेयर भूमि पर 2375 चंदन पौधे लगाए गए थे।

आज वे पौधे 7 से 8 फीट तक बढ़कर लहलहाते हुए किसानों को नई उम्मीद दे रहे हैं, जो कुछ सालों में करोड़ो की आय देंगे। पाली रेंजर योगेश्वर बंजारे ने बताया कि शीर्ष अधिकारियों के दिशा-निर्देशन में यह योजना पूरी पारदर्शिता से चलाई जा रही है और जिस योजना के तहत किसानों को तीन तरफा मदद दी जा रही है, जिनमे चंदन के स्वस्थ पौधे विभाग द्वारा किसानों को मुफ्त दिए जा रहे हैं। पौधारोपण और खाद के लिए विभागीय अनुदान दिया जा रहा है और पौधों के सही रख- रखाव व देखभाल के लिए वन विभाग के अधिकारी खेतों में जाकर तकनीकी सलाह भी दे रहे हैं।

रेंजर बंजारे के अनुसार चंदन के पौधे कुछ वर्षों में ही परिपक्व हो जाते हैं, जिन्हें परिपक्व होने के बाद किसान खुले बाजार में बेच सकते हैं। बाजार में चंदन की हमेशा मांग रहती है, एक बार फसल तैयार होने पर किसान को अपनी मेहनत का सीधा और बेहतर लाभ मिलेगा। इससे न सिर्फ उनकी आय बढ़ेगी बल्कि वे आत्मनिर्भर भी बनेंगे। इससे पहले जहां किसान सिर्फ धान और सब्जी पर निर्भर थे, अब वे व्यावसायिक वृक्षारोपण की ओर आकर्षित हो रहे हैं। विभाग का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह योजना किसानों की आय दोगुनी करने का सबसे कारगर जरिया साबित होगी। ऐसे में किसान वृक्ष मित्र योजना से यह साबित होता है कि विकास और पर्यावरण साथ- साथ चल सकते हैं।

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