CG – मस्तूरी विधानसभा में खाद की खुलेआम कालाबाजारी 266.50 का कट्टा 700 से 1000 में बिक रहा किसान परेशान अधिकारी मांग रहें सबूत जानें पूरा मामला पढ़े पूरी ख़बर
बिलासपुर//जिले के मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र में यूरिया और अन्य खाद की भारी कालाबाजारी अपने चरम पर है। सीपत, मस्तूरी या जोंधरा कहीं भी चले जाइए, किसानों को तय रेट से कई गुना ज्यादा कीमत पर खाद खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है।
किसानों का आरोप है कि सरकार द्वारा निर्धारित 266.50 रुपये का खाद का कट्टा* कहीं 700 रुपये में तो कहीं 800में तो कही 1000 रुपये तक बेचा जा रहा है। बावजूद इसके कृषि विभाग और प्रशासन मूकदर्शक बने हुए हैं।
शिकायत करो तो सबूत मांगते हैं, कार्रवाई शून्य…
किसानों का कहना है कि जब वे कृषि विभाग के अधिकारियों को कालाबाजारी की सूचना देते हैं तो अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय उनसे ही सबूत मांगते हैं। जबकि विभाग का काम खुद फील्ड में जाकर निगरानी करना और कालाबाजारी को रोकना है।
विभाग का दावा: 15 लोगों पर कार्रवाई…
वहीं मस्तूरी में पदस्थ कृषि विभाग के अधिकारी आहिरे का कहना है कि अभी तक लगभग 15 ऐसे लोगों पर विभाग द्वारा कार्रवाई की जा चुकी है जो तय रेट से अधिक में खाद बेच रहे थे।
लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट नजर आ रही है। जब खुले आम 266.50 का कट्टा 4 गुना दाम में बिक रहा है, तो सवाल उठता है कि विभाग गहरी नींद में क्यों है? लगातार और सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
किसानों का कहना है कि खाद की कालाबाजारी से उन पऱ अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है उन्होंने जिला प्रशासन और कृषि मंत्री से मांग की है कि कालाबाजारी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई हो और खाद का उचित वितरण सुनिश्चित किया जाए।
फिलहाल मस्तूरी क्षेत्र में खाद की कालाबाजारी को लेकर किसानों में भारी आक्रोश है।
अधिकारी रोना रोते है कि विभाग के अधिकारी किसी के अवैध खाद भण्डारण या तय रेट से अधिक में बेचे जा रहें खाद की दुकानों में छापामार कार्रवाई करने जाते है तो उनको खाद नहीं मिलता अब ये बात तो एक अत्यंत मंद बुद्धि इंसान कों भी पता होता है की 2 नंबर का काम करने वाला खाद की कालाबाजारी करने वाला अपने दुकान में सामने ही खाद कों नहीं रखेगा कही दूसरी जगह रखेगा जहाँ अधिकारी कों पता ना चलें पऱ ये सब क़ृषि विभाग के अधिकारियों कों पता ही नहीं होता। अजीब बात है ना सरकार औऱ विभाग इन जिम्मेदार अधिकारियों पऱ भरोषा कर इनकों क्षेत्र की जिम्मेदारी सौंप दिए है औऱ ये ये कह कर पल्ला झाड़ते है की उनको पता ही नहीं होता की खाद कहा रखा गया है औऱ कालाबाजारी कहाँ से हो रही है जबकि गाँव में हर ब्यक्ति कों पता है की कहाँ से ये सब हो रहा है पऱ ये अधिकारी अनजान है।




