CG – शिक्षक से लाखों की ठगी : फर्राटेदार इंग्लिश बोलकर बनाते थे शिकार, अंतरराज्यीय गिरोह के 7 साइबर ठग गिरफ्तार…..

कोण्डागांव। फरसगांव पुलिस ने शिक्षक से करीब 30 लाख रुपए की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने 10 दिनों तक दिल्ली, गाजियाबाद और उत्तरप्रदेश में डेरा डालकर कार्रवाई की और गिरोह के 7 शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी केवल भारत ही नहीं, बल्कि इंटरनेशनल स्तर पर भी ऑनलाइन फ्रॉड की वारदातों को अंजाम दे चुके हैं।
गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने 2 लैपटॉप, 18 मोबाइल फोन, 17 एटीएम कार्ड और कई म्युल अकाउंट से जुड़े दस्तावेज बरामद किए हैं। पुलिस का कहना है कि आरोपी बेहद शातिर तरीके से लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। फर्राटेदार इंग्लिश और प्रोफेशनल अंदाज में बातचीत कर वे खुद को इंश्योरेंस कंपनी का अधिकारी बताते थे और लोगों का भरोसा जीत लेते थे।
जानकारी के मुताबिक, कोण्डागांव जिले के एक शिक्षक को आरोपियों ने इंश्योरेंस पॉलिसी में बोनस, रिटर्न और पुराने निवेश की रकम वापस दिलाने का झांसा दिया था। शुरुआत में छोटी रकम जमा कराई गई, ताकि पीड़ित को भरोसा हो जाए। इसके बाद अलग-अलग प्रोसेसिंग फीस, टैक्स, क्लियरेंस और बोनस रिलीज के नाम पर लगातार रकम मांगी जाती रही। जब तक शिक्षक को ठगी का एहसास हुआ, तब तक करीब 30 लाख रुपए अलग-अलग खातों में ट्रांसफर हो चुके थे।
मामले की शिकायत मिलने के बाद फरसगांव पुलिस ने साइबर सेल की मदद से जांच शुरू की। शुरुआती जांच में कई बैंक खातों और मोबाइल नंबरों का नेटवर्क दिल्ली-एनसीआर और उत्तरप्रदेश तक जुड़ा मिला। इसके बाद पुलिस की टीम लगातार 10 दिनों तक दिल्ली, गाजियाबाद और अन्य इलाकों में डेरा डालकर तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंची।
पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी संगठित तरीके से साइबर फ्रॉड का नेटवर्क चला रहे थे। इसके लिए अलग-अलग लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाए जाते थे, जिन्हें “म्युल अकाउंट” के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था। ठगी की रकम इन खातों में ट्रांसफर कर तुरंत निकाल ली जाती थी, ताकि पुलिस ट्रांजेक्शन ट्रैक न कर सके।
आरोपी कॉल सेंटर की तरह काम करते थे। कुछ लोग केवल कॉल करने का काम करते थे, जबकि अन्य लोग बैंक खातों और ट्रांजेक्शन को संभालते थे। पुलिस के मुताबिक आरोपी इतने प्रोफेशनल थे कि वे खुद को इंश्योरेंस कंपनी, बैंक अधिकारी या फाइनेंशियल एडवाइजर बताकर लोगों को आसानी से भरोसे में ले लेते थे।
पुलिस सूत्रों के अनुसार जांच के दौरान कुछ ऐसे डिजिटल रिकॉर्ड भी मिले हैं, जिनसे संकेत मिलते हैं कि गिरोह विदेशों में बैठे लोगों के संपर्क में भी था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या यह नेटवर्क किसी बड़े इंटरनेशनल साइबर फ्रॉड सिंडिकेट से जुड़ा हुआ है।



