छत्तीसगढ़धमतरी

CG- वनांचल का आमझर अंधेरे में,चार महीने से बंद सोलर प्लांट,बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ा असर,जहरीले जीवों के डर के बीच जी रहे ग्रामीण…

Chhattisgarh…धमतरी जिले के वनांचल क्षेत्र में स्थित ग्राम आमझर पिछले चार महीनों से बिजली संकट से जूझ रहा है। गांव में क्रेडा के माध्यम से लगाए गए सोलर प्लांट बंद पड़े हैं, जिसके चलते ग्रामीण अंधेरे में जीवन बिताने को मजबूर हैं। बारिश का मौसम नजदीक आते ही जहरीले सांप, कीड़े-मकोड़ों और जंगली जानवरों का खतरा बढ़ने से ग्रामीणों की चिंता और गहरा गई है।

टाइगर रिजर्व क्षेत्र के भीतर बसे ग्राम आमझर में आज भी सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। जिला मुख्यालय से करीब 100 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत खल्लारी के आश्रित इस गांव में ग्रामीणों की सुविधा के लिए चार सोलर प्लांट लगाए गए थे, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि वर्तमान में अधिकांश प्लांट बंद पड़े हैं और शाम ढलते ही पूरा गांव अंधेरे में डूब जाता है।

ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा। उनका आरोप है कि क्रेडा के अधिकारी गांव पहुंचकर दिन में सोलर सिस्टम चालू कर स्थिति सामान्य बताकर लौट जाते हैं, जबकि रात होते ही बिजली व्यवस्था पूरी तरह ठप हो जाती है।

ग्रामीण महेतु मंडावी और महेश मरकाम ने बताया कि बारिश शुरू होते ही जंगलों में जहरीले सांप और कीड़े-मकोड़े घरों तक पहुंचने लगते हैं। गांव में अंधेरा रहने के कारण रात के समय हमेशा खतरा बना रहता है। उन्होंने कहा कि गांव तक पहुंचने का रास्ता भी बेहद कठिन है, जिससे आपात स्थिति में परेशानी और बढ़ जाती है।

बिजली संकट का असर बच्चों की पढ़ाई पर भी साफ दिखाई दे रहा है। ग्रामीण बलीहार कुंजाम, बरसन कुंजाम और गोपाल कुंजाम ने बताया कि राशन दुकानों में पर्याप्त केरोसिन नहीं मिल रहा, जिसके कारण बच्चे लालटेन और ढिबरी के सहारे पढ़ाई करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कच्चे मकानों और कीचड़ भरे इलाके में रात के समय जहरीले जीवों का डर हमेशा बना रहता है।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि गांव का जो सोलर प्लांट ठीक तरीके से चल रहा था, उसका इन्वर्टर भी अधिकारी निकालकर ले गए। केशनाथ नेताम, निरा बाई नेताम, सरिता बाई और मानबाई कुंजाम ने बताया कि बाकी प्लांट भी नाममात्र के लिए चल रहे हैं और कुछ ही मिनटों में बंद हो जाते हैं। ग्रामीणों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि अधिकारी एक रात गांव में बिताएं, तब उन्हें वास्तविक स्थिति का अंदाजा होगा।

वहीं इस मामले में क्रेडा अधिकारी धनेंद्र देवागन ने कहा कि गांव के एक प्लांट का इन्वर्टर निकाला गया है, लेकिन बाकी तीन प्लांट चालू हैं। उन्होंने दावा किया कि गांव के सभी प्लांट पूरी तरह बंद नहीं हैं।

हालांकि ग्रामीण अधिकारियों के दावों को जमीनी हकीकत से अलग बता रहे हैं। उनका कहना है कि लगातार अंधेरे के कारण गांव का सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है और बच्चों का भविष्य भी संकट में पड़ता जा रहा है। अब ग्रामीण प्रशासन से बारिश शुरू होने से पहले स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।

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