छत्तीसगढ़

CG – कब थमेगा हिर्री में शिकायतों का दौर और क्यों सरपंच और सचिव से नहीं संभल रहा मामला क्यों उठ रही साल दर साल आवाज कौन दे रहा था फर्जी हाजरी डालने का हुक्म जानें पूरा मामला पढ़े पूरी ख़बर

बिलासपुर//जिले के मस्तूरी जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत हिर्री में हर साल मनरेगा वी बी जी राम जी को लेकर सवाल क्यों खड़े हो रहे हैं हर साल शिकायत हर साल जांच और अगले साल फिर वही हाल आखिर यहां सरपंच और सचिव लगातार शिकायतों के बाद भी क्यों सुधार नहीं कर पा रहे हैं क्या इनकी भी इसमें मिली भगद है और आखिर इसके पीछे वजह क्या है जानने की कोशिश जरूर करेंगे पर इन सब शिकायतों के पीछे कहीं ना कहीं ग्रामीणों का असंतोष और पंचों का विद्रोह है और इसका श्रेय सरपंच और सचिव को जाता है एक तरह से देखा जाए तो सरपंच गांव का मुखिया होता है वही ग्राम पंचायत का वित्तीय अधिकार पूरे सचिव के पास होता है पर सरपंच और सचिव मिलकर अपने पंचों को संभाल नहीं पा रहे हैं और शायद यही कारण हैं कि लगातार यहां शिकायत का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है।

पिछले साल मनरेगा और आवास योजना में गड़बड़ी को लेकर कुछ पंचों और उप सरपंच ने मिलकर मोर्चा खोल दिया था जिसके लिए जनपद के अधिकारियों को एक टीम बनाकर यहां जांच के लिए भेजा गया था और जांच भी हुई थी इसके बाद मामला शांत हो गया था उस समय में भी रोजगार सहायक पर ही आरोप लगा था कि वह फर्जी हाजिरी डालकर कुछ लोगों को फायदा पहुंचा रहे हैं और आवास निर्माण में भी गड़बड़ी कर रहे हैं इसके बाद जांच हुई और मामला किसी तरह शांत हो गया इसके बाद पंचायत चुनाव हुए और नए सरपंच उप सरपंच और पंच पंचायत में चुनकर आए 1 साल तक यहां मामला शांत ही रहा पर दूसरे वर्ष फिर से विवाद की स्थिति बन गई है और वही स्थिति बन गई है जो 2 साल पहले तक थी यहां वही शिकायतों का दौर शुरू हो गया है कुछ पंच इतने नाराज हैं कि वह इस मामले को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने की तैयारी कर रहे हैं हो सकता है इसमें शिकायत भी दर्ज कर ली गई हो और फिर यहां कुछ दिनों में जांच का सिलसिला शुरू हो जाए तो इसमें अतिशयोक्ति नहीं होगी।

क्या है आरोप..

इस बार कुछ पंचों ने सीधा आरोप लगाया है कि तालाब गहरीकरण कार्य जब तक चल रहा था तब तक 20 से 40 लोगों का फर्जी हाजरी का सिलसिला चल रहा था लोग आते थे और उनको सिर्फ फोटो खिंचवाना रहता था और उसके बाद उनको हाजिरी मिल जाता था और यही अब लड़ाई का कारण बन गया है कुछ पंचों ने बताया है कि उन्होंने इसका विरोध भी किया था पर रोजगार सहायक कहता था कि वह लोग आ जाते हैं तो मैं क्या करूं जबकि पंचों का कहना था कि बिना काम किए किसी को हाजिरी नहीं देना है चाहे वह पंच हो या उपसरपंच हो जो काम करेगा उसी को हाजिरी मिलेगी और पैसा मिलेगा इसके उलट रोजगार सहायक लगातार कुछ लोगों का हाजिरी रोज डाला करता था पंच यह भी कहते हैं कि रोजगार सहायक को कागज में लिखकर यह बताया जाता था कि किसका-किसका हाजिरी चढाना है जिसको लेकर वह रजिस्टर में एंट्री करता था और तालाब गहरीकरण में हाजिरी डालने के दौरान लिस्ट या रजिस्टर देखकर वह लोगों की हाजिरी भरता था यह पूरी प्रक्रिया तब होती थी जब जो लोग मेहनती थे गड्ढा खोदते थे ईमानदारी से काम करते थे वह सब चले जाते थे जिसके बाद इन फर्जी लोगों का फोटो खींचकर हाजिरी चढ़ाया जाता था ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि रोजगार सहायक खुद अपने घर के सदस्यों का भी हाजिरी डाला करता था और इसी लिए असंतुष्ट लोंग जाँच की मांग कर रहें है और शिकायत के बाद यह सब जांच के बाद ही पता चलेगा कि कौन सही है और कौन गलत है पर एक बात तो साफ है कि ग्राम पंचायत हिर्री में विरोध का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है ना ही यहां के सरपंच और ना ही सचिव बुलंद होती आवाज को रोक पा रहे हैं लोंगो का आरोप है की आखिर गाँव का मुखिया इतना सब कुछ होनें के बाद भी चुप क्यों है अगर मुखिया एक्शन लेता तो शायद गाँव वालों कों ऑनलाइन या ऑफलाइन शिकायत करने की जरुरत ही नहीं पडती?

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