धमतरीनगरी

रिमझिम बारिश में उमड़ा आस्था का सैलाब, सिहावा में निकली भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथयात्रा..!

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के सिहावा अंचल में आस्था, परंपरा और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। 200 से अधिक वर्षों से चली आ रही भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथयात्रा इस वर्ष भी पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ निकाली गई। रिमझिम बारिश भी श्रद्धालुओं की आस्था को डिगा नहीं सकी।

सिहावा-भीतररास स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर से भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा भव्य नए रथ में सवार होकर नगर भ्रमण के लिए निकले। मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। जैसे ही रथ आगे बढ़ा, “जय जगन्नाथ” के जयघोष से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा।

इस वर्ष रथयात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण पारंपरिक शैली में तैयार किया गया नया रथ रहा। करीब 12 फीट ऊंचे और 8 फीट चौड़े इस रथ का निर्माण पारंपरिक शिल्प के अनुरूप किया गया है। ग्रामीणों के अनुसार वर्षों बाद पूरी तरह नया रथ तैयार किया गया है, जिससे श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।

मंदिर के पुजारी ईश्वर दास वैष्णव के अनुसार भीतररास का भगवान जगन्नाथ मंदिर प्राचीन इतिहास से जुड़ा हुआ है। स्थानीय मान्यता है कि वर्षों पहले गांव के एक पंडा महाराज पुरी से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की प्रतिमाएं लेकर आए थे, तभी से यहां रथयात्रा की परंपरा लगातार चली आ रही है। वर्ष 2021 में नई प्रतिमाओं की वैदिक विधि-विधान से प्राण-प्रतिष्ठा की गई थी।

रथयात्रा जगन्नाथ मंदिर से निकलकर सिहावा होते हुए प्राचीन कर्णेश्वर महादेव मंदिर परिसर पहुंची। मान्यता है कि यहां स्थित सूर्य मंदिर भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर है, जहां भगवान दस दिनों तक विश्राम करेंगे। देवशयनी एकादशी के दिन विशेष पूजा-अर्चना, हवन और वैदिक मंत्रोच्चार के बाद भगवान पुनः जगन्नाथ मंदिर लौटेंगे।

रिमझिम बारिश के बीच भी श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। लोग छाता, रेनकोट और बारिश से बचाव के अन्य साधनों के साथ बड़ी संख्या में रथयात्रा में शामिल हुए और भगवान का रथ खींचकर पुण्य लाभ प्राप्त किया। सदियों पुरानी यह परंपरा आज भी सिहावा अंचल की सांस्कृतिक विरासत और अटूट लोक आस्था का जीवंत प्रतीक बनी हुई है।

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