CG – ख़बर का असर संचालनालय आदेश को ठेंगा दिखाना पोड़ी उपरोड़ा बीईओ दयाल को पड़ा भारी : कलेक्टर फटकार के बाद 3 शिक्षकों का संलग्नीकरण किया निरस्त! पढ़े पुरी ख़बर
0 नायभारत.लाइव कें ख़बर का असर कलेक्टर के फटकार के बाद 3 शिक्षकों का संलग्नीकरण करना पड़ा निरस्त।
कोरबा//लोक शिक्षण संचालनालय के स्पष्ट आदेश को दरकिनार कर विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी पोड़ी उपरोड़ा के.राजेश्वर दयाल द्वारा की गई मनमानी पर कलेक्टर का हंटर चला है और उनकी फटकार के बाद आखिरकार 3 शिक्षकों का संलग्नीकरण निरस्त कर दिया गया है। लेकिन इस अफसरशाही पर अनुशासनात्मक कार्रवाई बाकी है।
ज्ञात हो कि लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा 15 जुलाई को आदेश जारी कर कहा था कि शासकीय कार्यालयों में संलग्न सभी गैर शैक्षणिक कर्मचारी 1 सप्ताह के भीतर अपने मूल संस्था में लौटें। अवहेलना पर सेवा में व्यवधान (Break in Service) की कार्रवाई किये जाने चेतावनी दी गई थी। लेकिन संचालनालय के आदेश को 13 दिन बाद पोड़ी उपरोड़ा बीईओ के.राजेश्वर दयाल ने जिला शिक्षा अधिकारी के मौखिक निर्देश का हवाला देकर 28 व 29 जुलाई को अपने मनमुताबित 3 शिक्षकों का संलग्नीकरण कर दिया।
जिसमे पवन कुमार श्रीवास्तव, स.ग्रे.- 02, शा.उ.मा.वि. लमना, छवि कुमार, स.ग्रे.- 02, शा.उ.मा.वि. मोरगा व गुरुशरण प्रताप सिंह, स.ग्रे.- 02, शा.उ.मा.वि. माचाडोली शामिल थे। उक्त संलग्नीकरण को लेकर बीते 30 जुलाई को खबर प्रसारित होते ही मामला कलेक्टर कुणाल दुदावत के संज्ञान में पहुँचा और उन्होंने बीईओ दयाल को तत्काल तलब कर जमकर फटकार लगाई। जिसके बाद बीईओ ने आनन- फानन में आदेश क्रमांक- 842 जारी कर उपरोक्त तीनो संलग्नीकरण आदेशों को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया और निरस्तीकरण की प्रति एसडीएम पोड़ी उपरोड़ा, डीईओ कोरबा और संबंधित प्राचार्यों को भेजी गई है।
*सबसे बड़ा सवाल- नियम विरुद्ध कार्य पर कार्रवाई कौन करेगा?*
लोक शिक्षण संचालनालय के लिखित आदेश को अनदेखा कर मौखिक निर्देश के नाम पर संलग्नीकरण करने वाले बीईओ के.राजेश्वर दयाल पर जिला शिक्षा अधिकारी क्या अनुशासनात्मक कार्रवाई करेंगे या फिर मामला सिर्फ कलेक्टर के फटकार तक ही सीमित रह जाएगा? शिक्षा विभाग के जानकारों का कहना है कि संचालनालय का आदेश लिखित और समयबद्ध था। इसके बावजूद मौखिक निर्देश कहकर 3 कर्मचारियों को कार्यालय में पदस्थ करना सीधे अवज्ञा है।
ऐसे में डीईओ को कारण बताओ नोटिस जारी कर विभागीय जांच बैठानी चाहिए। फिलहाल कलेक्टर फटकार से आदेश तो निरस्त हो गया, लेकिन जवाबदेही तय करना अभी बाकी है। अगर सिर्फ फटकार से काम चल गया तो कल फिर कोई अधिकारी मौखिक निर्देश के नाम पर नियम तोड़ेगा। अब आगे शिक्षा विभाग को तय करना है- अनुशासन बचेगा या अफसरशाही?




