CG – पाली परियोजना में प्रतिमाह 20-22 लाख का रेडी टू ईट बिल लेकिन बच्चों तक निर्धारित आहार नही परियोजना अधिकारी के मौन सहमति से लूट रहा पोषण बजट पढ़े पूरी ख़बर
कोरबा//राज्य सरकार का लक्ष्य है “कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़”। इसके लिए करोड़ो का बजट स्वीकृत है। लेकिन पाली परियोजना में शासन के बजट का उपयोग शून्य से 6 वर्ष के बच्चों, गर्भवती, शिशुवती माताओं और किशोरी बालिका के पोषण में कम तथा बिल एवं कमीशन के खेल में ज्यादा हो रहा है।
महिला एवं बाल विकास पाली परियोजना में रेडी टू ईट पोषण आहार की आड़ में चल रहे मनमानी और अनियमिता मामले को लेकर बीते सोमवार 10 अगस्त को”पाली परियोजना में रेडी टू ईट आपूर्ति में अनियमितता, अनेको सेक्टर के आंगनबाड़ियों तक नही पहुँचा बीते सप्ताह का पोषण आहार”शीर्षक के साथ खबर प्रसारित किया गया, जिसमे बताया गया था कि बीते सप्ताह के मंगलवार को पोड़ी, सिल्ली, लाफा, माखनपुर, सपलवा सहित अनेको सेक्टरों के आंगनबाड़ियों में रेडी टू ईट नही पहुँचा।
इससे सैकड़ो हितग्राही पोषण आहार से वंचित रह गए। साथ ही आंगनबाड़ी में दर्ज बच्चों, किशोरी बालिका, गर्भवती, शिशुवती माताओं की संख्या से कम पोषण आहार पैकेट आपूर्ति किये जाने के मामले को भी उल्लेख किया गया। जिस खबर से पाली परियोजना कार्यालय में हड़कंप मच गया तथा जिन सेक्टरों में पोषण आहार सप्लाई रुकी थी, अब वहां अनुबंधित स्व सहायता समूह द्वारा आनन-फानन में रेडी टू ईट पहुँचाया जा रहा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार पोड़ी, सिल्ली, बकसाही सहित अन्य सेक्टर जहां बीते मंगलवार को एक भी पैकेट नही पहुँचा था, वहां आज रेडी टू ईट की गाड़ियां पहुँच रही है।
वहीं लाफा, सपलवा, चैतमा, माखनपुर सेक्टरों में बीते शुक्रवार 7 अगस्त को देर से आहार पहुँचाया गया। यानी बीते मंगलवार का पोषण आहार सैकड़ो हितग्राहियों को नही बंटा, जिसके लाभ से वे वंचित रह गए। ऐसे में नौनिहाल बच्चों, गर्भवती, शिशुवती माताओं व किशोरी बालिका के पेट पर डाका डालकर समूह व अधिकारी लाखो का खेल कर रहे हैं। नियम के अनुसार हर माह के 1 तारीख को सभी आंगनबाड़ियों में दर्ज संख्या के अनुसार 4 सप्ताह का रेडी टू ईट एकमुश्त दिया जाना है।
लेकिन इसके निर्माण एवं आपूर्तिकर्ता स्व सहायता समूह समय पर पोषण आहार नही पहुँचाता और जो पहुँचाया जाता है उसमें भी दर्ज संख्या से कटौती कर दी जाती है। जबकि पाली परियोजना से हर माह 20 से 22 लाख रुपए का बिल जिला कार्यालय भेजा जा रहा है और जिसका भुगतान समूह को हो रहा है, किंतु हितग्राहियों तक पूरा आहार नही पहुँच रहा है। जिस मामले में परियोजना अधिकारी ने आंख मूंद ली है और इनके मौन सहमति से समूह बेखौफ होकर मनमानी पर उतारू हैं। सबसे ज्यादा मार दूरस्थ व वनांचल, पहाड़ी क्षेत्रों के आंगनबाड़ियों में हैं, जहां न तो समय पर आहार पहुँचता है और न ही सही मात्रा में।
नतीजतन ग्रामीण हितग्राही एवं बच्चें कुपोषण से लड़ने के बजाय भूख से लड़ रहे हैं। बहरहाल मामले में अनियमितता की खबर प्रसारित होने के बाद पोषण आहार सप्लाई कर देना दाग धोना है, दाग मिटाना नही। जब तक हर माह की 1 तारीख को सही मात्रा में हर आंगनबाड़ी तक आहार नही पहुँचेगा, तब तक पाली परियोजना में पोषण आहार योजना सिर्फ कागज की योजना बनी रहेगी। इस पर जिला प्रशासन को गंभीरता दिखाने की जरूरत है, क्योंकि एक पैकेट पोषण आहार की कटौती का मतलब है एक बच्चे के भविष्य की कटौती। यदि मामले पर संज्ञान नही लिया गया तो पाली का यह लाखों का खेल बच्चों की जिंदगी से खेलता रहेगा।



