छत्तीसगढ़

CG – शहर के बीच स्थित विशाल मेगा मार्ट में एक गरीब एवं बुजुर्ग व्यक्ति के साथ हुई मारपीट ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है, जिस उम्र में एक बुजुर्ग को सम्मान, सुरक्षा और सहारा मिलना चाहिए : साइमा अशरफ

जगदलपुर। शहर के बीच स्थित विशाल मेगा मार्ट में एक गरीब एवं बुजुर्ग व्यक्ति के साथ हुई मारपीट ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। जिस उम्र में एक बुजुर्ग को सम्मान, सुरक्षा और सहारा मिलना चाहिए, उसी उम्र में यदि उसे सरेआम पीटा जाए और लोग तमाशबीन बने रहें, तो यह केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं बल्कि हमारी सामाजिक संवेदनाओं और कानून व्यवस्था पर भी सवाल है।

सामने आए वीडियो में कथित रूप से स्पष्ट दिखाई देता है कि एक बुजुर्ग व्यक्ति के साथ एकतरफा मारपीट की जा रही है। यदि जांच में यह तथ्य सही पाए जाते हैं, तो यह सामान्य विवाद का मामला नहीं बल्कि गंभीर अपराध की श्रेणी में आने वाला विषय है। ऐसे मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) के अंतर्गत उपलब्ध साक्ष्यों के अनुसार मारपीट, चोट पहुंचाने तथा अन्य लागू गंभीर धाराओं, आवश्यकता होने पर गैर-जमानती धाराओं में भी निष्पक्ष कार्रवाई की जानी चाहिए।

सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि आरोप है कि बोधघाट थाना द्वारा इस मामले में केवल मुचलके की कार्रवाई कर आरोपियों को छोड़ दिया गया। यदि ऐसा हुआ है, तो इससे आम नागरिकों के मन में यह संदेश जाता है कि खुलेआम गुंडागर्दी करने वालों को कानून का भय नहीं रहा। कानून का उद्देश्य केवल औपचारिक कार्रवाई करना नहीं, बल्कि पीड़ित को न्याय और समाज में सुरक्षा का विश्वास दिलाना भी है।

इस पूरे घटनाक्रम पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों की चुप्पी भी निराशाजनक है। जब शहर के बीचों-बीच एक गरीब और बुजुर्ग व्यक्ति के साथ ऐसी घटना होती है, तब जनप्रतिनिधियों का नैतिक दायित्व है कि वे पीड़ित के साथ खड़े हों और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग करें। मौन रहना समाज को गलत संदेश देता है।

मैं वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मांग करती हूँ कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। यदि जांच में लापरवाही या गंभीर अपराध के अनुरूप कार्रवाई न किए जाने के तथ्य सामने आते हैं, तो दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाए तथा निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए आवश्यकता होने पर बोधघाट थाना प्रभारी की भूमिका की भी जांच कर उचित प्रशासनिक निर्णय लिया जाए।

आज प्रश्न केवल एक बुजुर्ग का नहीं है। प्रश्न यह है कि यदि शहर के सबसे व्यस्त स्थान पर एक कमजोर और गरीब व्यक्ति सुरक्षित नहीं है, तो आम नागरिक स्वयं को कितना सुरक्षित महसूस करेगा? न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखाई भी देना चाहिए। कानून का सम्मान तभी बना रहेगा, जब हर नागरिक—चाहे वह गरीब हो या अमीर—को समान सुरक्षा और समान न्याय मिले।

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