CG – बस्तर में जन्मे हिंदी के प्रसिद्ध आलोचक डा.धनंजय वर्मा के जन्मदिन पर 14 जुलाई को प्रगतिशील लेखक संघ, जगदलपुर द्वारा स्थानीय लाला जगदलपुरी केन्द्रीय पुस्तकालय परिसर में स्थित जिला ग्रंथालय में उनका स्मरण की समीक्षा का आयोजन किया गया…

जगदलपुर। बस्तर में जन्मे हिंदी के प्रसिद्ध आलोचक डा.धनंजय वर्मा के जन्मदिन पर 14 जुलाई को प्रगतिशील लेखक संघ, जगदलपुर द्वारा स्थानीय लाला जगदलपुरी केन्द्रीय पुस्तकालय परिसर में स्थित जिला ग्रंथालय में उनका स्मरण करते हुए “धनंजय वर्मा स्मृति आख्यान” तथा खुदेजा खान के नवीनतम काव्य संग्रह “सुनो ज़रा” की समीक्षा का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए कविता बिजौलिया ने खुदेजा ख़ान का रचनात्मक परिचय दिया। प्रथम वक्ता के रूप में डा.योगेंद्र मोतीवाला ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि-ख़ुदेजा ने ताक़त का जवाब देने के लिए हमेशा क़लम का इस्तेमाल किया है।इनके रचना संसार में स्त्री विमर्श के अतिरिक्त, बाहरी दुनिया की समस्या को भी बखूबी प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने डैश, डैश, डैश कविता का उल्लेख करते हुए बताया कि भावनाएं सदैव शब्दों की मोहताज नहीं रहतीं।
द्वितीय मुख्य वक्ता के रूप में प्रखर आलोचक हिमांशु शेखर झा ने संग्रह की ज़िंदगी कविता का पाठ करते हुए, कविता में मानवीय द्वंद के चित्रण की अनिवार्यता पर प्रकाश डाला।उन्होंने रचना से मनुष्य की नैतिकता में वृद्धि होना भी जरूरी कहा।
स्मृति मिश्रा ने अपने उद्बोधन में खुदेजा खान के व्यापक रचना संसार पर प्रकाश डाला।वंदना राठौर ने कवि के बहुज्ञ होने की आवश्यकता पर बल देते हुए, संग्रह की कविता “मां में एक स्री को देखा” को रेखांकित किया।
दूसरे चरण में बहु प्रतीक्षित डा.धनंजय वर्मा स्मृति आख्यान के तहत जगदीश चंद्र दास ने आधार वक्तव्य दिया।तत्पश्चात मदन आचार्य ने धनंजय वर्मा के आलोचना कर्म पर अपना आलेख वाचन किया।प्रसिद्ध रंग कर्मी व उद्घोषक एम.ए.रहीम ने डॉक्टर धनंजय वर्मा से अपने दीर्घकालिक संबंधों के संस्मरण साझा किये। विशेष उपस्थिति डा.धनंजय वर्मा की पोती गार्गी वर्मा की रही,जिन्होंने अपने बाबा के सानिध्य, स्नेह में बिताए पलों और दी गई सीख को याद किया।
कार्यक्रम का संचालन कविता बिजौलिया ने तथा आभार प्रदर्शन सचिव दीपक थवानी ने किया। कार्यक्रम में प्रलेस के संरक्षक- प्रो.अली एम.सैयद, कोषाध्यक्ष -प्रकाश चंद्र जोशी, करमजीत कौर, जोगेश्वरी आचार्य, उर्मिला आचार्य, डा.सुषमा झा,गायत्री आचार्य, विभोर मालवीय, मंजू लता तिवारी, श्रीमती स्मृति मिश्रा की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
कार्यक्रम के सफल होने में लाला जगदलपुरी केन्द्रीय पुस्तकालय के प्रभारी की महती भूमिका व सहयोग रहता है।



