धमतरीनगरी

महानदी के उद्गम स्थल सिहावा में उमड़ा आस्था का सैलाब, गणेश घाट में धूमधाम से मना ऋषि पंचमी महोत्सव; बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे…

सिहावा के गणेश घाट में गूंजा ऋषि पंचमी का जयघोष, प्राचीन ऋषि परंपरा और औघट बाबा की स्मृतियों से जुड़ा महोत्सव

धमतरी के नगरी क्षेत्र स्थित महानदी के उद्गम स्थल सिहावा में ऋषि पंचमी के अवसर पर आस्था और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला। गणेश घाट स्थित गुरु आश्रम में पारंपरिक विधि-विधान के साथ ऋषि पंचमी महोत्सव मनाया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु, ग्रामीण और जनप्रतिनिधि शामिल हुए।

सिहावा के गणेश घाट स्थित गुरु आश्रम में मंगलवार को ऋषि पंचमी महोत्सव का आयोजन किया गया। इस दौरान भुरसी मावली, माता महामाई, मां शीतला, ठाकुर देव, श्रृंगि ऋषि, औघट बाबा और बालगिर बाबा सहित क्षेत्र के आराध्य देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना की गई।

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार गणेश घाट में ऋषि पंचमी महोत्सव मनाने की परंपरा वर्षों पुरानी है। सिहावा क्षेत्र को प्राचीन काल से ऋषि-मुनियों और साधु-संतों की तपोभूमि माना जाता है। इसी परंपरा से जुड़ी औघट बाबा की स्मृतियां भी आज तक यहां जीवंत हैं।

बताया जाता है कि कई वर्ष पहले एक बाबा यहां आए थे, जो लोगों को तंत्र-मंत्र के साथ जड़ी-बूटियों और पारंपरिक वनौषधीय ज्ञान की जानकारी देते थे। उनका वास्तविक नाम किसी को ज्ञात नहीं था। उनकी साधना और ज्ञान के प्रति समर्पण के चलते स्थानीय लोगों ने उन्हें ‘औघट बाबा’ के नाम से पुकारना शुरू किया।

ऋषि पंचमी के अवसर पर परंपरानुसार देवी-देवताओं और ऋषि-मुनियों का स्वागत-सम्मान किया गया। इसके बाद गुरु भाइयों ने गुरु महाराज का आशीर्वाद लिया और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।

आयोजन की खास बात रही कि प्राचीन परंपरा के अनुरूप श्रद्धालुओं को दुर्लभ जड़ी-बूटियों का सेवन भी कराया गया। इसे पारंपरिक वनौषधीय ज्ञान और पूर्वजों की विरासत के प्रति सम्मान के रूप में देखा गया।

पूर्व विधायक श्रवण मरकाम, जनपद अध्यक्ष महेश गोटा, उपाध्यक्ष हृदय साहू सहित जनप्रतिनिधियों ने कहा कि ऋषि-मुनियों ने प्रकृति और मानव जीवन के बीच संतुलन स्थापित करने के साथ वनौषधियों और जड़ी-बूटियों का महत्वपूर्ण ज्ञान समाज को दिया। इस पारंपरिक ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना जरूरी है।

सिहावा की धार्मिक महत्ता इसलिए भी खास है क्योंकि यह क्षेत्र महानदी के उद्गम स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक आस्था और प्राचीन परंपराओं का संगम यहां श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

ऋषि पंचमी महोत्सव में समिति के पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। पूरे आयोजन के दौरान गणेश घाट और गुरु आश्रम का वातावरण धार्मिक और भक्तिमय बना रहा।

गणेश घाट में आयोजित यह महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सिहावा की प्राचीन ऋषि परंपरा, गुरु-शिष्य संस्कृति और पारंपरिक वनौषधीय ज्ञान को संजोए रखने का संदेश भी देता नजर आया।

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