छत्तीसगढ़

जंगल के रास्ते पशुधन की कथित तस्करी! पंडरिया ब्लॉक में सक्रिय गिरोह पर कार्रवाई की मांग।

पंडरिया/पंडरिया ब्लॉक और नगर के आसपास से गाय-बैलों को एकत्रित कर जंगल के रास्ते कुकदूर क्षेत्र के हनुमत खोल की ओर ले जाने और वहां से मध्यप्रदेश सीमा तक पहुंचाकर बेचने की शिकायतें सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस कथित गतिविधि में कुछ स्थानीय महिला-पुरुष भी शामिल हैं।

ग्रामीणों के मुताबिक पशुधन को मुख्य सड़कों से न ले जाकर अलग-अलग जंगल एवं सुनसान रास्तों का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि पुलिस और ग्रामीणों की नजर से बचा जा सके। आरोप है कि स्थानीय स्तर पर पशुधन को जंगल के रास्ते एमपी बॉर्डर तक पहुंचाया जाता है और वहां से आगे कथित रूप से खरीदारों के माध्यम से कसाइयों अथवा बूचड़खानों तक भेजे जाने की आशंका है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस पूरे नेटवर्क में पशुधन को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए अलग-अलग लोगों की भूमिका हो सकती है। यदि यह आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो यह महज पशुधन की आवाजाही का मामला नहीं,बल्कि संगठित तरीके से पशुओं को सीमा पार पहुंचाकर आर्थिक लाभ कमाने का गंभीर विषय हो सकता है।

बताया जा रहा है कि आज बुधवार को भी कुछ लोगों को अलग-अलग जंगली रास्तों से पशुधन को हनुमत खोल की ओर ले जाते हुए देखा गया। इससे ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और पूरे मामले की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

ग्रामीणों ने पुलिस,पशुपालन विभाग और संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि जंगल के रास्तों से पशुधन ले जाने वालों की पहचान की जाए,उनके गंतव्य और उद्देश्य की जांच हो तथा यदि अवैध परिवहन या तस्करी के आरोप प्रमाणित होते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

बड़ा सवाल—जंगल के रास्ते आखिर क्यों?

पशुधन को मुख्य मार्ग छोड़कर जंगल के रास्तों से हनुमत खोल और कथित रूप से मध्यप्रदेश सीमा की ओर ले जाने की जरूरत क्यों पड़ रही है? कौन लोग पशुधन एकत्रित कर रहे हैं? इन्हें सीमा तक कौन पहुंचा रहा है और इसके पीछे आर्थिक लेन-देन कितना है? इन सवालों का जवाब पुलिस जांच से ही सामने आ सकता है।

अब निगाह पुलिस और संबंधित विभाग की कार्रवाई पर है—क्या जंगल के रास्तों से होने वाली इस कथित गतिविधि की निगरानी होगी या शिकायतें सिर्फ कागजों तक सीमित रहेंगी?

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