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शहीद खिलेश ध्रुव की प्रतिमा के लिए भूमि पूजन संपन्न, भारत माता के जयघोष से गूंजा शंकरदाह गांव…

शंकरदाह/रायपुर। देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के जवान शहीद खिलेश ध्रुव की स्मृति को चिरस्थायी बनाने की दिशा में उनके गृह ग्राम शंकरदाह में महत्वपूर्ण पहल की गई। शहीद की प्रतिमा स्थापना के लिए भूमि पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें ग्रामीणों ने उत्साह और भावुकता के साथ हिस्सा लेकर वीर सपूत को श्रद्धांजलि अर्पित की।

भूमि पूजन के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूरा परिसर देशभक्ति के नारों से गूंज उठा। ग्रामीणों ने ‘शहीद खिलेश ध्रुव अमर रहें’ और ‘भारत माता की जय’ के जयघोष के साथ अपने वीर सपूत के बलिदान को नमन किया। इस दौरान गांव में गर्व और भावुकता का माहौल देखने को मिला।

परिजनों की आंखें नम, शहीद पर पूरे गांव को गर्व

कार्यक्रम में शहीद के परिजन माता कुमारी बाई ध्रुव, अमृत ध्रुव, खूबचंद, मनीषा, दुर्गा, रेणु, गोवर्धन, लेखनी, हलेश और वीणा सहित परिवार के अन्य सदस्य उपस्थित रहे। अपने बेटे और परिजन की स्मृति में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान परिवार भावुक नजर आया। वहीं, ग्रामीणों ने शहीद के बलिदान को याद करते हुए उनके परिवार के प्रति सम्मान और एकजुटता व्यक्त की।

सरपंच रमी गौतम सहित सैकड़ों ग्रामीण हुए शामिल

इस अवसर पर ग्राम पंचायत की सरपंच श्रीमती रमी गौतम विशेष रूप से उपस्थित रहीं। उनके साथ हेमंत साहू, यशवंत देवदास, राखी सिन्हा, रामनारायण साहू, लेख राम, पिंटू गौतम सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासियों ने कार्यक्रम में भाग लिया। ग्रामीणों की सहभागिता ने शहीद के प्रति सम्मान और गांव की सामूहिक भावना को प्रदर्शित किया।

सरपंच रमी गौतम ने कहा कि शहीद खिलेश ध्रुव केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरे गांव के स्वाभिमान और गौरव के प्रतीक हैं। उनकी प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा, साहस और समर्पण की प्रेरणा देगी। उन्होंने इस कार्य में पंचायत की ओर से हरसंभव सहयोग का भरोसा भी जताया।

नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनेगी शहीद की प्रतिमा

ग्रामीणों का मानना है कि शहीद खिलेश ध्रुव की प्रतिमा स्थापित होने से गांव में उनकी स्मृतियां सदैव जीवंत रहेंगी। साथ ही, युवाओं और बच्चों को देश की रक्षा के लिए समर्पण, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा का संदेश मिलेगा।

कार्यक्रम का समापन शांति पाठ के साथ हुआ। शंकरदाह में आयोजित यह भूमि पूजन केवल प्रतिमा स्थापना की शुरुआत नहीं, बल्कि अपने वीर सपूत के प्रति गांव की श्रद्धा, सम्मान और अटूट गर्व का प्रतीक बनकर सामने आया।

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