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CG – पाली-बिलासपुर एनएच किनारे पहाड़ी पर विराजमान वन देवी मां चेंपारानी के दरबार में सप्तमी पर उमड़ा आस्था का जनसैलाब पढ़े पूरी ख़बर

कोरबा//नवरात्रि की सप्तमी पर पाली- बिलासपुर नेशनल हाईवे किनारे तथा पाली से लगभग 6 किलोमीटर दूर पहाड़ी की चोटी पर स्थित आस्था की अधिष्ठात्री वन देवी मां चेंपारानी का धाम भक्तों की भीड़ से गूंज उठा। सुबह से ही स्थानीय ग्रामीणों सहित पाली विकासखंड और बिलासपुर, कोरबा जैसे शहरी क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए पहाड़ी की ओर उमड़ पड़े।

तस्वीरों में उक्त अलौकिक आस्था की झलक देखी जा सकती है। एक तस्वीर में गर्भगृह में विराजमान मां चेंपारानी की दिव्य प्रतिमा नजर आ रही है, जिसमें मुख्य स्वरूप के साथ दो अन्य देवियां और सिंह विराजमान हैं। दूसरी तस्वीर में मंदिर के अंदर दर्शन के लिए लगी सैकड़ों महिलाओं-पुरुषों की लंबी कतार और तीसरी तस्वीर में पहाड़ी की सीढ़ियों पर दैवीय भाव आने से दंडवत हुए एक श्रद्धालु, जो इस स्थान की सिद्ध भक्ति परंपरा को दर्शाता है।

वनदेवी माता चेंपारानी के मंदिर तक पहुंचना आसान नहीं है। भक्तों को खड़ी चढ़ाई वाली 427 सीढ़ियां पैदल तय करनी पड़ती हैं, तब जाकर पहाड़ी के शिखर पर विराजमान मां चेंपारानी के दर्शन होते हैं। किसी ने मन्नत पूरी होने पर तो किसी ने नई मनोकामना लेकर मां के दरबार में मत्था टेका। दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतार दिनभर लगी रही। वहीं पहाड़ी के नीचे नारियल, फूल- माला और प्रसाद तथा अन्य खाने- पीने की दुकानों से छोटा मेला सा लग गया था।

साथ ही मंदिर समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क खीर- पूड़ी का वितरण किया गया तो वहीं पहाड़ी के ऊपर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया था, जहां हजारों भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। यहां का सबसे अद्भुत दृश्य था ग्रामीणों द्वारा गाए जा रहे जसगीत। जसगीत की धुन पर नौ दिनों से व्रत रखे हुए स्थानीय महिला-पुरुषों पर देवी देवताओं का भाव आ गया और वे झूमते- नाचते हुए दैवीय स्वरूप में आ गए। इस अलौकिक दृश्य को देख कर वहां मौजूद हर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध और भाव-विभोर हो गए।

मंदिर समिति के अनुसार इस वर्ष मां के दरबार में 195 मनोकामना ज्योति कलश प्रज्ज्वलित, जबकि 60 जवारे स्थापित किए गए हैं। सप्तमी का यह मेला न केवल आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और पहाड़ी पर विराजमान मां वन देवी के प्रति अटूट विश्वास का जीवंत प्रमाण भी है।

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