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CG तीन दिन तक मौत बनकर घूमता रहा तेंदुआ,2 की जान गई, 19 से ज्यादा घायल… अब सामने आई चौंकाने वाली रिपोर्ट..!

छत्तीसगढ़ धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में सीतानदी-उदंती टाइगर रिजर्व से लगे गांवों में दहशत फैलाने वाले तेंदुए को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। अक्टूबर में लगातार तीन दिनों तक ग्रामीणों पर हमला कर दो लोगों की जान लेने और कई लोगों को घायल करने वाले तेंदुए के शरीर में पोस्टमार्टम के दौरान रेबीज संक्रमण की पुष्टि होने की जानकारी सामने आई है। इस खुलासे के बाद नगरी क्षेत्र में हुई घटनाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

तीन दिन तक तेंदुए का आतंक, दो लोगों की मौत

जानकारी के मुताबिक, 14 अक्टूबर से तेंदुए के हमलों का सिलसिला शुरू हुआ था। सीतानदी-उदंती टाइगर रिजर्व से लगे बोराई क्षेत्र के आसपास के गांवों में तेंदुए ने कई ग्रामीणों को निशाना बनाया। इन हमलों में एक गर्भवती महिला समेत दो लोगों की मौत हो गई, जबकि 19 से अधिक ग्रामीणों के घायल होने की जानकारी सामने आई थी।

कारीपानी, बस्तर बुडरा और आमानारा सहित आसपास के गांवों में तेंदुए की मौजूदगी से दहशत फैल गई थी। ग्रामीणों को लगातार हमले का डर सता रहा था। हालात ऐसे बन गए थे कि लोग घरों से बाहर निकलने में भी डरने लगे थे। तेंदुए को पकड़ने के लिए वन विभाग से लगातार कार्रवाई की मांग की जा रही थी।

तीन साल की बच्ची पर हमले की कोशिश, पिता ने दिखाई बहादुरी

16 अक्टूबर की सुबह आमानारा गांव में तेंदुए की मौजूदगी से एक बार फिर अफरा-तफरी मच गई। बताया गया कि इस दौरान तेंदुए ने तीन लोगों को घायल कर दिया और तीन वर्षीय बच्ची सुहानी मरकाम पर हमला करने की कोशिश की,बच्ची को बचाने के लिए उसके पिता सुरेश मरकाम ने साहस दिखाया और तेंदुए को पीछे से पकड़ लिया। इसके बाद ग्रामीणों ने एकजुट होकर लाठी-डंडों और रस्सी की मदद से उसे काबू में किया। बाद में तेंदुए को वन विभाग के हवाले कर दिया गया।

लगातार हमलों से परेशान ग्रामीणों ने तेंदुए के पकड़े जाने के बाद राहत की सांस ली, लेकिन बाद में उसकी मौत हो गई।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में रेबीज संक्रमण की पुष्टि

अब तेंदुए की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसके शरीर में रेबीज संक्रमण की पुष्टि होने की जानकारी सामने आई है। यह खुलासा इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि हमलों की इस श्रृंखला के दौरान कई ग्रामीण घायल हुए थे और दो लोगों की जान चली गई थी।

रेबीज एक गंभीर वायरल बीमारी है, जो संक्रमित जानवर की लार के जरिए काटने, खरोंचने या संक्रमित लार के खुले घाव अथवा आंख और मुंह जैसी श्लेष्म झिल्लियों के संपर्क में आने से फैल सकती है।

हालांकि, तेंदुए में रेबीज संक्रमण की पुष्टि होने से यह स्वतः साबित नहीं होता कि उसके सभी हमलों का कारण यही संक्रमण था। हमलों के पीछे की परिस्थितियों और तेंदुए के व्यवहार के संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए संबंधित विशेषज्ञों की जांच और आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी।

ग्रामीणों की सुरक्षा और स्वास्थ्य निगरानी अहम

इस घटना ने वन क्षेत्रों से लगे गांवों में मानव-वन्यजीव संघर्ष और ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार हमलों के कारण प्रभावित गांवों के लोगों को भय के माहौल में रहना पड़ा।

रेबीज संक्रमण की पुष्टि के मद्देनजर हमलों में घायल हुए लोगों और तेंदुए के संपर्क में आए संभावित लोगों की स्वास्थ्य संबंधी स्थिति पर ध्यान देना भी जरूरी है। ऐसे किसी भी संपर्क की आशंका होने पर तत्काल स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है। काटने या खरोंचने की स्थिति में घाव को साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक धोकर बिना देरी चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।

फिलहाल, धमतरी के नगरी क्षेत्र में दो लोगों की मौत और कई ग्रामीणों के घायल होने की घटना के बाद तेंदुए की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में रेबीज संक्रमण की पुष्टि इस मामले का अहम पहलू बन गई है। इस घटना ने वन्यजीवों में संक्रामक बीमारियों की निगरानी और वनांचल के ग्रामीणों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी ध्यान खींचा है।

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