CG – ईद-उल-फितर के पावन अवसर पर जगदलपुर शहर के मिताली चौक एवं दरगाह परिसर के पास “कलम की ईदी” कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया…

जगदलपुर। ईद-उल-फितर के पावन अवसर पर जगदलपुर शहर के मिताली चौक एवं दरगाह परिसर के पास “कलम की ईदी” कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर बच्चों, समाज के प्रमुख लोगों, पत्रकारों एवं ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारियों को कलम वितरित कर एक प्रेरणादायक संदेश दिया गया —

“एक रोटी कम खाओ, लेकिन अपने बच्चों को जरूर पढ़ाओ।”
यह सराहनीय पहल हाजी वसीम अहमद, प्रदेश उपाध्यक्ष, ऑल मुस्लिम वेलफेयर फाउंडेशन छत्तीसगढ़ द्वारा पिछले 5 वर्षों से निरंतर चलाई जा रही है। उनके नेतृत्व में यह अभियान पूरे प्रदेश में मोहम्मद सिराज साहब के मार्गदर्शन में संचालित हो रहा है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षा को बढ़ावा देना और समाज में आपसी भाईचारा एवं एकता को मजबूत करना है।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न समाजों के गणमान्य व्यक्तियों के साथ-साथ पत्रकार बंधुओं को भी सम्मानपूर्वक “कलम की ईदी” प्रदान की गई। इस क्रम में बस्तर 24 न्यूज़ के पत्रकार सिराज खान, वरिष्ठ पत्रकार सुमित वाजपेयी एवं पत्रकार सुनील साहू को कलम देकर उनके समाज में महत्वपूर्ण योगदान के लिए सम्मानित किया गया। यह पत्रकार बंधु सदैव समाज की आवाज को उजागर करने और जनहित के मुद्दों को सामने लाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
साथ ही, कार्यक्रम के दौरान ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारियों को भी दरगाह परिसर के पास जाकर कलम भेंट की गई। समाज की सुरक्षा एवं व्यवस्था बनाए रखने में उनके निरंतर योगदान के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें भी इस पहल से जोड़ा गया।
कार्यक्रम में अखिल भारतीय परिसंघ के जिला अध्यक्ष सतीश वानखेड़े ने शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए सभी को अपने बच्चों को शिक्षित करने के लिए प्रेरित किया। उनके 5 वर्षीय पुत्र साकेत वानखेड़े ने भी बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के प्रेरणादायक विचार —
“शिक्षा वह शेरनी का दूध है, जो पिएगा वही दहाड़ेगा”—
को साझा कर सभी बच्चों को प्रेरित किया।
इस आयोजन में प्रमुख रूप से प्रकाश ठाकुर (अध्यक्ष, सर्व आदिवासी समाज, बस्तर संभाग), दिनेश यादव (अध्यक्ष, पिछड़ा वर्ग महासभा, बस्तर संभाग), नवीन बोथरा (समाजसेवी), रत्नेश बेंजामिन (उपाध्यक्ष, क्रिश्चियन फोरम छत्तीसगढ़), अब्दुल रशीद पवार सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में सभी समाजों के लोगों को आमंत्रित कर आपसी सौहार्द, भाईचारा एवं एकता का संदेश दिया गया। “कलम की ईदी” जैसी पहल न केवल शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाती है, बल्कि समाज को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने का कार्य भी करती है।



