CG – क्षेत्र में गिरता जल स्तर भारी पे-जल की समस्या गतौरा कोल वासरीयों में जमकर दर्जनों बोरवेल से हो रहा दोहन कब यहाँ प्रशासन कसेगा शिकंजा जानें पूरा मामला पढ़े पूरी ख़बर
बिलासपुर//छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में कई जगहों पर भू-जल का लेवल लगातार निचे जाने के वजह से घरों व गाँवों के हेंडपम्प से पानी आना बंद हो गया हैँ सबसे ज्यादा समस्या मस्तूरी क्षेत्र के गाँवों में देखा जा रहा हैँ और इसको देखते हुए कुछ जनप्रतिनिधियों बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल से मिलकर खुटाघाट जलाशय से जल्द नहर में पानी छोड़ने का आग्रह भी किया हैँ।
मस्तूरी के उद्योगो में भू-जल का दुरूपयोग..
केंद्र और राज्य की सरकार को जल संरक्षण के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रही हैँ ताकि बारिश की पानी कों रोक कर भू-जल कों रिचार्ज किया जा सकें दूसरी तरफ मस्तूरी में कई उद्योग चलाएं जा रहें हैँ जिसमे गतौरा भी शामिल हैँ यहाँ पहले एक कोल वासरी थी जहाँ अब कई कोल वासरी चल रहा हैँ और यहाँ दर्जनों बोर वेल खोदा गया हैँ जिसमे से जमकर भु-जल दोहन किया जा रहा हैँ यहाँ भू-जल कों प्लांट रोड़ में डस्ट रोकने के लिए स्प्रिंकलर के माध्यम से सुबह शाम डाला जा रहा हैँ, कोयला तोड़ने वाली रोटरी ब्रेकर में कोयला पहुंचाने वाली बेल्ट कन्वेंयर में पानी लगातार डाला जाता हैँ इसके अलावा कोयला कों साफ करने में भी यहाँ भारी मात्र में जल का दोहन किया जा रहा हैँ इन उद्योगो में दर्जनों बोरवेल से भारी मात्रा भू-जल कों बर्बाद किया जा रहा हैँ जिसके वजह से आसपास के गाँवों में भू-जल स्तर लगातार गिर रहा हैँ।
कई नामों से चल रही उद्योग..
गतौरा में कई कोल वासरी संचालित हैँ जिनका नाम अलग अलग हैँ पर काम एक हीं हैँ किसी का नाम क्लीन कोल हैँ तो किसी का हिन्द एनर्जी तो किसी का हिन्द मल्टी किसी कों ओल्ड साइडिंग तो किसी का और अन्य नाम हैँ पर यहाँ काम कोयला कों तोड़ने व साफ करने का हीं काम किया जाता हैँ।
ताज्जुब की बात ये हैँ की ये कोल वासरी कागजों में सरकार कों बताती हैँ की ये अपनी पानी की जरुरत नदियों से पूरा कर रही हैँ और इन्होने पाइप लाइन बिछा कर रखा हैँ पर धरातल पर ऐसा कुछ भी नजर नहीं आएगा। हालांकि शासन प्रशासन कों इसकी जाँच जरीर करनी चाहिए।
शासन प्रशासन किसानों कों सलाह देती हैँ की गर्मी के दिनों में किसानों कों कम पानी लेने वाली फसल लेना चाहिए जिसको हमारे किसान समझते भी हैँ की फसल लें ना लें पर लोंगो कों पिने की पानी की समस्या नहीं होनी चाहिए तो शासन प्रशासन इन उद्योग धंधा वालों कों खुली छूट क्यों देती हैँ जो ये भू-जल का दुरूपयोग जमकर कर रहें हैँ यहाँ ना कोई जाँच ना कोई डंडात्मक कार्रवाई तो कैसे ग्रामीणों कों पे जल की समस्या नहीं होंगी।




