छत्तीसगढ़

CG – पहाड़ी-वनांचल पंचायतें में बोर खनन सबमर्सिबल और सिंटेक्स स्थापना के लिए डीएमएफ से 2- 2 लाख की मंजूरी….. कहीं काम अधूरा तो कहीं ढेला भर काम नही…! गबन की आशंका पढ़े पूरी ख़बर

0 तत्कालीन कलेक्टर ने दी थी स्वीकृति.

0 जनपद सीईओ के संज्ञान में नही मामला.

0 जनपद सदस्य, क्षेत्र क्रमांक- 15 ने की उचित जांच व कार्रवाई की मांग.

कोरबा//जिला खनिज न्यास मद से बोर खनन, सबमर्सिबल पंप, सिंटेक्स स्थापना कार्य पर लाखों खर्च होने के बाद भी पाली जनपद के पहाड़ी- वनांचल गांव प्यासे है। किसी पंचायत ने सिस्टम स्थापित कर दिया लेकिन विद्युत कार्य नही कराने से ग्रामीणों को पेयजल का लाभ नही मिल रहा तो कई पंचायतें ने पहली किश्त की राशि निकाल ली है पर काम एक ढेला का नही कराया है। उक्त निर्माण से जनपद सीईओ को भी दूर रखे जाने की जानकारी प्राप्त हुई है, ऐसे में गबन की आशंका बढ़ गई है।

तत्कालीन कलेक्टर अजीत वसंत ने 6 माह पूर्व पहाड़ी और वृहद वनांचल वाली ग्राम पंचायतें- पहाड़गांव, बारीउमराव, रतखण्डी, जेमरा व कोडार में ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल सुनिश्चित कराने डीएमएफ मद से बोर खनन, सबमर्सिबल पंप व सिंटेक्स कार्य के लिए 2- 2 लाख की स्वीकृति दी थी तथा मांग के अनुरूप उक्त पंचायतों में यह कार्य एक से अधिक स्थानों पर कराए जाने थे। लेकिन किसी पंचायत में अधूरे काम तो कहीं काम की शुरुआत ही नही हुई है। ग्राम पंचायत पहाड़गांव के आश्रित मोहल्ला चोरकाडांड़ में एक- डेढ़ माह पूर्व डीएमएफ मद के 2 लाख से बोर खनन, सबमर्सिबल पंप, सिंटेक्स टंकी की स्थापना कर दी गई, किंतु जिम्मेदार सरपंच- सचिव द्वारा विद्युत कनेक्शन नही कराने से सिस्टम चालू नही हुआ व योजना ठप पड़ी है और भीषण गर्मी में भी आज पर्यन्त ग्रामीणों को पेयजल का एक बूंद लाभ नही मिल पाया है। तस्वीर में दिख रहा है कि 1000 लीटर का सिंटेक्स और सबमर्सिबल बोर बिना बिजली के शोपीस बना हुआ है। इसे लेकर चोरकाडांड़ के ग्रामीणों का कहना है कि एक- डेढ़ महीने से टंकी- पाइप लगा देख रहे है, सोचें शुद्ध पानी मिलेगा, लेकिन बिजली ही नही जोड़ी गई है। गर्मी में जान निकल रही है, 2 लाख खर्च हो गए, पर हम प्यासे के प्यासे बोर व पानी टंकी को ताक रहे है।

ग्रामीणों ने सरपंच धरम सिंह खुसरो एवं सचिव शिवराम निषाद से अनेकों बार बोर में विद्युत कनेक्शन कराकर पेयजल आपूर्ति शुरू करने मांग की, पर उनकी बातों को लगातार अनसुना करते आ रहे है। ऐसे में जब 2 लाख खर्च कर बोर- पंप- टंकी लग जाए और फिर भी लोग प्यासे रहें तो यह जिम्मेदारों के कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। सूत्रों के मुताबित अन्य पंचायतें ने डीएमएफ से प्रथम किश्त की राशि महीनों पूर्व आहरित कर ली है, लेकिन मौके पर एक ढेला काम नही कराया है। आशंका जताई जा रही है कि राशि हड़पने का प्रयास किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 3- 4 माह पूर्व पाली जनपद में पदस्थ हुए सीईओ को भी इस पूरे निर्माण कार्य से परे रखा गया है। नियमानुसार जनपद सीईओ की निगरानी में काम होना था, परंतु बिना उनकी जानकारी के सरपंच- सचिव स्तर पर अन्य मद से स्थापित बोर, सिंटेक्स कार्य को दिखाकर राशि गबन का प्रयास किया जा रहा है। कहीं काम अधूरा छोड़ दिया गया तो कहीं बिना काम राशि हजम करने की तैयारी है।

यह गंभीर वित्तीय अनियमितता है और आवश्यक जांच का विषय है। इस मामले को लेकर पाली जनपद पंचायत की सदस्य, क्षेत्र क्रमांक- 15 श्रीमती कौशिल्या भंवर उइके ने कहा कि डीएमएफ का पैसा आदिवासी- वनांचल लोगों के विकास के लिए है। पहाड़ी, जंगली में स्थित ग्राम पंचायतें में पेयजल व्यवस्था सुदृढ़ करने तत्कालीन कलेक्टर ने बोर खनन, सबमर्सिबल पंप व सिंटेक्स स्थापना कार्य के लिए 2- 2 लाख के हिसाब से राशि स्वीकृत की, लेकिन चयनित पंचायतें में यह काम कहीं अधूरा तो कहीं कार्य कराए ही नही गए है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है- डीएमएफ से बोर खनन, सबमर्सिबल पंप, सिंटेक्स कार्य स्वीकृत वाले पंचायतों में उक्त कार्यों का भौतिक सत्यापन और आवश्यक कार्रवाई की जाए, ताकि भीषण गर्मी में प्यासे ग्रामीणों को राहत मिल सके।

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