छत्तीसगढ़

CG – डॉ. शिखा गोस्वामी “निहारिका” ने मेरे पिता कविता लिखा गया…

मेरे पिता

आँखे खोली जिनकी गोदी, वह मेरे पिता है।
दुनिया देखी, जिनकी गोदी, वह मेरे पिता हैं।।

हैं हम जिनके चाँद-सितारे, वह मेरे पिता है।
जग के हीरे-मोती सारे, वह मेरे पिता हैं।।

कभी हँसाते, कभी रुलाते, कभी खुद भी बच्चे बन जाते।
गुस्से में जब आँख दिखाते, पलभर में ही हम सहम जाते।।

पिता मेरे थोड़े सख्त हैं, जैसे कोई तख्त है।
सारे परिवार को एक बनाएँ, ऐसे मजबूत दरख्त हैं।।

खुद से अधिक परवाह हमारी, पिता ही तो करते हैं।
बिना कहे, हमारी बात समझ, सब पहले ही ला देते हैं।।

कैसे बतलाएँ, हम पिताजी,क्या हो आप हमारे लिए।
शब्द ही कम पड़ जायेंगे,जो लिखने लगे हम आपके लिए।।

खुशी में हमारी, खुशी अपनी देखें, वह मेरे पिता है।
कष्ट स्वयं उठाकर, हँसी हमें दें, वह मेरे पिता है।।

रह-रहकर सीने में जिनके जलती, गमों की एक चिता है।
सुरक्षित हैं हम जिनकी छाया, वह मेरे पिता हैं।।

जग के मतलबी भीड़ में, दिव्य अलौकिक किरण, वह मेरे पिता है।
मुश्किल भरी डगर में, नई प्रभा हौसलों की किरण, वह मेरे पिता हैं।।

हमारे लिए दुनिया के अनमोल रतन, वह मेरे पिता हैं।
शीश झुकाऊँ, प्रभु से पहले, आगे जिनके, वह मेरे पिता हैं।।

डॉ. शिखा गोस्वामी “निहारिका”

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