छत्तीसगढ़

CG – तेंदूपत्ता संग्राहकों को छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा तोहफा, मजदूरी 4,000 से बढ़ाकर किए इतने रुपए……

रायपुर। छत्तीसगढ़ के तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए खुशखबरी है, दरअसल साय सरकार ने मजदूरी दर बढ़ा दी है। सरकार द्वारा तेंदूपत्ता संग्राहकों को बड़ी राहत देते हुए संग्रहण पारिश्रमिक (मजदूरी) दर को 4,000 से बढ़ाकर 5,500 रू. प्रति मानक बोरा कर दिया गया है। यह राशि सीधे डीबीटी (DBT) के माध्यम से ऑनलाइन संग्राहकों के बैंक खातों में जमा की जा रही है

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार तेंदूपत्ता संग्राहकों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए लगातार कार्य कर रही है। इसी क्रम में केशकाल वनमंडल के 2,803 पात्र तेंदूपत्ता संग्राहकों को वर्ष 2023 के संग्रहण के लिए 40 लाख 39 हजार 891 रुपये की प्रोत्साहन पारिश्रमिक राशि ऑनलाइन उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की जा रही है।

जिला वनोपज सहकारी यूनियन मर्यादित, केशकाल के प्रबंध संचालक ने बताया कि प्राथमिक लघु वनोपज सहकारी समितियों केशकाल और खालेमुरवेंड के संग्राहकों को ऑनलाइन एमएफपी कलेक्शन एंड पेमेंट सिस्टम के माध्यम से सीधे बैंक खातों में भुगतान किया जा रहा है। समिति केशकाल के अंतर्गत संचालित 31 तेंदूपत्ता फड़ों के संग्राहकों को भी प्रोत्साहन राशि का लाभ मिला है।

ऑनलाइन भुगतान व्यवस्था से पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तेज और सरल हो गई है। इससे संग्राहकों को बिना किसी परेशानी के समय पर उनकी प्रोत्साहन राशि मिल रही है।

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप की मंशा के अनुरूप राज्य शासन तेंदूपत्ता संग्राहकों और वनाश्रित परिवारों की आय बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। प्रोत्साहन राशि सीधे बैंक खातों में पहुंचने से हितग्राहियों को उनकी मेहनत का उचित लाभ मिल रहा है और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है।

केशकाल वनमंडलाधिकारी दिव्या गौतम ने कहा कि वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार तेंदूपत्ता संग्राहकों को उनकी मेहनत का उचित पारिश्रमिक समय पर उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकता है। सीधे बैंक खातों में राशि हस्तांतरण से भुगतान प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हुई है और वनाश्रित परिवारों को इसका सीधा लाभ मिल रहा है।

तेंदूपत्ता संग्राहकों को दी जा रही यह प्रोत्साहन राशि वनांचल क्षेत्रों के हजारों परिवारों के लिए आर्थिक सहारा बनेगी। इससे उनकी आय में वृद्धि होगी, आजीविका मजबूत होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी।

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