छत्तीसगढ़

CG – पीडब्ल्यूडी का विश्रामगृह बना सरकारी अय्याशी का अड्डा, विभागीय कर्मचारी पर रंगरेलिया मनाने का लगा गंभीर आरोप कारगुजारी को लेकर जिम्मेदार मौन पढ़े पुरी ख़बर

0 सरकारी संपत्ति के तौहीन के साथ- साथ विभाग की साख हो रही तार- तार.

कोरबा//जनता के टैक्स से बना लोक निर्माण विभाग का विश्रामगृह अब सरकारी अय्याशी सेंटर बन गया है। नगर के बीचों- बीच वीआईपी और प्रशासनिक अधिकारियों के आवागमन वाले इस रेस्ट हाउस के चार्ज में बैठे एक नियमित कर्मचारी द्वारा यहां अनैतिक कृत्य किये जाने का गंभीर आरोप लगा है। जबकि इस शर्मनाक हरकत और बदनामी के लिए जिम्मेदार उप अभियंता को इसकी जानकारी होने के बाद भी आंख बंद किये बैठे हैं।

नगर के शिवमंदिर समीप एवं चैतुरगढ़ मार्ग पर स्थित पीडब्ल्यूडी का सरकारी विश्रामगृह, जहां रोजाना प्रशासनिक अधिकारियों- कर्मचारियों और वीआईपी विश्राम के लिए रुकते हैं, यह विश्रामगृह इन दिनों अय्याशी का अड्डा बना हुआ है। आरोप है कि रेस्ट हाउस संभालने वाले विभाग के ही एक कर्मचारी, जिसे उप अभियंता ने जिम्मेदारी सौंपी है। उक्त रंगरेला कर्मचारी ड्यूटी छोड़कर रेस्ट हाउस में रंगरेलिया मनाता है और सरकारी संपत्ति का दुरुपयोग कर अनैतिक कार्य को अंजाम देता है।

सूत्रों के अनुसार विभागीय कर्मचारियों ने इस कृत्य से उप अभियंता को मौखिक रूप से अवगत कराया है। लेकिन उन्होंने इस ओर कोई ध्यान नही दिया, जिससे आशिक मिजाज कर्मचारी के हौसले बुलंद हैं। यह रेस्ट हाउस सरकारी मेहमानों के लिए है। यहां मंत्री- अधिकारी आते हैं, लेकिन विभाग के ही एक कर्मचारी ने इसे निजी अड्डा बना रखा है। शिकायत के बाद भी कोई डर नही उसे तथा अपने कुकृत्य से सरकारी संपत्ति की तौहीन करने में जुटा हुआ है। इस हरकत से न सिर्फ विभाग की साख तार- तार हो रही है, बल्कि सरकारी सुरक्षा और गोपनीयता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

कल को कोई वीआईपी यहां रुके और इस कांड का भंडाफोड़ हो तो पूरे जिले की बदनामी तय है। रेस्ट हाउस की प्रत्यक्ष जवाबदारी उप अभियंता की है, जिन्होंने रँगमिजाज कर्मचारी को जिम्मेदारी सौंपी है। जहां इस मामले की शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई न होने से अब सवाल उठने लगा है कि क्या उप अभियंता को इस अय्याशी से कोई दिक्कत नही, या फिर मिलीभगत है? ऐसे में सरकारी रेस्ट हाउस को अय्याश कर्मचारी के हवाले छोड़ देना किस हद तक सहीं है? बहरहाल इस सरकारी बदनामी पर तत्काल रोक लगाने और आवश्यक जांच कर गैरजिम्मेदार कर्मचारी को पाली से हटाए जाने के लिए मांग उठी है।

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