CG – पाली जनपद सीईओ मोहनीश का कोरबा मोह स्थानांतरण के बाद भी नहीं छोड़ रहें कुर्सी शासन की आदेश को दिखा रहे ठेंगा प्रशासन नतमस्तक पढ़े पुरी ख़बर
कोरबा//छत्तीसगढ़ राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार अवर सचिव वीरेंद्र कुमार जायसवाल, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, मंत्रालय रायपुर द्वारा जारी तबादला आदेश को पाली जनपद सीईओ मोहनीश देवांगन ठेंगा दिखाने में लगे है और जारी आदेश के विरुद्ध गत 3 माह से जिले में जमे हुए है। जिसे लेकर तरह- तरह की चर्चा होने लगी है।
जनपद पंचायत कार्यालय पाली में पदस्थ सीईओ मोहनीश देवांगन का शासन आदेश के तहत तबादला 20 फरवरी 2026 को जिला सक्ति के जनपद पंचायत सक्ति मुख्य कार्यपालन अधिकारी के लिए कर दिया गया है और जारी आदेश के 10 दिवस के भीतर उन्हें अपने नवीन पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने कहा गया है तथा आगामी माह का वेतन नवीन पदस्थापना कार्यालय से जारी होना था, लेकिन वे अबतक रिलीव नही हुए है।
ऐसे में न केवल वे शासन आदेश को ठेंगा दिखाने में लगे है, बल्कि अपनी ऊंची राजनीतिक/प्रशासनिक पहुँच का भी परिचय दे रहे है। बता दें कि सीईओ मोहनीश देवांगन पूर्व में कोरबा जिले के करतला जनपद पंचायत कार्यालय में पदस्थ थे, जहां से उनका तबादला सहायक परियोजना अधिकारी बतौर सूरजपुर के लिए छत्तीसगढ़ शासन द्वारा किया गया था। तब भी वे सूरजपुर के लिए कोरबा जिले से रिलीव नही किये गए, तब उनके कार्यप्रणाली को लेकर सरपंच संघ के आंदोलन पर उन्हें करतला जनपद से हटाकर जिला पंचायत में सहायक परियोजना अधिकारी के रूप में पदस्थ कर दिया गया था, जहां वे सेवा देते रहे। तत्कालीन कलेक्टर द्वारा 3 फरवरी 2026 को जारी आदेश के तहत मोहनीश देवांगन को पाली जनपद में पदस्थ किया गया।
जिसके बाद 20 फरवरी 2026 को शासन तबादला आदेश पर श्री देवांगन के पूर्व तबादला में फेरबदल करते हुए सहायक परियोजना अधिकारी, जिला पंचायत सूरजपुर से मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत सक्ति के लिए स्थानांतरण किया गया, लेकिन मोहनीश देवांगन ने शासन के आदेश को दरकिनार रखा है। सूत्रों के अनुसार मोहनीश देवांगन ने अपना तबादला सूरजपुर से सक्ति कराया है, लेकिन इस तबादला आदेश के पालन में उन्होंने कोई रुचि नही दिखाई है। लगता है उन्हें कोरबा जिले की अबोहवा भा गई है, इसीलिए वे पाली जनपद की कुर्सी पर बैठकर कामकाज निबटा रहे है।
जिसे लेकर अनेको चर्चा का बाजार गर्म है। जानकारों का कहना है कि अन्यंत्र स्थानांतरण के महीनों बाद भी पूर्व पदस्थापना जिले के कार्यालय में नियम विरुद्ध बैठकर काम निबटाना उचित नही है। वहीं शासन के गाइडलाइन के अनुसार यदि कोई अधिकारी तय अवधि में रिलीव नही होता है तो उन्हें एकतरफा कार्यमुक्त माना जा सकता है। स्थानांतरण आदेश की अवहेलना करने पर उन्हें खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान है। लेकिन मोहनीश देवांगन शासन के नियम- कायदे को धत्ता बताते जिले में ही जमे हुए है, जिससे प्रशासनिक कामकाज और योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधा उत्पन्न होना माना जा रहा है।



