छत्तीसगढ़

CG – “अब वेतन का नया गुरु मंत्र – पहले VSK ऐप प्रसन्न हो, फिर वेतन !” : गजेन्द्र श्रीवास्तव

“अब वेतन का नया गुरु मंत्र – पहले VSK ऐप प्रसन्न हो, फिर वेतन !”

जगदलपुर, रायपुर। संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय रायपुर द्वारा जारी उस आदेश ने शिक्षकों के बीच नई चर्चा छेड़ दी है, जिसमें VSK ऐप में दर्ज उपस्थिति के आधार पर ही वेतन आहरित करने की व्यवस्था की गई है।

छ ग प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री गजेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि तकनीकी के कारण किसी भी कर्मचारी को उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता।शिक्षको को अब विद्यालय में समय पर पहुँचना, बच्चों को पढ़ाना, परीक्षा कराना और शैक्षणिक कार्य करना ही पर्याप्त नहीं है। सबसे पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि मोबाइल स्वस्थ रहे, बैटरी प्रसन्न रहे, इंटरनेट देवता कृपा करें, सर्वर महाराज जागृत रहें और VSK ऐप मुस्कुराता हुआ उपस्थिति स्वीकार कर ले। तभी शिक्षक का वेतन सुरक्षित माना जाएगा।

यदि किसी दिन शिक्षक का मोबाइल खराब हो जाए, मोबाइल घर पर ही छूट जाए, नेटवर्क साथ छोड़ दे या सर्वर तकनीकी अवकाश पर चला जाए, तो गलती तकनीक की होगी, लेकिन जवाबदेही शिक्षक की तय होगी। ऐसा प्रतीत होता है मानो तकनीकी त्रुटि का दूसरा नाम ही शिक्षक हो।

संघ के संभाग अध्यक्ष अतुल शुक्ला और बस्तर जिला अध्यक्ष संजय चौहान ने कहा कि यदि मात्र एक प्रतिशत तकनीकी समस्या के कारण भी उपस्थिति दर्ज नहीं होती, तो संबंधित शिक्षक अधिकारियों के कोपभाजन का शिकार बन जाता है। ऐसे में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या तकनीक कभी असफल नहीं होती? क्या मोबाइल कभी खराब नहीं होता? क्या दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क हमेशा उपलब्ध रहता है? क्या सर्वर कभी बंद नहीं पड़ता?

शिक्षक समुदाय ने व्यंग्य करते हुए सुझाव दिया है कि यदि VSK ऐप ही सबसे बड़ा निरीक्षक है, तो जिस दिन किसी शिक्षक के ऐप में तकनीकी समस्या आए, उसी दिन जिला शिक्षा अधिकारी और विकासखंड शिक्षा अधिकारी स्वयं संबंधित विद्यालय पहुँचकर तकनीकी समस्या का समाधान करें, ताकि शिक्षक पढ़ाई छोड़कर मोबाइल और नेटवर्क के पीछे भटकने के बजाय विद्यार्थियों को शिक्षा दे सके।

शिक्षकों की मांग है कि जब तक तकनीकी व्यवस्था पूरी तरह विश्वसनीय नहीं हो जाती, तब तक ऑफलाइन उपस्थिति को भी वैध माना जाए, ताकि किसी शिक्षक का वेतन केवल तकनीकी खामी के कारण प्रभावित न हो। शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण होना चाहिए, न कि नेटवर्क और सर्वर की परीक्षा।

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