छत्तीसगढ़

CG – इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने शहीद गुण्डाधुर कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र का सघन भ्रमण कर संस्थान की शैक्षणिक और अनुसंधान गतिविधियों का जायजा लिया…

कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने किया शहीद गुण्डाधुर कृषि महाविद्यालय का दौरा

छात्राओं के लिए ‘एयरविंग’ और बस्तर के लिए विशेष अनुसंधान पर दिया जोर

जगदलपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने शहीद गुण्डाधुर कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र का सघन भ्रमण कर संस्थान की शैक्षणिक और अनुसंधान गतिविधियों का जायजा लिया। इस प्रवास के दौरान उनके साथ अधिष्ठाता डॉ आरएस नेताम एवं सह संचालक अनुसंधान डॉ एके ठाकुर भी उपस्थित रहे। कुलपति डॉ. चंदेल ने अपने भ्रमण की शुरुआत इंद्रावती कन्या छात्रावास से की, जहाँ उन्होंने निर्माणाधीन अतिरिक्त कक्षों का सूक्ष्म निरीक्षण करते हुए निर्माण कार्य को और बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण तकनीकी सुझाव और निर्देश दिए।

छात्राओं के साथ आत्मीय चर्चा करते हुए कुलपति ने उन्हें अनुशासन और राष्ट्र सेवा के प्रति प्रेरित किया। उन्होंने छात्राओं को एनसीसी में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित करते हुए यह विश्वास दिलाया कि अगले सत्र तक महाविद्यालय में एनसीसी की ‘एयरविंग’ प्रारंभ कर दी जाएगी। छात्राओं द्वारा रखी गई विभिन्न मांगों और समस्याओं पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए उन्होंने अधिष्ठाता को तत्काल आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश प्रदान किए।

संस्थान के विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से आयोजित वैज्ञानिकों और अधिकारियों की बैठक में डॉ. चंदेल ने बस्तर की विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों पर चर्चा की। उन्होंने वैज्ञानिकों को निर्देशित किया कि वे बस्तर क्षेत्र के लिए उपयुक्त फसलों और उनके प्रसंस्करण पर विशेष अनुसंधान करें, ताकि स्थानीय किसानों को सीधा लाभ मिल सके। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि छात्रों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें प्रायोगिक कार्यों और आधुनिक प्रसंस्करण तकनीकों में दक्ष बनाया जाए।

इसी बैठक के दौरान शैक्षणिक जगत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि तब जुड़ी जब कुलपति एवं उपस्थित अतिथियों ने डॉ रोशन परिहार द्वारा लिखित पुस्तक ‘वस्तुनिष्ठ बीज तकनीक’ का विमोचन किया। इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. संतोष नाग, कुलपति के निज सहायक डॉ. रवि श्रेय सहित महाविद्यालय के समस्त अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। यह दौरा न केवल अधोसंरचना के विकास बल्कि बस्तर में कृषि शिक्षा और अनुसंधान की नई संभावनाओं को तलाशने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा।

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