छत्तीसगढ़

CG – पोड़ी उपरोड़ा की जल क्रांति : अमृत सरोवर नवा तरिया और आजीविका डबरी से बदल रही गांवों की तस्वीर सिंचाई से लेकर मछली पालन तक मिल रहा लाभ पढ़े पूरी ख़बर

0 पीएम मोदी ने मन की बात में की कोरबा जिले के इस कार्य की सराहना.

कोरबा//जल संरक्षण की दिशा में पोड़ी उपरोड़ा ब्लाक के गांव अब प्रदेश के लिए मिशाल बन रहे हैं। मनरेगा के तहत इस ब्लाक में निर्मित अमृत सरोवर, नवा तरिया और आजीविका डबरी ग्रामीणों के लिए जीवन रेखा बन रहा है। इससे न सिर्फ वर्षा जल का संरक्षण हो रहा, बल्कि ग्रामीणों की आजीविका, नीस्तारी व खेती- किसानी को भी बड़ा संबल मिला है।

पोड़ी उपरोड़ा ब्लाक के इस जल मॉडल को लेकर मनरेगा के कार्यक्रम अधिकारी दिलीप मेहता ने बताया कि पंचायतों में अब तक 31 अमृत सरोवर, 15 नवा तरिया व 200 आजीविका डबरी का निर्माण कराया जा चुका है। जहां इसके खर्च और क्षमता को लेकर अमृत सरोवर नए तालाब निर्माण के लिए 19 लाख और पुराने तालाब के नवीनीकरण के लिए 9.98 लाख स्वीकृत हो रहे हैं।

वहीं नवा तरिया 11 से 15 लाख की लागत से बन रहे हैं, जिसमे 10000 घन मीटर तक जल भराव क्षमता होगी। इसी प्रकार आजीविका डबरी का निर्माण 2.90 लाख की लागत से हो रहा है तथा इसमें 1000 घन मीटर तक जल भराव होगी। इनकी राशि पहले मनरेगा और अब वीर बहादुर जी राम जी योजना के तहत मिल रही है। कार्यक्रम अधिकारी दिलीप मेहता ने आगे बताया कि इन जल संरचनाओं से तीन बड़े लाभ मिल रहे हैं, जिनमे गर्मी के दिनों में भी खेतों तक पानी पहुँच रहा है, जिससे रबी फसल और सब्जी की खेती की जा रही है।

वहीं पशुओं के पीने, निस्तारी उपयोग के लिए साल भर पानी उपलब्ध रहता है, साथ ही कई डबरियों में मछली पालन शुरू हुआ है, जिससे स्व. सहायता समूहों की महिलाओं को अतिरिक्त आय हो रही है। कार्यक्रम अधिकारी ने कहा कि कलेक्टर के निर्देशन और जिला पंचायत सीईओ के मार्गदर्शन में हर गांव, हर खेत को पानी की मुहिम चलाकर यह कार्य कराया जा रहा है।

पीएम मोदी ने भी की तारीफ…

कोरबा जिले में जल संरक्षण के इस उत्कृष्ट कार्य को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मन की बात कार्यक्रम में 30 जुलाई 2026 के एपिसोड में कोरबा जिले में चल रहे जल संरक्षण कार्यों की विशेष रूप से सराहना की है तथा उन्होंने कहा कि कैसे छोटे- छोटे तालाब और डबरियां गांव की तकदीर बदल रही है। प्रधानमंत्री की इस सराहना के बाद इस कार्य को लेकर प्रशासन में उत्साह का माहौल है।

पोड़ी उपरोड़ा ने दिखा दिया कि मनरेगा सिर्फ रोजगार नही, गांव की बुनियाद भी बदल सकता है। जब पानी बचेगा तभी खेत हरे होंगे और जब खेत हरे होंगे तभी गांव समृद्ध होगा साथ ही मछली पालन जैसे आजीविका से ग्रामीण आर्थिक रूप से सशक्त भी होंगे। पोड़ी उपरोड़ा की 246 सहित जिले भर की जल संरचनाएं मॉडल आज पूरे छत्तीसगढ़ के लिए प्रेरणा है।

Related Articles

Back to top button