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सुशासन तिहार” के नाम पर भाजपा सरकार का दिखावा, आम जनता एवं प्रशासनिक तंत्र को किया जा रहा है परेशान….जिला कांग्रेस कमेटी बेमेतरा के अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक आशीष छाबड़ा

आशीष छाबड़ा जिला अध्यक्ष कांग्रेस कमेटी व पूर्व विधायक बेमेतरा

संजू जैन जिला संवाददाता बेमेतरा :7000885784

बेमेतरा:सुशासन तिहार” के नाम पर भाजपा सरकार का दिखावा, आम जनता एवं प्रशासनिक तंत्र को किया जा रहा है परेशान….जिला कांग्रेस कमेटी बेमेतरा के अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक आशीष छाबड़ा ने भारतीय जनता पार्टी द्वारा आयोजित तथाकथित “सुशासन तिहार” पर तीखा प्रहार करते हुए कहा है कि यह कार्यक्रम पूरी तरह से दिखावे और प्रचार का माध्यम बनकर रह गया है, जिसका वास्तविक सुशासन से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी के इस दौर में, खासकर दोपहर के समय इस प्रकार के आयोजन कर आम जनता को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है। दूर-दराज़ क्षेत्रों से आने वाले ग्रामीण एवं शहरी नागरिकों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे उन्हें शारीरिक एवं मानसिक कष्ट झेलना पड़ रहा है आशीष छाबड़ा ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों को उनके मूल कार्यालयीन कार्यों से हटाकर इस प्रकार के आयोजनों में लगाया जा रहा है, जिससे शासकीय कार्य पूरी तरह से प्रभावित हो रहे हैं। कई महत्वपूर्ण विभागों में अधिकारी एवं कर्मचारी अपने कार्यालयों में उपलब्ध नहीं हैं, जिसके कारण आम जनता के जरूरी कार्य लंबित हो रहे हैं उन्होंने कहा कि आम नागरिकों को प्रमाण पत्र, राजस्व संबंधित कार्य, पेंशन, राशन, स्वास्थ्य सेवाओं एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, लेकिन उन्हें समय पर कोई समाधान नहीं मिल पा रहा है इससे स्पष्ट होता है कि सरकार की प्राथमिकता जनता की सेवा नहीं, बल्कि केवल दिखावटी कार्यक्रमों के माध्यम से अपनी छवि चमकाना है।सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न उठाते हुए छाबड़ा ने कहा कि भाजपा सरकार यह स्पष्ट करे कि पूर्व में आयोजित “सुशासन तिहार” में कुल कितने आवेदन प्राप्त हुए थे और उनमें से कितनों का वास्तविक निराकरण किया गया। आज तक इन आंकड़ों को सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया? उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक केवल आम जनता की भावनाओं से खिलवाड़ किया गया है, जबकि जमीनी स्तर पर समस्याओं का समाधान नगण्य अथवा शून्य रहा है।उन्होंने यह भी कहा कि “सुशासन तिहार” के नाम पर प्रशासनिक तंत्र को अनावश्यक दबाव में रखा जा रहा है, जिससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है और कार्यक्षमता पर भी विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। यह स्थिति न केवल शासन व्यवस्था को कमजोर कर रही है, बल्कि आम जनता के विश्वास को भी ठेस पहुंचा रही है। उन्होंने आगे कहा कि यदि वास्तव में सुशासन स्थापित करना है, तो सरकार को इस प्रकार के आयोजनों की बजाय जमीनी स्तर पर काम करना चाहिए—जैसे कि बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करना, किसानों की समस्याओं का समाधान करना, युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना एवं स्वास्थ्य एवं शिक्षा सेवाओं को बेहतर बनाना। अंत में श्री छाबड़ा ने भाजपा सरकार से मांग की कि इस प्रकार के दिखावटी “सुशासन तिहार” को तुरंत बंद कर वास्तविक जनहित के कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया जाए, ताकि आम नागरिकों को राहत मिल सके और प्रशासनिक कार्य सुचारू रूप से संचालित हो सके।

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