CG – मस्तूरी के सोन प्राथमिक शाला में शिक्षकों का संकट: 200 बच्चों को पढ़ा रहे अकेले शिक्षक, 2 पद कागजों में, पालक चिंतित पढ़े पूरी ख़बर
बिलासपुर//जिले के मस्तूरी विकासखंड के ग्राम सोन स्थित शासकीय प्राथमिक शाला में शिक्षकों की कमी एक बार फिर गहरा गई है। स्कूल में कुल 200 बच्चे दर्ज हैं, लेकिन उन्हें पढ़ाने के लिए मैदान में सिर्फ 1 शिक्षक बचा है। 3 पदों में से 1 रिटायर हो चुका है और दूसरा शिक्षक छात्रावास की जिम्मेदारी में उलझा है। इससे गांव के पालकों में भारी चिंता है।
*क्या है स्थिति?
कागजों पर 3, हकीकत में 1 शाला में कुल 3 शिक्षक हैं। गीता मिश्रा प्रधान पाठक। 30 जून 2026 को रिटायर हो चुकी हैं। आदेश आने तक “मेहमान” के तौर पर आ रही हैं। अनीता दुबे पदस्थ हैं लेकिन छात्रावास अधीक्षिका की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। शर्त थी कि स्कूल में भी पढ़ाएंगी,और इसी शर्त पर इनकों छात्रावास की जिम्मेदारी दी गई थी लेकिन शिक्षकों का कहना है कि “जब मन होता है तभी कक्षा में आती हैं। “नमित पाटले एकमात्र नियमित शिक्षक।
वही कक्षा 1 से 5 तक के 200 बच्चों को अकेले पढ़ा रहे हैं। पालकों की परेशानी 200 बच्चों की 5 कक्षाएं एक शिक्षक कैसे संभाले? न समय पर सिलेबस पूरा होगा न कमजोर बच्चों पर ध्यान दिया जा पा रहा है। पालकों का कहना है “बच्चों का भविष्य अंधकार में है। या तो शिक्षक भेजो या स्कूल बंद कर दो।”
रिटायरमेंट के बाद खाली पद प्रधान पाठक के रिटायर होने से प्रशासनिक काम भी ठप है। उपस्थिति, MDM, छात्रवृत्ति जैसे काम नमित पाटले के सिर पर ही हैं।
अधिकारी क्या बोले?
CAC भरत सूर्यवंशी”हमें समस्या की जानकारी है। BEO सर से चर्चा कर सोन शाला में अतिथि शिक्षक या समायोजन के माध्यम से शिक्षकों की व्यवस्था कराई जाएगी। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होने देंगे।”BEO शिव कुमार टंडन वर्तमान में अवकाश पर हैं। उनके लौटने के बाद प्रस्ताव भेजकर तत्काल शिक्षक व्यवस्था की बात कही गई है।
नियम क्या कहते हैं?
RTE के अनुसार 60 बच्चों पर 2 शिक्षक और 200 बच्चों पर कम से कम 5 शिक्षक होने चाहिए। यहां मानक से 4 शिक्षक कम हैं। छात्रावास अधीक्षक को भी शिक्षण कार्य से मुक्त नहीं रखा जा सकता अगर नियुक्ति स्कूल की शर्त पर हुई है।
ग्रामीणों की मांग…
यहाँ पढ़ने वाले बच्चों के पालकों ने कलेक्टर और DEO से मांग की है कि तत्काल 2 अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति की जाए और प्रधान पाठक का पद जल्द भरा जाए। गांव का स्कूल ही सहारा है”
अब आगे क्या…
CAC ने आश्वासन दिया है कि BEO के आते ही प्रस्ताव बनाकर जिला कार्यालय भेजा जाएगा। तब तक नमित पाटले पर ही स्कूल का पूरा बोझ है।




