
Chhattisgarh धमतरी कला केवल रंगों और रेखाओं का मेल नहीं, बल्कि संवेदनाओं, कल्पनाओं और अदम्य इच्छाशक्ति की अभिव्यक्ति भी है। धमतरी में आयोजित तीन दिवसीय ‘जीवन रंग’ चित्रकला प्रदर्शनी एवं प्रतियोगिता में इसका प्रेरक उदाहरण देखने को मिला। बसंत फाउंडेशन छत्तीसगढ़, कुरूद के तत्वावधान में 21 से 23 अगस्त तक छत्रपति शिवाजी मराठा मंगल भवन में आयोजित प्रदर्शनी में 90 प्रतिशत दिव्यांग कलाकार बसंत साहू की कलाकृतियों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
प्रदर्शनी में पहुंचे स्कूली बच्चों ने विभिन्न पेंटिंग्स को करीब से देखा और रंगों के संयोजन, रेखांकन, आकृतियों के संतुलन तथा भावों को चित्रों में उकेरने की कला को समझा। बच्चों ने बसंत साहू से संवाद कर चित्रकला की बारीकियां और उपयोगी गुर भी सीखे। उन्होंने बच्चों को बताया कि प्रभावशाली चित्र के लिए प्रतिभा के साथ धैर्य, निरंतर अभ्यास और कल्पनाशीलता जरूरी है।

बच्चों के लिए सबसे खास पल कलाकार बसंत साहू से मुलाकात और संवाद का रहा। उन्होंने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि कला सीखने के लिए किसी विशेष परिस्थिति का इंतजार नहीं करना चाहिए। नियमित अभ्यास और अपनी कल्पना पर विश्वास के जरिए हर बच्चा अपनी अलग पहचान बना सकता है। बच्चों ने उनके साथ तस्वीरें खिंचवाकर इस मुलाकात को यादगार बनाया।
90 प्रतिशत दिव्यांगता के बावजूद बसंत साहू ने कला के क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार सहित मुख्यमंत्री और राज्यपाल द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है। उनकी उपलब्धियां इस बात का उदाहरण हैं कि प्रतिभा, मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति के सामने शारीरिक सीमाएं भी बाधा नहीं बन सकतीं।
बसंत साहू ने अपनी दिव्यांगता को कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी ताकत बनाया है। उनकी पेंटिंग्स में रंगों के साथ कल्पनाशीलता, संवेदनशीलता और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण साफ नजर आता है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व विधायक कुरूद लेख राम साहू उपस्थित रहे। वहीं नगर पालिका कुरूद की अध्यक्ष ज्योति चंद्राकर, नगर पंचायत भखारा की अध्यक्ष ज्योति जैन, समाजसेवी सरिता दोषी, रीतु राज पवार, डिपेंद्र साहू, महेंद्र पंडित, चेतन हिंदुजा, मनोज साहू, राकेश साहू एवं कृष्णकांत साहू सहित वरिष्ठ नागरिक, कला-प्रेमी और स्कूली बच्चे मौजूद रहे।
अपने उद्बोधन में लेख राम साहू ने बसंत साहू की कलाकृतियों और कला के प्रति उनके समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि 90 प्रतिशत दिव्यांगता के बावजूद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाना उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर मेहनत का परिणाम है। उनकी उपलब्धियां युवाओं और दिव्यांगजनों के लिए प्रेरणादायक हैं।
‘जीवन रंग’ प्रदर्शनी ने यह संदेश दिया कि प्रतिभा को अवसर मिले तो वह शारीरिक और परिस्थितिजन्य सीमाओं से आगे निकलकर अपनी पहचान बना सकती है। बसंत साहू की कला और संघर्ष ने साबित किया कि हौसले के रंगों से जीवन की हर चुनौती को एक खूबसूरत तस्वीर में बदला जा सकता है।



