CG – मस्तूरी के केंवटाडीह भुतहा में गड़बड़झाला तालाब गहरीकरण से आवास निर्माण तक मजदूरी भुगतान की जांच की मांग जल्द हो सकती है शिकायत पढ़े पूरी ख़बर
मस्तूरी//ब्लॉक के ग्राम पंचायत केंवटाडीह भुतहा में विकास कार्यों में मजदूरी भुगतान को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने तालाब गहरीकरण से लेकर प्रधानमंत्री आवास निर्माण तक मजदूरों की मजदूरी में हेराफेरी का आरोप लगाया है। जल्द ही उच्चाधिकारियों से शिकायत करने की बात कही है, हालांकि शिकायत किसके नाम होगी इस पर ग्रामीण अभी पत्ते नहीं खोल रहे।
क्या है मामला…
तालाब गहरीकरण में खेल मनरेगा से हुए तालाब गहरीकरण में ग्रामीणों का आरोप है कि मस्टररोल में सैकड़ों मजदूरों की फर्जी हाजिरी भरी गई। असली जॉब कार्डधारियों को काम नहीं मिला, पर उनके नाम से पैसा निकाल लिया गया।
आवास निर्माण में मजदूरी गायब…
PMAY-G के तहत बन रहे आवासों में लाभार्थियों से निर्माण कार्य कराया गया, लेकिन मनरेगा का लेबर कंपोनेंट हजारों की मजदूरी का भुगतान अब तक नहीं हुआ। “हमें कहा गया कि पैसा आएगा आएगा पर आया नहीं कई हितग्राही महीनो से इंतजार कर रहे हैं”
मस्टररोल में नाम, जेब खाली…
कई ग्रामीणों का कहना है कि उनके जॉब कार्ड पर बिना काम किए ही हाजिरी चढ़ा दी गई। जब पेमेंट स्लिप निकलवाई तो पता चला पैसा आया है वो भी बिना काम की फिर कुछ दिन बाद उसकी मांग की गई।
ग्रामीणों में आक्रोश…
केंवटाडीह भुतहा के प्रभावित ग्रामीणों ने गुपचुप तरीके से बैठक कर निर्णय लिया है कि पूरे मामले की शिकायत विभाग के उच्च अधिकारी से करेंगे। एक ग्रामीण ने कहा, “भ्रष्टाचार चरम पर है। तालाब गहरीकरण के नाम पर सिर्फ खाना पूर्ति की गई है यहाँ तालाब के ऊपर खोदाई से निकाले गए मिट्टी कों ही देख कर इसका अंदाजा लगाया जा सकता है की यहाँ कितना काम हुआ है आवास के नाम पर हमसे फ्री में काम कराया। अब जांच होगी तो बड़े नाम सामने आएंगे।”
अभी नाम नहीं बताएंगे’…
ग्रामीणों ने साफ कहा कि शिकायत किन किन लोंगो के खिलाफ करने वाले है इसका खुलासा अभी नहीं करेंगे। और सभी मामलों की एक साथ शिकायत करेंगे ताकि कोई बच न पाए”ग्रामीण नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया। केंवटाडीह भुतहा में इससे पहले नाली निर्माण, सीसी रोड और पंचायत भवन में भी गुणवत्ता और भुगतान को लेकर विवाद हो चुका है। मस्तूरी क्षेत्र में मनरेगा में फर्जी हाजिरी का ये कोई पहला मामला नहीं है। मुड़पार तेंदुआ, मचहा में भी इसी तरह के आरोप लगे हैं। देखना होगा यहाँ के ग्रामीण अब अपना भारी गुस्सा वाला बम कब और किस पर फोडने वाले है और ये शिकायत करने पहुंचते भी है या गाँव में ही मामला शांत करा लिया जाएगा?




