छत्तीसगढ़

CG – जहाँ छात्राएं वहां प्राचार्य मनोज सराफ की पोस्टिंग पर था प्रतिबन्ध पूर्व कलेक्टर अब्दुल हक ने शिक्षा विभाग को दिए थे सख्त निर्देश, 70 प्रतिशत छात्राओं की संख्या वाले पाली हाईस्कूल में फिर भी वर्षों से पदस्थ पढ़े पूरी ख़बर

0 तानाखार हाईस्कूल में पदस्थापना के दौरान 8 साल पहले युवती के साथ रंगरलिया मनाते ग्रामीणों ने पकड़ा था.

कोरबा//साल 2018 में अपने पदस्थापना वाले हाईस्कूल में एक युवती के साथ रंगरलिया मनाते पकड़े जाने व कार्रवाई के बाद सुर्खियों में छाए रहने वाले प्राचार्य मनोज सराफ को तत्कालीन कलेक्टर रहे अब्दुल हक ने छात्राएं अध्यनरत वाले स्कूल में पदस्थापना नही देने शिक्षा विभाग को सख्त निर्देश दिए थे, बावजूद इसके कलेक्टर निर्देश को दरकिनार कर वर्ष 2019-20 में उनकी पदस्थापना करीब 70 प्रतिशत छात्राएं संख्या वाले पाली हाईस्कूल में कर दी गई। उनके आचरण को लेकर इस स्कूल के छात्र- छात्राओं ने आंदोलन कर उन्हें हटाया भी था, लेकिन वे पुनः अपनी पदस्थापना पाली हाईस्कूल कराने में सफल रहे हैं और तब से लेकर आज तक इसी जगह पर जमे हुए है।

दरअसल मामला 2018 का है, जब प्राचार्य मनोज सराफ की शर्मनाक करतूत सामने आई थी। तब सराफ की पदस्थापना जिले के पोड़ी उपरोड़ा विकासखण्ड अंतर्गत तानाखार हाईस्कूल में थी। घटना दिनांक 03 जून को उक्त प्राचार्य को स्कूल भवन में एक युवती के साथ आपत्तिजनक स्थिति में ग्रामीणों ने पकड़ा था और कटघोरा पुलिस के हवाले किया था। पुलिस ने संदिग्ध परिस्थितियों में मिलने के मामले पर प्राचार्य सराफ के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करते हुए एसडीएम कोर्ट में पेश किया था। वहां उनकी जमानत खारिज कर दी गई थी।

जिसके बाद उन्हें जेल की हवा खानी पड़ी थी। तब जिले के कलेक्टर रहे मोहम्मद कैसर अब्दुल हक ने मनोज सराफ के विरुद्ध घटनाक्रम से विस्तृत रिपोर्ट कार्रवाई की अनुशंसा सहित बिलासपुर संभागायुक्त को प्रेषित की थी। इसके साथ ही कलेक्टर ने छात्राएं अध्यनरत वाले स्कूल में सराफ की पदस्थापना नही करने शिक्षा विभाग को खास निर्देश दिए थे। दूसरी ओर उक्त प्राचार्य के विरुद्ध इस्तगाशा क्रमांक- 13/10/2018 धारा 41 (2)/ 109 के तहत 67 घण्टे 50 मिनट जेल में बंद रहने के कारण छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम 1966 के तहत संभागायुक्त की ओर से निलंबन की कार्रवाई की गई थी।

निलंबन अवधि में तब उन्हें जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में अटैच किया गया था। वर्ष 2019- 20 में प्राचार्य सराफ अपने पद पर बहाल हुए, साथ ही कलेक्टर अब्दुल हक के अन्यंत्र स्थानांतरण व कोरबा में कलेक्टर श्रीमती किरण कौशल के पदस्थापना के साथ ही शिक्षा विभाग द्वारा उनकी पोस्टिंग 70 प्रतिशत छात्राएं संख्या वाले पाली हाईस्कूल में कर दी गई। प्राचार्य सराफ के आचरण के विरुद्ध वर्ष 2021 में पाली हाईस्कूल के छात्र- छात्राएं एकजुट होकर मुखर हो गए और उन्हें हटाने मांग पर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय अटैच कर दिया गया। बाद में वर्ष 2022 में वे अपनी पदस्थापना पुनः पाली हाईस्कूल कराने में सफल रहे और तब से आज पर्यन्त तक वे एक ही स्थान पर जमे हुए है।

अब सवाल यह उठता है कि कलेक्टर निर्देश को यथावत रखने और पालन करने के बजाय शिक्षा विभाग द्वारा आखिर किस आधार पर दोहरे चरित्र वाले प्राचार्य मनोज सराफ को अधिकतम छात्राएं दर्ज संख्या वाले पाली हाईस्कूल में पदस्थ किया गया? छात्र- छात्राओं द्वारा प्राचार्य के आचरण को लेकर उन्हें हटाए जाने मांग पर हटाने की प्रक्रिया पश्चात पाली हाईस्कूल में दोबारा उन्हें पदस्थापना क्यों दी गई? शीर्ष अधिकारियों का प्राचार्य मनोज सराफ पर और श्री सराफ का पाली हाईस्कूल के प्रति आखिर इतना मोह क्यों है? जिला प्रशासन को इस ओर गंभीरता से अमल करते हुए तथा आवश्यक कार्यवाही की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

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