छत्तीसगढ़

CG 105 लाख का काम, पुल पूरा- नाली अधूरा! पाली में डिप्टी सीएम के वादे के बाद भी जलभराव का खतरा बरकरार, नपं. अध्यक्ष का अल्टीमेटम-देरी हुई तो सड़क पर उतरेंगे पढ़े पूरी ख़बर

0 गत वर्ष घरों- दुकानों में घुसा था बरसाती पानी, इस बार भी वही डर.

कोरबा//पिछले साल भारी बारिश से नगर के बायपास रोड पत्ता गोदाम के पास घरों और दुकानों में घुसे पानी ने पाली नगर को हिला दिया था। गुस्साए लोगों ने तब उप मुख्यमंत्री के काफिले को रोककर सड़क जाम कर दिया था। डिप्टी सीएम ने मौके पर समस्या के स्थायी सामाधान का आश्वासन दिया था। उसके बाद कलेक्टर ने निरीक्षण कर पुल व लंबी नाली निर्माण की स्वीकृति दी और बीते मई माह में निर्माण शुरू हुआ। स्थिति ये है कि पुल बनकर तैयार है लेकिन नाली आधी अधूरी और मानसून कभी भी जमकर बरस सकता है।

ज्ञात हो कि पाली नगर के पत्ता गोदाम के पास जलभराव निकासी के लिए डीएमएफ मद से 105.32 लाख की लागत से बायपास मुख्यमार्ग 3/8 में पुल- नाली निर्माण कार्य चल रहा है, जिसमे पुल तो लगभग बनकर तैयार हो गया लेकिन बरसाती जलनिकासी का अहम कार्य नाली निर्माण लेट- लतीफी की भेंट चढ़ गया। ठेकेदार के सुस्त रवैये को लेकर निर्माण स्थल के आसपास संचालित दुकानों और स्थित घरों में बरसाती पानी फिर न घुसे, इसे लेकर लोगों की धड़कने तेज हो गई है। पिछले साल इसी जलभराव से लाखों का नुकसान हुआ था।

दुकानों में रखा अनाज, कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स, दुपहिया रिपेयरिंग सेंटर सहित अन्य दुकानों के सामान बर्बाद हो गए थे। तभी आक्रोश में लोगों ने वीआईपी काफिला रोका था। अब फिर वही तस्वीर सामने झलकने लगी है। पुल पूरा- नाली अधूरा और मानसून सर पर। लोगों में डर है और उनका कहना है कि नाली निर्माण कार्य पूर्ण नही होने से तेज बारिश का पानी इस बार भी घरों- दुकानों में घुसेगा। ठेकेदार को कोई जल्दी नही, लेकिन हमारा सामान फिर डूब जाएगा। उनका सवाल है- क्या नाली समय पर बनेगी या फिर मजबूर होकर दोबारा सड़क जाम करना पड़ेगा?

नपं.अध्यक्ष का अल्टीमेटम- अब बर्दास्त नही…

इस सुस्ती पर नगर पंचायत अध्यक्ष अजय जायसवाल ने कार्य क्रियान्वयन एजेंसी लोक निर्माण विभाग और निर्माण कराने वाले ठेकेदार पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने संबंधितों को चेताया है कि डिप्टी सीएम के आश्वासन के बाद काम मे लापरवाही बर्दाश्त नही होगी। नाली निर्माण में तुरंत तेजी लाई जाए और एसडीओ स्तर के अधिकारी रोज काम की प्रगति देखें, ताकि फंड खर्च हो पर काम नही लटके। यदि देरी हुई तो नगर पंचायत जनप्रतिनिधियों के साथ आमजन सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उन्होंने कहा है- डिप्टी सीएम का वादा, कलेक्टर की स्वीकृति, 1 करोड़ से ऊपर का फंड सब कुछ है। बस कार्य क्रियान्वयन एजेंसी व ठेकेदार में इच्छाशक्ति और गति नही है।

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