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धमतरी

दूरस्थ स्कूल खाली, सुगम स्कूलों में बहाली! शिक्षा विभाग पर गंभीर सवाल..

शिक्षा विभाग में निलंबन और बहाली के नाम पर चल रहा है बड़ा खेल, शासन के नियमों को ताक पर रख रहा जिला शिक्षा कार्यालय: मनोज साक्षी

दूरस्थ अंचलों के स्कूलों को खाली कर, चहेतों को सड़क किनारे के सुगम स्कूलों में दी जा रही है पदस्थापना।

महिला शिक्षिका के निलंबन मामले में भी गुपचुप तरीके से ‘सेटिंग’ का खेल सक्रिय, आदिवासी कांग्रेस ने दी आंदोलन की चेतावनी।

धमतरी/नगरी :-जिला शिक्षा कार्यालय धमतरी में इन दिनों नियमों को ताक पर रखकर कर्मचारियों के निलंबन और बहाली का एक बड़ा खेल बदस्तूर जारी है। इस गंभीर मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आदिवासी कांग्रेस के जिला अध्यक्ष श्री मनोज साक्षी ने जिला शिक्षा प्रशासन को आड़े हाथों लिया है।

श्री मनोज साक्षी ने आरोप लगाया है कि जिले के दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों के स्कूलों में पदस्थ शिक्षकों को जानबूझकर पहले निलंबित किया जाता है, और फिर विभागीय साठगांठ के जरिए बहाली के नाम पर उन्हें मुख्य सड़क के किनारे वाले सुगम (शहरी/अर्धशहरी) स्कूलों में उपकृत कर दिया जाता है। इस मलाईदार खेल के कारण अंदरूनी क्षेत्रों के गरीब और आदिवासी बच्चों का भविष्य अंधकार में डूब रहा है, क्योंकि वहां शिक्षकों की कमी लगातार बनी हुई है।

महिला शिक्षिका के मामले में नियमों की धज्जियां उड़ीं

जिला अध्यक्ष श्री मनोज साक्षी ने एक हालिया मामले का खुलासा करते हुए कहा कि…

बीती 11 जून को विभाग द्वारा एक महिला शिक्षिका को निलंबित किया गया। नियमतः पहले निलंबन का बकायदा आदेश जारी होना चाहिए था, लेकिन ऐसा न करके सीधे आरोप पत्र जारी कर दिया गया। अब विभागीय अधिकारियों द्वारा अंदर ही अंदर गुपचुप तरीके से उस महिला शिक्षिका को मुख्य सड़क के किनारे स्थित किसी सुगम स्कूल में पदस्थ करने की पूरी तैयारी कर ली गई है।

शासन के आदेशों को खुलेआम ठेंगा

श्री साक्षी ने याद दिलाया कि राज्य शासन का स्पष्ट और कड़ा निर्देश है कि किसी भी निलंबित कर्मचारी या शिक्षक की बहाली हमेशा दूरस्थ, ग्रामीण या अंदरूनी क्षेत्रों के स्कूलों में ही की जानी चाहिए। इसके बावजूद धमतरी जिला शिक्षा कार्यालय में शासन के इन जनहितैषी आदेशों को ठेंगा दिखाकर अपनी मनमर्जी चलाई जा रही है।

श्री मनोज साक्षी (जिला अध्यक्ष, आदिवासी कांग्रेस) ने साफ शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि शिक्षा विभाग में चल रहा यह ‘लेनदेन और सुविधा’ का खेल तुरंत बंद होना चाहिए। अगर दूरस्थ क्षेत्रों के स्कूलों से शिक्षकों को हटाकर सड़क किनारे के स्कूलों में उपकृत करने का यह सिलसिला नहीं थमा, तो आदिवासी कांग्रेस सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेगी, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की होगी।

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