धमतरी

ग्रामीण विकास को नई दिशा देने कलेक्टर की मैराथन बैठक…मॉडल गांव, जल संरक्षण और डिजिटल पंचायत पर विशेष फोकस…

धमतरी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों को आधुनिक सुविधाओं और सतत विकास से जोड़ने के उद्देश्य से कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने आज कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में धमतरी, कुरूद, मगरलोड एवं नगरी विकासखंड के पंचायत सचिवों की मैराथन बैठक लेकर ग्रामीण विकास की विभिन्न योजनाओं और संभावनाओं की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत गजेंद्र सिंह ठाकुर सहित सभी जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं पंचायत सचिव उपस्थित रहे।

कलेक्टर श्री मिश्रा ने कहा कि ग्रामीण विकास केवल योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि गांवों की वास्तविक आवश्यकताओं और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक एवं स्थायी विकास कार्य किए जाएं। उन्होंने गांवों में स्वच्छता, स्ट्रीट लाइट, चौपाटी निर्माण, सौंदर्यीकरण, वृक्षारोपण और सार्वजनिक परिसरों के व्यवस्थित विकास को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। साथ ही प्रत्येक पंचायत को अपने गांव के लिए बड़े एवं प्रभावी विकास कार्यों की रूपरेखा तैयार करने कहा।

बैठक में डिजिटल पंचायत की अवधारणा पर विशेष जोर देते हुए कलेक्टर ने निर्देश दिए कि प्रत्येक ग्राम पंचायत भवन में टीवी, डीटीएच कनेक्शन एवं इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराई जाए, ताकि ग्रामीण युवा प्रतियोगी परीक्षाओं, ऑनलाइन अध्ययन सामग्री और विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों से जुड़ सकें। उन्होंने पंचायत स्तर पर लाइब्रेरी स्थापित करने तथा अध्ययन के लिए अनुकूल वातावरण विकसित करने पर भी बल दिया।

कलेक्टर श्री मिश्रा ने पंचायत सचिवों को निर्देशित किया कि पंचायत कार्यालयों में सचिव का नाम एवं मोबाइल नंबर प्रदर्शित करने हेतु सूचना बोर्ड अनिवार्य रूप से लगाए जाएं, जिससे ग्रामीणों को आवश्यक जानकारी एवं सेवाएं आसानी से उपलब्ध हो सकें। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ पारदर्शी और सुगम तरीके से आमजन तक पहुंचना चाहिए।

बैठक में अटल व्यावसायिक परिसर निर्माण की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने उन ग्राम पंचायतों को शीघ्र प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए, जिन्होंने अब तक प्रस्ताव नहीं भेजे हैं। उन्होंने कहा कि जिले के चयनित गांवों को मॉडल गांव के रूप में विकसित करने की कार्ययोजना तैयार की जा रही है, जहां आधुनिक आधारभूत सुविधाओं, आजीविका संवर्धन, स्वच्छता एवं डिजिटल सेवाओं का समेकित विकास किया जाएगा।

जल संरक्षण को लेकर कलेक्टर का रुख बेहद गंभीर और संवेदनशील रहा। उन्होंने सभी पंचायत सचिवों को निर्देश दिए कि जल संकट प्रभावित क्षेत्रों में धान की खेती नहीं करने संबंधी प्रस्ताव ग्राम पंचायतों से पारित कराए जाएं। साथ ही वर्षा जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए शासकीय भवनों, पंचायत परिसरों, सामुदायिक भवनों एवं गरिमामयी आवास परिसरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्य रूप से विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता है और इसके लिए जनभागीदारी आधारित प्रयास किए जाने चाहिए।

कलेक्टर ने यह भी निर्देश दिए कि जिन गांवों में पर्याप्त जल उपलब्ध होने के बावजूद पेयजल आपूर्ति सुचारू नहीं है, वहां संबंधित एजेंसियों एवं ठेकेदारों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए राशि काटने की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए। उन्होंने पंचायत सचिवों से गांवों में आय के स्थायी स्रोत विकसित करने, स्थानीय बाजारों की पारदर्शी नीलामी कराने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में सक्रिय पहल करने कहा।

बैठक के दौरान कलेक्टर श्री मिश्रा ने गांव-गांव में संचालित विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए पंचायत सचिवों को जिम्मेदारी, पारदर्शिता और गंभीरता के साथ कार्य करने की हिदायत दी। उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास के माध्यम से ही जिले के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त होगा और प्रत्येक पंचायत को आत्मनिर्भर एवं सुविधायुक्त बनाने के लिए प्रशासन लगातार प्रयासरत है।

 

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