बिग न्यूज़ :-देश के पांच राज्यों ने बढ़ाई चिंता…छग भी फेहरिस्त में शामिल… क्या फिर लाॅक डाउन की तरफ बढ़ रहा देश ?


नया भारत डेस्क :-केरल, महाराष्ट्र, पंजाब, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में पिछले 7 दिन से नए केस बढ़ रहे हैं। देश के कुल एक्टिव केसों के 75% से ज्यादा मामले तो सिर्फ महाराष्ट्र (44,765) और केरल (59,817) में हैं।


बीते एक सप्ताह के भीतर भारत में कोरोना ने तीसरी बार रफ्तार पकड़ना शुरू कर दिया है। इससे पहले दीवाली के बाद जिस तेजी से कोरोना ने पांव पसारा था, किसी हाहाकार से कम नहीं था। बमुश्किल देश उस मुसीबत से उबर पाया था कि अब सामने होली का त्यौहार है और कोरोना ने फिर अपनी जद बढ़ाना शुरू कर दिया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने महाराष्ट्र और केरल के बाद मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और पंजाब के आंकड़ों को चिंताजनक बताया है।

विदित है कि देश में इस वक्त दूसरे दौर का वैक्सीनेशन जारी है। इसके बाद जल्द ही तीसरे दौर का वैक्सीनेशन शुरू किया जाएगा, लेकिन कोरोना संक्रमित लोगों के बढ़ते आंकड़ों ने सरकार को एक बार फिर सोचने पर मजबूर कर दिया है।

महाराष्ट्र में उद्धव सरकार ने दो टूक कह दिया है कि यदि नियमों का पालन नहीं होगा, और संक्रमण की रफ्तार इसी तरह बनी रहेगी, तो प्रदेश में लाॅक डाउन लगाना मजबूरी हो जाएगी। इसकी शुरुआत प्रदेश के कुछ जिलों में हो भी चुकी है।

इसी तरह मध्यप्रदेश में भी बढ़ते आंकड़ों को लेकर स्वास्थ्य मंत्री ने चिंता जाहिर की है, जिस पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने समीक्षा की बात भी कही है और संभावना व्यक्त की जा रही है कि यदि संक्रमण की रफ्तार में निरंतरता बरकरार रही, तो चेन तोड़ने के लिए लाॅक डाउन की ओर बढ़ा जा सकता है।


दक्षिण भारत में फैला महामारी का N440K वैरिएंट
देश में पाए गए कोरोना के 5 हजार से ज्यादा वैरिएंट्स पर हैदराबाद की सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (CSIR-CCMB)के वैज्ञानिकों ने रिसर्च किया है। इसमें पाया गया कि दक्षिण भारत में सबसे ज्यादा कोरोना का N440K वैरिएंट फैला है। हालांकि ये वैरिएंट कहां से और कब फैला इसकी जानकारी अभी नहीं हो पाई है। CCMB के डायरेक्टर राकेश मिश्र ने कहा, ‘इस वैरिएंट के फैलने के कारण और तरीकों को जानने के लिए इस पर नजर रखने की जरूरत है।’

खतरनाक वैरिएंट्स का भारत में नहीं दिखा असर
CCMB के डायरेक्टर प्रो. राकेश मिश्रा ने बताया कि दुनिया के कई देशों में खतरनाक बन चुके वैरिएंट्स का भारत में ज्यादा असर नहीं दिखा। इसका एक कारण यह भी हो सकता है कि हमारे यहां ज्यादा सीक्वेंसिंग नहीं की गई। हमें वायरस के ज्यादा जीनोम के सीक्वेंसिंग करने की जरूरत है, ताकि नए वैरिएंट्स की पहचान की जा सके।

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