छत्तीसगढ़

CG – सोन से उदयबंद जोंधरा से अमलडीहा तक रेत गाड़ियों से रोड़ बर्बाद ग्रामीण धूल डस्ट खांनें मज़बूर दुर्घटना और मौत के बीच 29 कों रेत घाट की जनसुनवाई भारी विरोध की आशंका पढ़े पूरी ख़बर

मस्तूरी//बिलासपुर जिले के मस्तूरी और यहाँ के जोंधरा गाँव और पास के गाँव कुकुर्दीकला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ हैँ विषय रेत घाट और सम्बंधित कुकुर्दीकला की जन सुनवाई यहाँ पहले हीं दों रेत घाट संचालित हैँ जिसके कारण प्रधानमंत्री मंत्री ग्राम सड़क योजना से बनी डामर रोड़ पूरी तरह से दलदल में तब्दील हो गई हैँ यहाँ रोजाना सैकड़ो बड़ी व हैवी गाड़ियां रेत लेकर दौड़ रही हैँ जिसले कारण ग्रामीणों कों ना सिर्फ सुन्दर व अच्छे रोड़ की सुविधा नहीं मिल पर रही बल्कि यहाँ रोजाना दुर्घटनाओं का भी आशंका बनी रहती हैँ।

मालूम हो की कुछ दिन पहले हीं चिस्दा में रेत से भरी बड़ी अनियंत्रित हाइवा नें 4 वर्षिय मासूम सूरज शुक्ला कों सड़क दुर्घटना में कुचल कर मार डाला और यह पहली घटना नहीं हैँ जिससे किसी इंसान की जान गई हो इससे पहले भी इन रेत लोड गाड़ियों नें कई सड़क दुर्घटनाओं से लोंगो की जान ली हैँ जिसके कारण लोंगो का कहना हैँ कि किसी भी स्थिति में क्षेत्र में तीसरा रेत घाट नहीं खुलना चाहिए।

लोंगो से छिपछिपा के जनसुनवाई का प्रयास..

क्षेत्र के दर्जनों गाँव के ग्रामीण आरोप लगा रहें हैँ कि जो रेत घाट कुकुर्दीकला में जनता की राय सुमारी के लिए जनसुनवाई रखा गया हैँ उसको जनता से हीं छिपाया जा रहा हैँ आखिर इन रेत घाटों कों पाने वाले लोंग और इनके प्रबंधन में लगे लोंग क्यों इसमें पारदर्शिता नहीं चाहते क्यों जन सुनवाई कों छिप छीपा कर करवाने का प्रयास किया जा रहा हैँ ज़ब यहाँ जनता की मर्जी सुनने अधिकारी पहुंचने वाले हैँ तो जनता कों यहाँ से दूर रखने का प्रयास क्यों।

ज्ञात हो की जोंधरा क्षेत्र में पहले से रोड़ कों लेकर लगातार प्रदर्शन होता रहा हैँ बात सोन बसंतपुर मकुन्दपुर से उदयबंद अमलडीहा पहुंच मार्ग हो या जोंधरा से गोपालपुर परसोड़ी छोटे कुकुर्दी बड़े कुकुर्दीकला से अमलडीहा पहुंचने की बात हो दोनों तरफ से रोड़ का खस्ता हाल हैँ और इसको लेकर ग्रामीण लगातार प्रशासन के खिलाफ पी डब्लू डी के खिलाफ मुखर होते रहें हैँ जिससे सरकार की छवि भी जनता के बीच धूमिल हो रही हैँ फिर भी देखना होगा तीसरा रेत घाट के लिए जनसुनवाई कितना सफल होता हैँ। और जान कर हैरानी होंगी की यह रेत घाट भी गोपालपुर परसोड़ी और छोटे कुकुर्दी वाली रोड़ से हीं होकर गुजरेगी जो पहले से बर्बाद हो चूकि हैँ मतलब चारों तरफ से जनता इससे परेशान होनें वाला हैँ देखना होगा इन गाँवों की जनता इसको कितना सपोर्ट करती हैँ ज़ब वो रोड़ और डस्ट की समस्या से पहले से रोज रात दिन परेशान हैँ।

धूल डस्ट और दुर्घटना..

जानने योग्य बात हैँ की यहाँ रोजाना बड़ी छोटी रेत लोड गाड़ियां पास हो रही हैँ पर यहाँ का रेत घाट चलाने वाले ना डस्ट कों दूर करने रोड़ में पानी डलवाते ना गढ़ढो कों कभी इनकें द्वारा भरने का प्रयास होता बल्कि इनकी रेत लोड गाड़ियों से सड़क दुर्घटना में बच्चे बुजुर्ग मर रहें हैँ इसका ताज़ा उदाहरण कुछ दिनों पहले हीं देखने मिला जब चिस्दा में एक 4 वर्षिय मासूम रेत लोड गाड़ी में दब कर मारा गया।

जनप्रतिनिधि खामोश..

अजीब बात तो ये हैँ की जो जनप्रतिनिधि गला फाड़ फाड़ कर रोड़ ख़राब होनें की बात कहकर हल्ला बोल रहें थे प्रदर्शन कर रहें थे वो सब आज चुप्पी साधे बैठे हैँ अब 29 अप्रैल कों देखना होगा इनकों क्षेत्र की और क्षेत्र की सड़क की और उससे जूझ रहें ग्रामीणों की कितनी चिंता हैँ।

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