CG – पाली सीएचसी मरीजों को प्रतिबंधित पॉलीथिन से बांट रहे खाना मीनू के विपरीत बन रहा भोजन जानें पूरा मामला पढ़े पूरी ख़बर
0 सप्ताह में एकाक दिन दी जाती है हरी सब्जी, रोटी व अंडा.
कोरबा//डॉक्टरों का मानना है कि पॉलीथिन में पैक खाना स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। पॉलीथिन में पॉलीएथिलीन पॉलीविनाइल क्लोराइड और पॉलीस्टाइरीन होता है जो कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। वहीं उच्चतम न्यायालय ने भी सरकारी संस्थाओं में खाने- पीने की सामाग्री को पॉलीथिन में देना पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया है। लेकिन सरकारी अस्पताल में ही भर्ती मरीजों को प्रतिबंधित पॉलीथिन में भोजन देकर गंभीर बीमारी बांटने का काम किया जा रहा है। इसके अलावा मरीजों को पौष्टिक खाना मुहैया कराने सरकार द्वारा जारी मीनू के विपरीत नाश्ता और रूखा- सूखा खाना परोस रहे है। जिसे कई मरीज मजबूरी में खा रहे है तो कइयों ने अस्पताल का खाना खाने से इंकार कर दिया है।
जिले के पाली ब्लाक मुख्यालय में संचालित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जहां भर्ती मरीजों को पॉलीथिन में भरकर खाना दिया जा रहा है और जिस खाने की क्वालिटी बेहद खराब बताई जा रही है। यहां मरीजों ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि जो भोजन उन्हें खाने को दिया जा रहा है, उसकी क्वालिटी ऐसी की जानवर भी ना खाए। यहां से भोजन की जो तस्वीरें सामने आई है, उससे इस स्वास्थ्य केंद्र में बंटने वाले भोजन की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए है और कहीं न कहीं मनमानी व घोर लापरवाही उजागर करने वाली है। अस्पताल में हर दिन दिए जाने वाले भोजन में चांवल व दाल कम पाली ज्यादा और आलू के साथ मटर अथवा सोयाबीन सब्जी होती है, सप्ताह में एकाक दिन हरी सब्जी, रोटी, अंडा खाने को मिल जाए तो किस्मत मानी जाती है। लेकिन मजबूरी में भर्ती मरीज इस खाने को खाते है। खाने को लेकर वे कहते है कि ऐसा खाना खाने से तो जानवर भी मुह फेर ले। बता दें कि इस अस्पताल में हर दिन कई सारे मरीज आते है, अधिकांश मरीज दूर- दराज के ग्रामीण क्षेत्र होते है, जो बहुत गरीब होते है। इनके परिवार वालों के पास अपने मरीज के लिए खाना लाने की या तो व्यवस्था नही रहती या फिर आर्थिक तंगी भी आड़े आ जाती है। ऐसे में इस तरह के खराब गुणवत्ता वाले खाने से मरीज खासे परेशान रहते है। शासन की मंशा है कि मरीजों को बेहतर इलाज के साथ पौष्टिक भोजन भी मिल सके, ताकि वे समय मे स्वस्थ हो सके। इसके लिए एक अलग किचन भी चलती है और मीनू के हिसाब से अलग- अलग नाश्ता व खाना दिया जाना सुनिश्चित किया गया है। जिसमें पूरा आहार लेने वाले रोगियों को सप्ताहांत के हिसाब से सुबह 8 बजे सोमवार- 2 इडली व सांभर, मंगलवार- दलिया, बुधवार- पोहा, गुरुवार- उपमा, शुक्रवार- इडली व सांभर, शनिवार- पोहा व रविवार- उपमा एवं प्रतिदिन मौसमी फल 100 ग्राम, दूध 200 ग्राम, 2 उबला अंडा शामिल है। वहीं दोपहर 12 बजे के भोजन में चांवल 150 ग्राम, दाल 30 ग्राम, 2 रोटी एवं हरी सब्जी तथा रात 7 बजे के भोजन में दोपहर की भांति चांवल, दाल, रोटी, हरी सब्जी व रात 9 बजे 200 एमएल दूध दिया जाना है। वहीं बच्चों के आहार में सुबह के नाश्ते में प्रतिदिन के हिसाब से इडली- सांभर, दलिया, पोहा, उपमा, मौसमी फल और दूध 200 एमएल, दोपहर 12 बजे चांवल 200 ग्राम, दाल 20 ग्राम, 2 रोटी, हरी सब्जी, रात्रि 7 बजे पुनः चांवल, दाल, रोटी, हरी सब्जी एवं रात 8 बजे 200 एमएल दूध दिया जाना शासन के डाइट में शामिल है। जिसमे मौसमी फल व मौसमी सब्जी निर्देशानुसार तथा उपलब्धता के अनुसार दिया जाना, जबकि सब्जी में टमाटर, लहसुन, अदरक, प्याज, मीठा नीम व हरा धनिया डालना अनिवार्य किया गया है। लेकिन शासन से तय मीनू को दरकिनार कर समूह द्वारा मरीजो को पतली दाल, चांवल, आलू के साथ मटर या सोयाबीन की सब्जी परोसकर औपचारिकता निभाई जा रही है। जबकि नियम यह है कि किचन में बनने वाले खाने की गुणवत्ता परखने के बाद ही उसे मरीजों को दिया जाना है। यह जिम्मेदारी अस्पताल प्रबंधन की है, लेकिन पोषणहीन घटिया खाना खिलाकर उनकी सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है, जो यहां मरीजों को भा नही रह है। दूसरी ओर प्रबंधन ने स्टील की थालियां समूह को उपलब्ध कराया है और मीनू के अनुसार गुणवत्तापरख भोजन उपलब्ध कराने के निर्देश समूह को दिए तो है, लेकिन फिर भी थाली किचन में सजाकर रखी हुई है और मरीज व स्वजन घटिया खाना पॉलीथिन या घर से लाए बर्तनों में लेकर खाने को मजबूर है। मरीजों को मीनू के आधार पर भोजन नही मिलने और पॉलीथिन में भरकर भोजन देने के मामले में जिला प्रशासन को स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई की आवश्यकता है, ताकि मरीजो के भोजन वितरण में किये जा रहे गड़बड़- घोटाले पर सुधार हो सके।