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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रयास से छत्तीसगढ़ मखाना बोर्ड में शामिल…

रायपुर: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रयासों से प्रदेश में मखाना की खेती को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ को मखाना बोर्ड में शामिल किया गया है। इस ऐतिहासिक फैसले से राज्य में मखाना की खेती कर रहे किसानों को नई दिशा और मजबूती मिलेगी। गौरतलब है कि हाल ही में धमतरी जिले में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने छत्तीसगढ़ में मखाना की खेती के प्रयासों को देखते हुए मखाना बोर्ड के गठन की घोषणा की है। राज्य में हो रहे मखाने के उत्कृष्ट उत्पादन पर केन्द्रीय मंत्री श्री चौहान ने प्रसन्नता भी जाहिर की। उन्होंने कहा कि मखाना बोर्ड के माध्यम से किसानों को वैज्ञानिक खेती, जल प्रबंधन, प्रसंस्करण तकनीक और बाजार तक पहुच में सहायता दी जाएगी। इसी तारतम्य में कृषि उत्पादन आयुक्त एवं सचिव श्रीमती शहला निगार की अध्यक्षता में आज मिशन फार इंटिग्रेटेड डेव्हलपमेंट आफ हार्टिकल्चर अंतर्गत राज्य स्तरीय कार्यकारी समिति की बैठक सम्पन्न हुई।

प्रदेश में मखाना की खेती को मिलेगा प्रोत्साहन

बैठक में संचालक उद्यानिकी श्री लोकेश कुमार ने बताया कि भारत सरकार द्वारा वर्ष 2025-26 से सेंट्रल सेक्टर स्कीम फॉर डेवलपमेंट ऑफ़ मखाना प्रांरभ किया गया है। इस योजना में शत प्रतिशत केन्द्रीय अनुदान दिये जाने का प्रावधान है। योजना के तहत वर्ष 2025-26 में आगामी 4 माह हेतु 180 लाख रूपए की स्वीकृति प्रदान की गयी है। योजना के तहत तालाब में मखाना की खेती करने वाले किसानों को राशि 1.79 लाख रूपए की इकाई लागत के विरुद्ध 40 प्रतिशत की राशि 72000 रूपए का अनुदान देने का प्रावधान है। इसी तरह स्वयं के खेत में मखाना उत्पादन करने वाले कृषकों को राशि 1.32 लाख रूपए की इकाई लागत के विरुद्ध 40 प्रतिशत की राशि 53000 रूपए का अनुदान देने का प्रावधान है। साथ ही नए तालाब के निर्माण पर राशि 7.00 लाख की इकाई लागत के विरुद्ध 40 प्रतिशत राशि .2.80 लाख का अनुदान देने का प्रावधान है।

मखाना के प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन हेतु माइक्रो लेवल मखाना प्रसंस्करण इकाई के स्थापना बाबत इकाई लागत राशि 10 लाख रूपए पर 35 प्रतिशत का अनुदान दिए जाने का प्रावधान किया गया है। इसी तरह एफपीओ हेतु स्माल लेवल मखाना प्रसंस्करण इकाई के स्थापना बाबत इकाई लागत राशि 39 लाख रूपए पर 50 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान है तथा निजी क्षेत्र हेतु इकाई लागत राशि 39 लाख रूपए पर 35 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान है। लार्ज लेवल मखाना प्रसंस्करण इकाई के स्थापना बाबत इकाई लागत राशि 07 करोड़ रूप्ए पर 35 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान है।

मखाना की खेती को बढ़ावा देने हेतु योजना के तहत किसानों को प्रशिक्षण देने के साथ ही एक्पोजर विजिट भी कराया जा रहा है। मखाना खेती को प्रेरित करने हेतु इंदिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय तथा महात्मा गाँधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय द्वारा मखाने की उत्कृष्ट खेती का प्रदर्शन भी किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का स्वामी विवेकानंद विमानतल पर किया आत्मीय स्वागत…

रायपुर:  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह का स्वामी विवेकानंद विमानतल पर आत्मीय स्वागत किया।

जनविश्वास से जनकल्याण तक – शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से समग्र विकास की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है छत्तीसगढ़ – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय…

रायपुर: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज वर्तमान सरकार के 2 वर्ष पूर्ण होने पर न्यू सर्किट हाउस सिविल लाइन्स में आयोजित प्रेसवार्ता में राज्य सरकार के दो वर्ष के कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत करते हुए कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और उनकी गारंटियों पर विश्वास जताते हुए छत्तीसगढ़ की जनता ने जो सेवा का अवसर दिया, उसे सरकार ने पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ निभाया है। दो वर्षों में जनता का भरोसा और अधिक सशक्त हुआ है।

शासन के 2 वर्ष : जनविश्वास से जनकल्याण तक

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सरकार के गठन के दूसरे ही दिन 18 लाख से अधिक जरूरतमंद परिवारों को प्रधानमंत्री आवास की स्वीकृति दी गई। किसानों के लिए 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से तथा 21 क्विंटल प्रति एकड़ के मान से धान खरीदी जारी है, जिससे खेती को लाभ का व्यवसाय बनाया गया है।

शासन के 2 वर्ष : जनविश्वास से जनकल्याण तक

उन्होंने कहा कि महिला सशक्तीकरण के लिए महतारी वंदन योजना एक ऐतिहासिक पहल बनी। लगभग 70 लाख माताओं-बहनों को प्रतिमाह 1000 रुपये की सहायता दी जा रही है। डीबीटी के माध्यम से अब तक 22 किस्तों में 14 हजार 306 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की जा चुकी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि  जनजातीय समाज और वनोपज संग्राहकों के हित में तेंदूपत्ता पारिश्रमिक 4000 से बढ़ाकर 5500 रुपये किया गया है। 13 लाख परिवारों को इसका लाभ मिल रहा है। चरणपादुका योजना पुनः प्रारंभ की गई है तथा 73 लाख गरीब परिवारों को मुफ्त राशन दिया जा रहा है।

शासन के 2 वर्ष : जनविश्वास से जनकल्याण तक

उन्होंने कहा कि युवाओं के लिए पारदर्शी भर्ती व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। पीएससी घोटाले की जांच सीबीआई को सौंपी गई, प्रतियोगी परीक्षाओं का वार्षिक कैलेंडर लागू हुआ और आयु सीमा में छूट दी गई। 32 हजार से अधिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि माओवाद के विरुद्ध निर्णायक लड़ाई लड़ी जा रही है। पिछले दो वर्षों में 505 नक्सली न्यूट्रलाइज, 2386 ने आत्मसमर्पण किया और 1901 गिरफ्तार हुए। सुरक्षा के साथ-साथ विकास के जरिए बस्तर को मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि  नियद नेल्ला नार योजना के तहत सुदूर गांवों में राशन, आधार, आयुष्मान कार्ड, आवास, बिजली और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई गई हैं। बस्तर में स्कूल पुनः शुरू हुए हैं और इको-टूरिज्म, बस्तर पंडुम तथा बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन नई पहचान बना रहे हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के संरक्षण हेतु श्रीरामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना एवं मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना संचालित की जा रही है। राजिम कुंभ कल्प, बस्तर दशहरा और शक्ति पीठों के विकास को नई भव्यता दी गई है।

उन्होंने कहा कि सुशासन को सुदृढ़ करने के लिए 400 से अधिक सुधार किए गए हैं। सुशासन एवं अभिसरण विभाग, अटल मॉनिटरिंग पोर्टल, ई-ऑफिस और डिजिटल गवर्नेंस के माध्यम से योजनाओं की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यापार और उद्योग के लिए नई औद्योगिक नीति लागू की गई है। 231 प्रावधानों को अपराधमुक्त किया गया, जनविश्वास अधिनियम लागू हुआ और अब तक 7.83 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। लॉजिस्टिक पार्क, एयर कार्गो सुविधा और औद्योगिक पार्क स्थापित किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि  जीएसटी संग्रह में 15 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 23,454 करोड़ रुपये की प्राप्ति हुई है। ई-वे बिल सीमा बढ़ाने, 24×7 प्रतिष्ठान संचालन और जिलों में जीएसटी कार्यालय खोलने से व्यापारियों को बड़ी राहत मिली है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में युक्तियुक्तकरण से शिक्षक संकट दूर किया गया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू हुई, स्मार्ट क्लास, विद्या समीक्षा केंद्र, मेडिकल कॉलेजों का विस्तार और हिंदी में एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू की गई है।

उन्होंने कहा कि युवाओं के कौशल विकास के लिए मॉडल आईटीआई, नवा रायपुर को एजुकेशन सिटी के रूप में विकसित करना, अत्याधुनिक लाइब्रेरी, खेलो इंडिया सेंटर और खेल प्रोत्साहन योजनाएं लागू की गई हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि डबल इंजन की सरकार के सहयोग से छत्तीसगढ़ में सड़क, रेल, एक्सप्रेसवे, औद्योगिक और सामाजिक अधोसंरचना का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। सरकार का संकल्प है कि विकास, सुरक्षा और सुशासन के साथ छत्तीसगढ़ को देश के अग्रणी राज्यों की पंक्ति में स्थापित किया जाए।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बताया कि छत्तीसगढ़ में अधोसंरचना विकास को अभूतपूर्व गति मिली है। प्रदेश में 47 हजार करोड़ रुपये से अधिक की रेल परियोजनाओं पर कार्य प्रगति पर है तथा खरसिया–परमालकसा रेललाइन को स्वीकृति मिल चुकी है, जिससे राज्य के प्रमुख इंडस्ट्रियल कॉरिडोर आपस में जुड़ेंगे। विशाखापट्टनम और रांची से जोड़ने वाले एक्सप्रेस-वे पर काम तेज़ी से चल रहा है। साथ ही राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास हेतु 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक की 37 परियोजनाएं प्रगतिशील हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में एयर कनेक्टिविटी का भी व्यापक विस्तार हुआ है—अंबिकापुर एयरपोर्ट का शुभारंभ माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा किया गया, तथा बिलासपुर, जगदलपुर और अंबिकापुर से नई उड़ानें शुरू हो चुकी हैं। जशपुर और बलरामपुर हवाई पट्टी के विस्तार हेतु बजट में प्रावधान किया गया है। अटल जी के छत्तीसगढ़ निर्माण के विजन के अनुरूप सरकार संस्कृति-संवर्धन पर भी विशेष ध्यान दे रही है—लोक कलाकारों के कार्यक्रमों की संख्या बढ़ाई गई है, कलाकारों की पेंशन बढ़ाई गई है तथा चित्रोत्पला फिल्म सिटी के निर्माण की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जनहित में 200 यूनिट तक बिजली उपभोग पर सब्सिडी दी जा रही है तथा सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना में केंद्र के साथ राज्य सरकार की सब्सिडी भी मिल रही है। शहरी मध्यम व निम्न वर्ग को किफायती भूखंड उपलब्ध कराने छत्तीसगढ़ किफायती जन आवास नियम बनाया गया है। जल जीवन मिशन के तहत 40 लाख से अधिक परिवारों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा चुका है और वर्ष 2047 तक विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य हेतु अंजोर विजन दस्तावेज तैयार किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास की इस गति का लाभ हर नागरिक के जीवन में दिख रहा है; उन्होंने मीडिया के सहयोग के लिए आभार जताते हुए जनता को भरोसा दिलाया कि सरकार पूरी निष्ठा से छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा करेगी और सभी से प्रदेश की सुख-समृद्धि हेतु एकजुट योगदान का आह्वान किया।

कबीरधाम में चिकित्सा सुविधाओं के एक नए युग का सूत्रपात: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मेडिकल कॉलेज निर्माण स्थल पर शिला-स्थापना कर जिले को दी ऐतिहासिक सौगात…..

रायपुर: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज कबीरधाम जिले के नवीन शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय के निर्माण स्थल पर शिला-स्थापना कर जिले को एक ऐतिहासिक सौगात दी। इसके साथ ही जिले में चिकित्सा सुविधाओं के एक नए युग का सूत्रपात हुआ। कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह एवं उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा विशेष रूप से उपस्थित थे।

कबीरधाम जिला आज विकास के नए युग में कर रहा प्रवेश – मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

शिला-स्थापना के साथ ही कबीरधाम जिले के स्वास्थ्य मानचित्र में विकास का एक नया अध्याय जुड़ गया है। मेडिकल कॉलेज की स्थापना से जिले का स्वास्थ्य ढांचा और अधिक सुदृढ़ होगा। विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ेगी, आधुनिक चिकित्सा सुविधाएँ विकसित होंगी तथा आम जनता को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ स्थानीय स्तर पर ही सुलभ हो सकेंगी।

कबीरधाम जिला आज विकास के नए युग में कर रहा प्रवेश – मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा की मांग पर कवर्धा में श्री पंचमुखी बूढ़ा महादेव रिवर फ्रंट निर्माण तथा रवेली में महाविद्यालय की घोषणा की।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कबीरधाम जिले में नए शासकीय मेडिकल कॉलेज भवन की शिला-स्थापना को ऐतिहासिक बताते हुए जिलेवासियों को बधाई दी। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बीते 25 वर्षों में छत्तीसगढ़ ने विकास के नए आयाम स्थापित किए हैं। राज्य गठन के बाद सड़क, बिजली, पानी और शिक्षा जैसी मूलभूत व्यवस्थाओं को सुदृढ़ किया गया।

कबीरधाम जिला आज विकास के नए युग में कर रहा प्रवेश – मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अपने रायपुर प्रवास के दौरान मेडिकल कॉलेज भवन का भूमि-पूजन किया था और आज उसी क्रम में इसकी शिला-स्थापना संपन्न हुई है।
लंबे समय से लंबित इस मांग के पूर्ण होने से लोगों को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध होंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दो वर्षों में कवर्धा जिले के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूती मिली है। सीटी स्कैन और क्रिटिकल केयर यूनिट जैसी सुविधाओं की स्थापना से इलाज और अधिक सुलभ हुआ है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार जन-जन तक स्वास्थ्य सुविधाओं की सुलभ पहुँच सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि आज प्रदेश सरकार के दो वर्ष पूर्ण हो रहे हैं तथा छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में राज्यभर में रजत जयंती महोत्सव मनाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 1 नवंबर को प्रदेश स्थापना दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी रायपुर आए थे, जहाँ उन्होंने नए विधानसभा भवन एवं ट्राइबल म्यूजियम का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि यह संग्रहालय जनजातीय शौर्य और महापुरुषों के बलिदान की स्मृतियों से समृद्ध है, जिसे सभी को अवश्य देखना चाहिए।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी की गारंटी के अनुरूप सभी कार्य समयबद्ध रूप से पूरे किए जा रहे हैं। किसानों के हितों की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि लगातार तीसरे वर्ष प्रति एकड़ 21 क्विंटल के मान से धान की खरीदी 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने रामलला दर्शन योजना तथा तेंदूपत्ता की दर 4 हजार रुपये से बढ़ाकर 5500 रुपये प्रति मानक बोरा किए जाने जैसे निर्णयों को किसानों और वनांचल के हित में उठाए गए महत्वपूर्ण कदम बताया।

उन्होंने कहा कि कवर्धा क्षेत्र में बड़ी संख्या में बैगा एवं अन्य जनजातीय समाज निवास करते हैं, जिनके सर्वांगीण विकास के लिए केंद्र सरकार द्वारा पीएम जनमन योजना प्रारंभ की गई है। यह योजना विशेष पिछड़ी जनजातियों के विकास के लिए समर्पित है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि स्वदेश दर्शन योजना के तहत भोरमदेव विकास के लिए 146 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली है, जिससे यह क्षेत्र राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान प्राप्त करेगा।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने शिला-स्थापना समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि आज का दिन कवर्धा के इतिहास में अभूतपूर्व और गौरवपूर्ण है। यह ऐसा क्षण है, जो स्वर्णाक्षरों में दर्ज रहेगा। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद कवर्धा जिले के गठन से लेकर अब तक अनेक महत्वपूर्ण कार्य हुए हैं, किंतु मेडिकल कॉलेज की स्थापना जैसा ऐतिहासिक दिन जीवन में एक बार ही आता है।

डॉ. सिंह ने कहा कि प्रदेश में किसानों का सम्मान सर्वोपरि है। महतारी वंदन योजना के अंतर्गत माताओं-बहनों को प्रतिमाह 1 हजार रुपये की राशि सीधे उनके खातों में दी जा रही है, जिससे परिवारों को आर्थिक मजबूती मिली है। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री साय की दूरदर्शिता की सराहना करते हुए कहा कि कवर्धा को मिली विकास योजनाओं से जिले की दिशा और दशा तेजी से बदली है।

उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि कवर्धा जिले में मेडिकल कॉलेज की स्थापना हम सभी के लिए ऐतिहासिक सौगात है, जो जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं के नए आयाम खोलेगी। उन्होंने बताया कि जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए तेजी से कार्य किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि 4.5 करोड़ रुपये की लागत से सीटी स्कैन सेवा प्रारंभ की गई है और अब तक 814 सीटी स्कैन किए जा चुके हैं। जिला अस्पताल की क्षमता 100 बिस्तरों से बढ़ाकर 220 बिस्तर कर दी गई है तथा 50 क्रिटिकल केयर बेड स्थापित किए गए हैं। पिपरिया और बोड़ला में सोनोग्राफी मशीनें लगाई गई हैं।

उप मुख्यमंत्री ने बताया कि नया मेडिकल कॉलेज 40 एकड़ परिसर में निर्मित किया जाएगा तथा 50 सीटों के साथ मेडिकल कॉलेज की पढ़ाई प्रारंभ करने की तैयारी पूरी कर ली गई है। मेडिकल कॉलेज तक सुगम पहुँच के लिए घोटिया मार्ग एवं गौरव पथ मार्ग का निर्माण किया जा रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि जिले में जगमड़वा जलाशय, बड़ौदा खुर्द एवं रामपुर बरेंडा जलाशय सहित कई महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। विद्युत विभाग की 3.30 करोड़ रुपये की परियोजना के अंतर्गत 2 हजार से अधिक ट्रांसफार्मर लगाए जा रहे हैं तथा 8 नए सब-स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं।

उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने बताया कि पीडब्ल्यूडी की 24 सड़कों, मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 28 सड़कों तथा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत 76 सड़कों को स्वीकृति मिली है।

उन्होंने कहा कि सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट बैठक में 18 लाख आवास स्वीकृत किए गए, जिनमें से अकेले कवर्धा जिले में 50 हजार से अधिक आवास शामिल हैं। जिले के सरकारी स्कूलों में 50 स्मार्ट क्लास स्थापित की गई हैं तथा रेंगाखार और पिपरिया में एंबुलेंस सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि कवर्धा क्षेत्र के लिए आज का दिन अत्यंत विशेष है। वर्षों पुरानी मांग आज पूरी हुई है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के समय केवल एक मेडिकल कॉलेज था, जिसे बढ़ाकर 10 मेडिकल कॉलेज तक पहुँचाने का श्रेय पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को जाता है।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि वर्तमान मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस विकास यात्रा को आगे बढ़ाते हुए पाँच अतिरिक्त मेडिकल कॉलेजों की स्वीकृति दी है। कवर्धा वनांचल और जनजातीय बहुल क्षेत्र है, जहाँ मेडिकल कॉलेज का खुलना क्षेत्र के लिए वरदान सिद्ध होगा।

इस अवसर पर सांसद श्री संतोष पाण्डेय एवं पंडरिया विधायक श्रीमती भावना बोहरा ने भी कबीरधाम मेडिकल कॉलेज को जिले के लिए अभूतपूर्व सौगात बताते हुए क्षेत्रवासियों को बधाई दी।

कॉलेज के लिए 40 एकड़ भूमि आबंटित, 306 करोड़ रुपये से अधिक की राशि को मिली स्वीकृति

शासन द्वारा मेडिकल कॉलेज निर्माण हेतु ग्राम घोठिया में 40 एकड़ भूमि का आबंटन किया गया है। इस परियोजना के लिए 306 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है। यह मेडिकल कॉलेज अत्याधुनिक तकनीकी सुविधाओं से युक्त होगा तथा राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा।

जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं का होगा विस्तार

मेडिकल कॉलेज की स्थापना के पश्चात कबीरधाम जिले की स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक सुधार देखने को मिलेगा। आधुनिक और उन्नत स्वास्थ्य सेवाएँ स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध होंगी। गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए दूरस्थ शहरों पर निर्भरता कम होगी तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं तक सहज पहुँच सुनिश्चित होगी।

मुख्यमंत्री ने स्व सहायता समूहों को 7 करोड़ 78 लाख रुपये की राशि का चेक वितरण किया

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने स्व सहायता समूहों को कुल 7 करोड़ 78 लाख रुपये की राशि का चेक वितरण किया। इसमें लखपति दीदी योजना अंतर्गत 1454 स्व सहायता समूहों को 7 करोड़ 63 लाख रुपये तथा 97 स्व सहायता समूहों को 14 लाख 55 हजार रुपये की राशि प्रदान की गई।

राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन कार्यक्रम (NQAP) के अंतर्गत ‘सर्विस प्रोवाइडर-cum-इंटरनल असेसर’ हेतु राज्य स्तरीय प्रशिक्षण सम्पन्न 

 

 

रायपुर |

छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग द्वारा NHSRC व यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से 10 से 12 दिसम्बर 2025 तक राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन कार्यक्रम (National Quality Assurance Program – NQAP) के तहत सर्विस प्रोवाइडर-cum-इंटरनल असेसर का राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य स्वास्थ्य संस्थानों में गुणवत्ता सुधार को गति देना, सेवाओं की विश्वसनीयता को सुदृढ़ करना तथा राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप आंतरिक मूल्यांकन क्षमता विकसित करना था। इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण में कुल 80 प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया।

 

प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ. सुरेंद्र पामभोई, संचालक SIHFW, डॉ. संजीव मेश्राम उप संचालक – क्वालिटी सेल, डॉ. गजेन्द्र सिंह, स्वास्थ्य विशेषज्ञ यूनिसेफ छत्तीसगढ़ की उपस्थिति में किया गया।

उद्घाटन सत्र में डॉ. डॉ. पामभोई ने कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों में गुणवत्ता आश्वासन अब वैकल्पिक नहीं, बल्कि एक अनिवार्य और संरचनात्मक आवश्यकता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि प्रशिक्षित इंटरनल असेसर ही जिलों व संस्थानों को NQAS प्रमाणन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा सकते हैं।

डॉ. मेश्राम ने राज्य की गुणवत्ता सुधार रणनीतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आंतरिक मूल्यांकन प्रणाली को मजबूत किए बिना गुणवत्ता सुधार के लक्ष्यों को हासिल नहीं किया जा सकता।

कार्यक्रम का तकनीकी नेतृत्व डॉ. गजेन्द्र सिंह, यूनिसेफ छत्तीसगढ़ द्वारा प्रदान किया गया, जिन्होंने प्रशिक्षण के सभी सत्रों को गुणवत्ता-केंद्रित, व्यावहारिक और संस्थागत अपेक्षाओं के अनुरूप दिशा प्रदान की। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली संसाधन केंद्र (NHSRC), नई दिल्ली से सलाहकार डॉ रतन शेखावत स्वयं प्रशिक्षण के दौरान मौजूद रहीं और उन्होंने राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों, मूल्यांकन तकनीकों तथा स्कोरिंग प्रणाली पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया।

प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानकों, आठ विचारणीय विषयों (Areas of Concern), चेकलिस्ट आधारित मूल्यांकन, स्कोरिंग प्रणाली, गैप-एनालिसिस, सुधारात्मक कार्ययोजना (CAPA) निर्माण, क्लिनिकल स्टैंडर्ड्स, सपोर्ट सेवाएँ, पेशेंट राइट्स, संक्रमण नियंत्रण, बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन, टीम-प्रबंधन एवं रिकॉर्ड-कीपिंग के महत्वपूर्ण पहलुओं पर गहन तकनीकी जानकारी प्रदान की गई।

डॉ. गजेन्द्र सिंह, NHSRC विशेषज्ञों एवं डॉ विक्रम शर्मा द्वारा संचालित सत्रों ने प्रतिभागियों को संस्थागत गुणवत्ता सुधार की प्रक्रियाओं को गहराई से समझने तथा उन्हें व्यवहार में लागू करने की क्षमता विकसित की।

 

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने फील्ड-सिमुलेशन अभ्यास, मॉक इंटरनल असेसमेंट, स्कोरिंग व गैप-एनालिसिस, केस-स्टडी आधारित चर्चा तथा मॉक-ऑडिट के माध्यम से वास्तविक परिस्थितियों में गुणवत्ता मूल्यांकन का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया।

विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि गुणवत्ता सुधार एक सतत प्रक्रिया है, जो डेटा-आधारित निर्णय, नियमित निगरानी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ही संभव है।

 

सत्रों में यह संदेश प्रमुखता से उभरकर सामने आया कि “गुणवत्ता केवल दस्तावेज़ों का संकलन नहीं, बल्कि रोगी-केंद्रित सेवा की अटूट प्रतिबद्धता है” तथा “कुशल इंटरनल असेसर ही संस्थागत गुणवत्ता सुधार की वास्तविक रीढ़ हैं।”

 

राज्य के विभिन्न जिलों से आए चिकित्सा अधिकारियों, स्टाफ नर्सों, जिला गुणवत्ता प्रबंधकों, आरएमएनसीएच सलाहकारों तथा सेवा-प्रदाता कर्मियों ने प्रशिक्षण में अत्यंत उत्साहपूर्वक भाग लिया।

समापन सत्र में प्रतिभागियों ने अपने-अपने स्वास्थ्य संस्थानों में नियमित इंटरनल असेसमेंट सुनिश्चित करने, गुणवत्ता सुधार के लिए ठोस कार्ययोजनाएँ तैयार करने तथा NQAS प्रमाणन प्राप्त करने के लिए संगठित प्रयास करने का संकल्प लिया।

 

प्रशिक्षण को सफल बनाने में यूनिसेफ, NHSRC नई दिल्ली की वरिष्ठ सलाहकार, राज्य गुणवत्ता डिवीजन तथा प्रशिक्षण से जुड़े सभी विषय-विशेषज्ञों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

 

यह तीन दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण छत्तीसगढ़ को अधिक सुरक्षित, गुणवत्ता-उन्मुख और मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य व्यवस्था की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम प्रदान करता है।

Uttarakhand News: प्रदेश में बनने वाले सभी रोप-वे प्रस्तावों को मिलेगी रोप-वे विकास समिति से स्वीकृति, इसी महीने आयोजित होगी पहली बोर्ड बैठक…

उत्तराखंड : मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में शुक्रवार को सचिवालय में प्रदेश में रोप-वे विकास के लिए गठित संचालन समिति की बैठक आयोजित हुए. बैठक के दौरान प्रदेश में रोप-वे निर्माण को लेकर महत्त्वपूर्ण निर्णय लिए गए. मुख्य सचिव ने कहा कि रोप-वे विकास समिति की प्रथम बोर्ड बैठक इस महीने के अंत तक अनिवार्य रूप से आयोजित कर ली जाए. उन्होंने कहा कि इस समिति के लिए सचिव पर्यटन, सदस्य सचिव होंगे. उन्होंने एनएचएलएमएल को एसपीवी का सीईओ एक सप्ताह के भीतर नियुक्त किए जाने के निर्देश दिए, ताकि दिसंबर के अंत तक पहली बोर्ड बैठक आयोजित की जा सके.

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में बनने वाले सभी रोप-वे प्रस्तावों को इस समिति से स्वीकृति लेना अनिवार्य होगा, ताकि अलग-अलग एजेन्सियों द्वारा तैयार किए जा रहे प्रोजेक्ट्स में डुप्लीकेसी न हो. उन्होंने निर्देश दिए कि रोप-वे के सभी बड़े प्रोजेक्ट्स बनने से अगले 5-10 सालों में स्थानीय स्तर पर जिन नए पर्यटक स्थलों का विकास, मार्गों का विस्तारीकरण किए जाने की आवश्यकता है, उनके लिए अभी से रोडमैप तैयार कर लिया जाए. उन्होंने उत्तराखण्ड रोप-वे विकास लिमिटेड के रोड मैप पर भी चर्चा की.

बैठक में बताया गया कि प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेशभर से 50 रोप-वे प्रस्तावित किए गए हैं, जिनमें से कुल 6 प्रस्तावों को प्राथमिकता के आधार पर चयनित किया गया है. इसमें सोनप्रयाग से केदारनाथ और गोविन्दघाट से हेमकुण्ट साहिब प्रोजेक्ट्स का कार्य आवंटन कर दिया गया है. काठगोदाम से हनुमानगढ़ी मंदिर (नैनीताल) अनुमोदन के चरण में है. बताया गया कि कनकचौरी से कार्तिक स्वामी तक रोप-वे की डीपीआर तैयार की जा रही है. रैथल बारसू से बरनाला (उत्तरकाशी) और जोशीमठ-औली-गौरसों रोप-वे की डीपीआर के लिए निविदा प्रक्रिया गतिमान है.

मुख्य सचिव ने कहा कि शुरूआत में इन 6 प्रोजेक्ट्स पर ही फोकस किया जाए. उन्होंने सोनप्रयाग से केदारनाथ और गोविन्दघाट से हेमकुण्ट साहिब रोप-वे प्रोजेक्ट्स की प्रत्येक स्टेज की टाइमलाइन और पर्ट चार्ट तैयार किए जाने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने वन एवं वन्यजीव विभाग की स्वीकृतियों की प्रक्रिया में तेजी जाए लाने की बात भी कही. उन्होंने कहा कि रोप-वे निर्माण के लिए हैवी मशीनरी निर्माण स्थल तक पहुंचाना चुनौतीपूर्ण होगा. इसके लिए सड़कों का टर्निंग रेडियस बढ़ाए जाने और पुलों की मजबूती के लिए आवश्यक कदम अभी से उठा लिए जाएं. मुख्य सचिव ने काठगोदाम से हनुमानगढ़ी मंदिर प्रोजेक्ट में कैंची धाम को भी शामिल करने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा कि कैंची धाम में लगातार बढ़ती श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए वहां रोप-वे प्रोजेक्ट की संभावनाओं को तलाशा जाए.

CG – छत्तीसगढ़ के इस नामी हॉस्पिटल में बड़ा कांड! महिला मरीज को इस हाल में छोड़कर भागा स्टाफ….. फिर जो हुआ…..

दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के धमधा स्थित श्रेया हॉस्पिटल पर प्रशासनिक कार्यवाही लगभग तय है। जिला प्रशासन द्वारा बनाई गई तीन सदस्यीय टीम ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है, जिसमें साफ तौर पर गंभीर लापरवाही सामने आई है।

बता दें, कुछ दिन पूर्व धमधा के श्रेया हॉस्पिटल के स्टाफ ने एक महिला मरीज को भिलाई स्थित शंकराचार्य हॉस्पिटल में भर्ती कराने के बहाने छोड़कर भाग गया था। श्रेया हॉस्पिटल प्रबंधन ने अपनी यहां हुई मौत को छिपाने के लिए महिला को भिलाई भेजा था। एम्बुलेंस के जरिए महिला मरीज और स्टाफ पहुंचे। जैसे ही शंकराचार्य हॉस्पिटल के डॉक्टर ने महिला की जांच की तो पता चला कि महिला की मृत्यु हो चुकी थी।

इसके बाद महिला को ले जाने वाला स्टाफ वहीं से फरार हो गया और शंकराचार्य हॉस्पिटल के स्टाफ ने बिना नाम बताए महिला के शव को अज्ञात करार दे दिया। इस घटना से नाराज महिला मरीज के परिजनों ने प्रशासन में शिकायत दर्ज कराई थी। जिला प्रशासन अब रिपोर्ट के आधार पर कड़ी कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है।

Uttarakhand News- सीएम धामी की विकास सौगात: नैनीताल में 112 करोड़ की 17 योजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास, भीमताल में नई पार्किंग और रोडवेज बस स्टेशन की घोषणा…..

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को ग्राम पंचायत शशबनी, नैनीताल में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग करते हुए लगभग 112 करोड़ 34 लाख की 17 विकास योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया. इस दौरान उन्होंने कार्यक्रम स्थल पर महिला स्वयं सहायता समूहों और विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण कर उत्पादों की सराहना की.

मुख्यमंत्री ने भीमताल क्षेत्र के भीड़ापानी, नाई, डालकन्या, देवनगर, सिलौटी और सुन्दरखाल में मिनी स्टेडियम का निर्माण, ओखलकांडा के करायल बैण्ड–टकुरा वन चौकी रोड का डामरीकरण, भीमताल बाइपास नहर कवरिंग का शेष कार्य पूर्ण कराने, भीमताल में नई पार्किंग और नया रोडवेज बस स्टेशन की स्थापना, भीमताल नगर में अग्निशमन केंद्र खोलने, नौकुचियाताल–खड़की खरौला रोड का मिलान, कसियालेख – काफली – पदीकनाला रोड का डामरीकरण और बडोन–सिमलिया – साननी मोटर मार्ग का मिलान करने की घोषणा की.

सीएम ने कहा कि भीमताल विधानसभा क्षेत्र सहित पूरे नैनीताल जिले के समग्र विकास के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है. क्षेत्रीय विधायक द्वारा उठाए गए मुख्य मार्ग–10 की खराब स्थिति पर तत्काल संज्ञान लेते हुए लगभग 9.5 करोड़ सड़क पुनर्निर्माण के लिए स्वीकृत किए गए हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उत्तराखण्ड आज विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है. सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल सहित सभी क्षेत्रों में तेज़ी से इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है. कैंची धाम, नैनादेवी मंदिर, मुक्तेश्वर धाम सहित सभी पौराणिक मंदिरों का पुनरुद्धार कार्य मिशन मोड में चल रहा है. उन्होंने कहा कि पहाड़ों से पलायन रोकने के लिए ‘एक जनपद–दो उत्पाद’, ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’, ‘स्टेट मिलेट मिशन’, ‘होमस्टे’, ‘वेड इन उत्तराखण्ड’ जैसी योजनाएं स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा दे रही हैं. पलायन आयोग की नवीन रिपोर्ट में रिवर्स पलायन में 44% की बढ़ोतरी, बेरोजगारी दर में 4.4% कमी और नीति आयोग के SDG इंडेक्स में देश में प्रथम स्थान उत्तराखण्ड को प्राप्त हुआ है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में नकल माफियाओं पर लगाम कसने के लिए देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया, जिसके परिणामस्वरूप पिछले वर्षों में 26 हजार से ज्यादा युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है. 100 से ज्यादा नकल माफियाओं को जेल भेजा गया है. इसके अलावा, भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस नीति के तहत विजलेंस के माध्यम से 200 से ज्यादा सरकारी कार्मिकों पर कार्रवाई की गई है. विधायक भीमताल राम सिंह कैड़ा ने मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए क्षेत्र के विकास के लिए विभिन्न योजनाओं की स्वीकृति पर आभार व्यक्त करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया.

Uttarakhand News: CM धामी के आश्वासन के बाद घनसाली स्वास्थ्य जनसंघर्ष मोर्चा ने स्थगित की हड़ताल, जानिए कैसे बनी बात….

देहरादून. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुख्यमंत्री आवास में घनसाली स्वास्थ्य जनसंघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की. मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद प्रतिनिधिमंडल ने अपनी हड़ताल स्थगित कर दी. मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि जनपद टिहरी गढ़वाल के पिलखी क्षेत्र में चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से उत्तराखण्ड सरकार ने एक बड़ा निर्णय लिया है. प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पिलखी (Type-B) को 30 शैय्यायुक्त सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र (CHC) के रूप में उच्चीकृत किया गया है.

इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया गया है. इस उच्चीकरण के साथ, शासन द्वारा कुल 36 पदों (26 नियमित + 10 आउटसोर्सिंग) का सृजन किया गया है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में कोई बाधा न आए और क्षेत्र की जनता को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध हों. ये सभी पद अस्थायी रूप से 28 फरवरी 2026 तक स्वीकृत किए गए हैं, जिन्हें आवश्यकता के अनुसार आगे बढ़ाया भी जा सकता है.

प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया. मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा कि हमारी सरकार का लक्ष्य है कि पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को उसी स्तर पर विकसित किया जाए, जैसा मैदानों में उपलब्ध है. पिलखी क्षेत्र के लिए 30 बेड के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र की स्वीकृति वहां के हजारों लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करेगी. पदों का सृजन स्थानीय युवाओं के लिए नए रोजगार अवसर भी उपलब्ध कराएगा.

उन्होंने आगे कहा, पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है. हमारी सरकार ‘हर घर स्वास्थ्य, हर व्यक्ति स्वस्थ’ के संकल्प के साथ तेजी से काम कर रही है. पिलखी क्षेत्र में यह निर्णय लोगों की लंबी प्रतीक्षा को समाप्त करेगा और निकट भविष्य में बेहतर चिकित्सा ढांचे का लाभ मिलेगा.

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त करते हुए कहा सरकार का संकल्प स्पष्ट है कि प्रदेश का कोई भी नागरिक स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित न रहे. घनसाली क्षेत्र की स्वास्थ्य समस्याओं को गंभीरता से लिया जाएगा और पिलखी स्वास्थ्य केंद्र को चरणबद्ध तरीके से उन्नत किया जाएगा. आवश्यक पदों की तैनाती, भवन सुधार एवं चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार पर शीघ्र कार्रवाई की जाएगी.

Uttarakhand News: पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता शिवराज पाटिल का निधन, सीएम धामी ने दी श्रद्धांजलि…

देहरादून. पूर्व केंद्रीय मंत्री शिवराज पाटिल का निधन (Shivraj Patil Passes Away) हो गया है. उनके निधन से राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी उनके निधन पर दुख व्यक्त किया है. उन्होंने एक्स पर लिखा कि ‘पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री एवं पूर्व लोकसभा अध्यक्ष शिवराज पाटिल जी के निधन का अत्यंत दु:खद समाचार प्राप्त हुआ. ईश्वर से प्रार्थना है कि पुण्यात्मा को श्रीचरणों में स्थान एवं शोक संतप्त परिजनों को यह असीम कष्ट सहन करने की शक्ति प्रदान करें. विनम्र श्रद्धांजलि.’

बता दें कि शिवराज पाटिल लातूर के चाकुर से एक प्रभावशाली कांग्रेस नेता थे और लातूर लोकसभा क्षेत्र से 7 बार जीते थे. 2004 में लोकसभा में हारने के बाद भी उन्होंने राज्यसभा से गृह मंत्री का पद और केंद्रीय जिम्मेदारियां स्वीकार की थी. कांग्रेस और उसके सभी कार्यकर्ताओं ने उनके निधन पर दुख जताया है और उनके परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त की है.

शिवराज पाटिल का राजनीतिक सफर

शिवराज पाटिल का जन्म 12 अक्टूबर 1935 को लातूर जिले के चाकुर में हुआ था. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पहले आयुर्वेद का अभ्यास किया और फिर मुंबई विश्वविद्यालय से कानून की शिक्षा ली. राजनीति में उनका सफर 1967 में शुरू हुआ, जब उन्होंने लातूर नगर पालिका में (Shivraj Patil Passed Away) काम संभाला. यह शुरुआत आगे चलकर एक बड़े राजनीतिक करियर की नींव बनी. 1980 में वे पहली बार लातूर लोकसभा सीट से सांसद बने. उसके बाद लगातार सात बार इसी सीट से जीतकर संसद पहुंचे. यह उपलब्धि उन्हें महाराष्ट्र के सबसे प्रभावशाली नेताओं में जगह दिलाती है.